
#रामगढ़ #स्वास्थ्य_निरीक्षण : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अनुपस्थित कर्मी और संदिग्ध भुगतान व्यवस्था उजागर हुई।
रामगढ़ प्रखंड में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गमहरियाहाट का औचक निरीक्षण उस समय चर्चा में आ गया, जब व्यवस्थाएं पूरी तरह अस्त-व्यस्त पाई गईं। प्रखंड विकास पदाधिकारी कमलेंद्र कुमार सिन्हा ने निरीक्षण के दौरान कई कर्मियों को ड्यूटी से अनुपस्थित पाया। उपस्थिति रजिस्टर, वेतन भुगतान और मरीजों की शिकायतों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इस कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
- BDO कमलेंद्र कुमार सिन्हा ने PHC गमहरियाहाट का औचक निरीक्षण किया।
- CHO भारती गुप्ता ड्यूटी से गायब, लेकिन रजिस्टर में पहले से हस्ताक्षर दर्ज।
- ANM कंचन कुमारी, बिटिमय किस्कू और BHW विजय कांत झा अनुपस्थित पाए गए।
- MPW विनय यादव का नाम रजिस्टर में नहीं, फिर भी चार माह से मानदेय भुगतान।
- लोढ़िया गांव के भरत राय ने 15 दिन से इलाज न मिलने की शिकायत की।
- BDO ने सभी कर्मियों से स्पष्टीकरण और वेतन भुगतान के साक्ष्य मांगे।
रामगढ़ प्रखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत उस समय सामने आई, जब प्रखंड विकास पदाधिकारी ने बिना पूर्व सूचना प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान न केवल कर्मचारी अनुपस्थित मिले, बल्कि उपस्थिति और भुगतान से जुड़ी गंभीर खामियां भी उजागर हुईं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
औचक निरीक्षण में क्या-क्या सामने आया
प्रखंड विकास पदाधिकारी कमलेंद्र कुमार सिन्हा ने जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गमहरियाहाट का निरीक्षण किया, तो कई कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर मौजूद नहीं थे। सबसे गंभीर मामला CHO भारती गुप्ता का सामने आया, जो निरीक्षण के समय ड्यूटी से अनुपस्थित थीं, जबकि उपस्थिति रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर पहले से दर्ज पाए गए। यह स्थिति स्पष्ट रूप से अनुशासनहीनता और संभावित फर्जीवाड़े की ओर इशारा करती है।
इसके अलावा ANM कंचन कुमारी और बिटिमय किस्कू के बारे में बताया गया कि वे 22 जनवरी से बिना किसी सूचना के अनुपस्थित हैं। इसी तरह BHW विजय कांत झा भी ड्यूटी से नदारद मिले। इन अनुपस्थितियों ने यह सवाल खड़ा कर दिया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सेवाएं आखिर कैसे संचालित हो रही हैं।
वेतन भुगतान में फर्जीवाड़े का संदेह
निरीक्षण के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। MPW विनय यादव का नाम उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज नहीं पाया गया, बावजूद इसके पिछले चार महीनों से मानदेय का भुगतान किया जा रहा है। इस पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने गंभीर सवाल उठाए।
कमलेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा: “यदि रजिस्टर में नाम दर्ज नहीं है, तो फिर मानदेय किस आधार पर दिया जा रहा है, यह जांच का विषय है। ये खेल किसके इशारे पर हो रहा है?”
इस बयान के बाद स्वास्थ्य केंद्र की प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर संदेह गहराता नजर आया।
मरीजों की परेशानी ने खोली व्यवस्था की पोल
निरीक्षण के दौरान केवल कागजी अनियमितताएं ही नहीं, बल्कि मरीजों की वास्तविक समस्याएं भी सामने आईं। लोढ़िया गांव के भरत राय ने BDO के समक्ष शिकायत दर्ज कराई कि वे पिछले 15 दिनों से इलाज के लिए भटक रहे हैं, लेकिन स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते।
भरत राय की शिकायत ने यह स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारियों की अनुपस्थिति का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ही इलाज का पहला और कई बार एकमात्र सहारा होते हैं। ऐसे में इस तरह की लापरवाही गंभीर चिंता का विषय बन जाती है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
निरीक्षण के बाद प्रखंड विकास पदाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी संबंधित कर्मियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, जिन कर्मचारियों का वेतन या मानदेय भुगतान हुआ है, उनसे संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस निरीक्षण को स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
न्यूज़ देखो: औचक निरीक्षण से उजागर हुई जमीनी सच्चाई
न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य केंद्रों में जवाबदेही तय करने की जरूरत
रामगढ़ में हुआ यह औचक निरीक्षण यह दर्शाता है कि कागजी व्यवस्था और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है। कर्मचारियों की अनुपस्थिति और संदिग्ध भुगतान व्यवस्था आम जनता के अधिकारों पर सीधा असर डालती है। प्रशासन की सख्ती से यह उम्मीद जगी है कि स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
स्वस्थ समाज के लिए सजग प्रशासन जरूरी
स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी समाज की बुनियाद होती हैं और इनमें लापरवाही सीधे लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। औचक निरीक्षण जैसे कदम व्यवस्था को दुरुस्त करने का मजबूत जरिया बन सकते हैं।
जरूरत है कि आम नागरिक भी अपनी समस्याएं खुलकर सामने रखें और जवाबदेही की मांग करें।
आपके क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति कैसी है, अपनी राय साझा करें। इस खबर को आगे बढ़ाएं, ताकि व्यवस्था में सुधार की आवाज और मजबूत हो सके।



