राष्ट्रपति सम्मान से जगमगाएगा झारखंड, पांच लोक एवं जनजातीय कलाकारों को मिलेगा राष्ट्रीय गौरव

राष्ट्रपति सम्मान से जगमगाएगा झारखंड, पांच लोक एवं जनजातीय कलाकारों को मिलेगा राष्ट्रीय गौरव

author News देखो Team
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#रांची #सांस्कृतिक_सम्मान : झारखंड के पांच कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने से बढ़ा राज्य का मान।

झारखंड की लोक, जनजातीय और पारंपरिक कला को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। राज्य के पांच कलाकारों का चयन प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। इन कलाकारों ने वर्षों की साधना से सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखा है। यह सम्मान झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और कलाकारों के समर्पण का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है।

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  • झारखंड के पांच कलाकारों का राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुरस्कारों के लिए चयन हुआ।
  • तीन कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और दो कलाकारों को उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार मिलेगा।
  • बुटन देवी और सोमबारी देवी को नचनी लोकनृत्य के संरक्षण के लिए सम्मानित किया जाएगा।
  • सुशांत कुमार महापात्र को सरायकेला छऊ मुखौटा कला के संवर्धन के लिए पुरस्कार मिलेगा।
  • बबीता हेंब्रम और कुना समल को युवा कलाकार के रूप में राष्ट्रीय पहचान मिली है।
  • इस उपलब्धि से झारखंड की लोक एवं जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा मिली है।

झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी पहचान मिली है। लोक, जनजातीय और पारंपरिक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले राज्य के पांच कलाकारों को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों के लिए चुना गया है। इन कलाकारों ने अपने अथक प्रयासों और वर्षों की साधना के माध्यम से न केवल अपनी कला को जीवित रखा, बल्कि उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने का भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। यह सम्मान पूरे झारखंड के लिए गर्व और गौरव का विषय माना जा रहा है।

झारखंड की संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर मिली नई पहचान

भारत की सांस्कृतिक विविधता को संरक्षित रखने में लोक कलाकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्यों, लोकगीतों और पारंपरिक कलाओं के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। अब राज्य के पांच कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किए जाने से यह पहचान और मजबूत हुई है।

इन पुरस्कारों को देश के सबसे प्रतिष्ठित सांस्कृतिक सम्मानों में गिना जाता है। इनका उद्देश्य उन कलाकारों को सम्मानित करना है जिन्होंने अपने जीवन को कला संरक्षण और संवर्धन के लिए समर्पित किया है।

तीन कलाकारों को मिलेगा संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

नचनी लोकनृत्य की संरक्षक बनीं बुटन देवी

झारखंड की प्रसिद्ध लोक कलाकार बुटन देवी को नचनी लोकनृत्य परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। उन्होंने वर्षों से इस लोकनृत्य शैली को जीवंत बनाए रखने के लिए कार्य किया है।

सोमबारी देवी को भी राष्ट्रीय सम्मान

नचनी लोकनृत्य को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली सोमबारी देवी का भी चयन संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार के लिए किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर उन्होंने इस कला को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

छऊ मुखौटा कला के लिए सम्मानित होंगे सुशांत कुमार महापात्र

विश्व प्रसिद्ध सरायकेला छऊ नृत्य की आत्मा माने जाने वाले मुखौटों को अपनी कला से नई पहचान देने वाले सुशांत कुमार महापात्र को भी संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उनकी कलाकृतियां न केवल झारखंड बल्कि देश और विदेश में भी सराही जाती हैं।

युवा प्रतिभाओं को मिलेगा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार

संताली लोकनृत्य में उत्कृष्ट योगदान के लिए बबीता हेंब्रम सम्मानित

जनजातीय संस्कृति को मंच प्रदान करने वाली युवा कलाकार बबीता हेंब्रम का चयन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। उन्होंने संताली लोकनृत्य के संरक्षण और प्रदर्शन के माध्यम से युवाओं को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य किया है।

छऊ कला के युवा संरक्षक बने कुना समल

सरायकेला छऊ की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में योगदान देने वाले कुना समल को भी उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उनकी कला साधना और समर्पण ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।

वर्षों की साधना और समर्पण का मिला सम्मान

इन कलाकारों की सफलता अचानक नहीं आई है। इसके पीछे वर्षों की मेहनत, संघर्ष और कला के प्रति समर्पण छिपा हुआ है। सीमित संसाधनों और चुनौतियों के बावजूद इन कलाकारों ने अपनी परंपराओं को जीवित रखा और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का कार्य किया।

झारखंड के कई लोक कलाकार आज भी गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहकर अपनी कला को जीवित रखे हुए हैं। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर मिला यह सम्मान उनके प्रयासों को नई ऊर्जा देने का काम करेगा।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनेगी यह उपलब्धि

सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के राष्ट्रीय सम्मान युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक कलाएं धीरे-धीरे हाशिए पर जा रही हैं, वहीं ऐसे सम्मान यह संदेश देते हैं कि लोक संस्कृति आज भी प्रासंगिक और सम्माननीय है।

विशेषज्ञों के अनुसार झारखंड की जनजातीय और लोक कलाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए सरकार और समाज को मिलकर और अधिक प्रयास करने की आवश्यकता है।

पूरे राज्य में खुशी और गर्व का माहौल

जैसे ही इन कलाकारों के चयन की सूचना सामने आई, कला प्रेमियों, सांस्कृतिक संगठनों और जनजातीय समाज में खुशी की लहर दौड़ गई। विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं ने इसे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।

राज्य के विभिन्न हिस्सों से कलाकारों को बधाइयां दी जा रही हैं। लोगों का कहना है कि यह सम्मान केवल पांच कलाकारों का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की सांस्कृतिक पहचान का सम्मान है।

न्यूज़ देखो: संस्कृति की ताकत को मिला राष्ट्रीय मंच

झारखंड की पहचान केवल खनिज संपदा या प्राकृतिक संसाधनों से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध लोक और जनजातीय संस्कृति से भी है। पांच कलाकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना इस बात का प्रमाण है कि परंपरागत कलाएं आज भी जीवित हैं और देश उन्हें सम्मान दे रहा है। यह उपलब्धि सरकार, समाज और कलाकारों के साझा प्रयासों का परिणाम है। अब आवश्यकता है कि ऐसी कलाओं को संरक्षित करने के लिए और अधिक संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराया जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अपनी संस्कृति को बचाना ही भविष्य को सुरक्षित बनाना है

जब कलाकार सम्मानित होते हैं तो केवल व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी संस्कृति सम्मानित होती है।
लोक कलाएं हमारी पहचान हैं और इन्हें अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
अपने क्षेत्र की कला, संस्कृति और परंपराओं को जानें, समझें और उन्हें आगे बढ़ाने में सहयोग करें।
स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करें और सांस्कृतिक आयोजनों में भागीदारी बढ़ाएं।

झारखंड की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें।
इस खबर को अपने मित्रों और परिवार तक पहुंचाएं ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक पहचान मिल सके।

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