धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर धमधमिया में श्रद्धांजलि सभा, आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

धरती आबा बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर धमधमिया में श्रद्धांजलि सभा, आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

author Jitendra Giri
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#खलारी #बिरसा_पुण्यतिथि : श्रद्धांजलि कार्यक्रम में समाज के लोगों ने बिरसा मुंडा को नमन किया।

रांची जिले के खलारी क्षेत्र अंतर्गत धमधमिया स्थित बिरसा चौक में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने भाग लेकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के संघर्ष, बलिदान और आदर्शों को याद करते हुए उनके मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। आयोजन ने समाज में जननायक बिरसा मुंडा के विचारों के प्रति नई जागरूकता का संदेश दिया।

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  • धमधमिया बिरसा चौक में भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ।
  • उपस्थित लोगों ने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया।
  • वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा के आदर्शों पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
  • कार्यक्रम में बिरसा विस्थापित मंच के पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए।
  • जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए बिरसा मुंडा के संघर्ष को याद किया गया।
  • समाज के लोगों ने उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

खलारी क्षेत्र के धमधमिया स्थित बिरसा चौक में मंगलवार को धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर स्थानीय लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर महान जननायक को याद किया। कार्यक्रम के दौरान उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए और उनके संघर्षमय जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया गया।

श्रद्धा और सम्मान के साथ किया गया माल्यार्पण

पुण्यतिथि कार्यक्रम की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने बारी-बारी से प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके योगदान को स्मरण किया। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा ने अपने अल्प जीवन में जिस साहस और दृढ़ता के साथ अन्याय और शोषण के खिलाफ संघर्ष किया, वह आज भी समाज को प्रेरित करता है।

भगवान बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए संघर्ष, स्वाभिमान और जनजागरण का प्रतीक माना जाता है। उनके नेतृत्व में चले आंदोलनों ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा की लड़ाई को नई दिशा दी थी।

आदर्शों पर चलने का लिया संकल्प

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने समाज में एकता, अधिकारों की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प लिया।

सभा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में भी बिरसा मुंडा के विचार उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके जीवनकाल में थे। उनके संघर्ष ने यह संदेश दिया कि संगठित समाज किसी भी अन्यायपूर्ण व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद कर सकता है।

बड़ी संख्या में लोग हुए शामिल

श्रद्धांजलि कार्यक्रम में बिरसा विस्थापित मंच के अध्यक्ष बहुरा मुंडा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महेन्द्र उरांव, बरतू मुंडा, सुरेश साव, रामेश्वर भोगता, किशुन मुंडा, उमेश लोहरा, सूरज लोहरा, रामलग मुंडा, मनकू मुंडा, चंदर गंझू, बिजय उरांव, बालेश्वर उरांव, सिकंदर गंझू, जतरू गंझू, संजय गंझू, राजू मुंडा और जगलाल गंझू समेत अनेक लोगों ने भाग लिया।

उपस्थित लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्षों पर चर्चा करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उनके इतिहास और विचारों से अवगत कराना जरूरी है। इससे युवाओं में सामाजिक चेतना और अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी।

भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी प्रासंगिक

धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने अंग्रेजी शासन और शोषणकारी व्यवस्थाओं के खिलाफ जनजागरण का अभियान चलाया। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और समाज सेवा की मिसाल है।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिरसा मुंडा का संदेश केवल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि वह समूचे समाज को न्याय, समानता और स्वाभिमान का रास्ता दिखाता है। इसलिए उनके विचारों को संरक्षित और प्रसारित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

न्यूज़ देखो: श्रद्धांजलि से आगे बढ़कर विचारों को अपनाने की जरूरत

भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर आयोजित ऐसे कार्यक्रम केवल औपचारिक श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उनके जीवन का मूल संदेश समाज को संगठित करना, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना और अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना था। आज जब जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में हैं, तब बिरसा मुंडा के विचार और अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनकी विरासत को जीवंत रखने के लिए समाज और युवाओं को उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

संघर्ष और स्वाभिमान की विरासत को आगे बढ़ाएं

भगवान बिरसा मुंडा का जीवन हमें सिखाता है कि परिवर्तन के लिए जागरूकता और एकता सबसे बड़ी शक्ति है।

अपने इतिहास और महापुरुषों के योगदान को जानना तथा नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

समाज, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सकारात्मक पहल करें और जनजागरूकता बढ़ाएं।

यदि आप भी मानते हैं कि बिरसा मुंडा के विचार आज के समय में प्रासंगिक हैं, तो इस खबर पर अपनी राय कमेंट में जरूर दें, इसे अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और जननायकों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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Written by

खलारी, रांची

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