#सिमडेगा #आम्रपाली_आम : पाकरटांड़ से दूसरी खेप में तीन टन आम रवाना।
सिमडेगा जिले के पाकरटांड़ प्रखंड से आम्रपाली आम की दूसरी खेप उत्तर प्रदेश के बाजारों के लिए भेजी गई है। बिरसा हरित ग्राम योजना से जुड़े किसानों को जिला प्रशासन की पहल से बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल रहा है। इस बार करीब 3 टन आम अंतरराज्यीय बाजार में भेजे गए हैं। प्रशासन, जेएसएलपीएस और एफपीओ के सहयोग से ग्रामीण किसान अब बागवानी के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं।
- पाकरटांड़ प्रखंड से दूसरी खेप में करीब 3 टन आम्रपाली आम उत्तर प्रदेश भेजे गए।
- अब तक कुल लगभग 5 टन आम अंतरराज्यीय बाजार में पहुंच चुके हैं।
- किसानों को इस बार आम का मूल्य 24.50 रुपये प्रति किलो मिल रहा है।
- पूरी प्रक्रिया उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी की निगरानी में संचालित हुई।
- जेएसएलपीएस, एफपीओ और मनरेगा के सहयोग से किसानों को बाजार सुविधा मिली।
सिमडेगा जिले के पाकरटांड़ प्रखंड में अब ग्रामीण किसान केवल खेती तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अंतरराज्यीय व्यापार की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत बागवानी से जुड़े किसानों को जिला प्रशासन द्वारा बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की पहल का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। इसी कड़ी में पाकरटांड़ से दूसरी खेप में लगभग तीन टन उन्नत किस्म के आम्रपाली आम उत्तर प्रदेश के बाजारों के लिए रवाना किए गए।
यह पहल न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही है। प्रशासनिक सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण अब स्थानीय किसान सीधे बड़े बाजारों से जुड़ रहे हैं।
दूसरी खेप में पांच किसानों के आम भेजे गए
जानकारी के अनुसार इस दूसरी खेप में पाकरटांड़ प्रखंड के पांच लाभुक किसानों द्वारा उत्पादित आम्रपाली आम को उत्तर प्रदेश भेजा गया है। इससे पहले भी लगभग दो टन आम बाजारों में भेजे जा चुके हैं। इस तरह अब तक कुल करीब पांच टन आम अंतरराज्यीय स्तर पर भेजे जा चुके हैं।
जिला प्रशासन ने बताया कि आने वाले दो से तीन दिनों में अतिरिक्त तीन टन आम फिर दूसरे राज्यों के बाजारों में भेजने की तैयारी चल रही है। इससे स्पष्ट है कि इस बार आम उत्पादन और विपणन दोनों स्तर पर किसानों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं।
किसानों को मिल रहा बेहतर मूल्य
इस वर्ष किसानों को आम्रपाली आम का मूल्य लगभग 24.50 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि पहले स्थानीय बाजारों पर निर्भर रहने के कारण उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता था, लेकिन अब प्रशासनिक सहयोग से सीधे बड़े बाजारों तक पहुंच बन रही है।
किसानों ने बताया कि आंधी-तूफान और खराब मौसम के कारण आम की फसल को नुकसान होने का खतरा लगातार बना रहता है। ऐसे में समय पर खरीद और बाहर बाजार तक परिवहन होने से नुकसान कम हो रहा है और आम का बेहतर दाम भी मिल रहा है।
आम उत्पादक किसानों ने कहा: “जिला प्रशासन के सहयोग से अब आम सीधे बगीचे से बाजार तक पहुंच रहा है, जिससे हमें अच्छा लाभ मिल रहा है।”
प्रशासन की निगरानी में चल रही पूरी प्रक्रिया
पूरी व्यवस्था उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी की निगरानी में संचालित की जा रही है। जिला प्रशासन की ओर से किसानों को बाजार से जोड़ने, खरीदार उपलब्ध कराने और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए लगातार समन्वय किया जा रहा है।
प्रशासन का प्रयास है कि किसान केवल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें विपणन और व्यापारिक प्रक्रिया का भी लाभ मिले। यही कारण है कि अब सिमडेगा का बागवानी उत्पाद राज्य की सीमाओं से बाहर भी पहचान बना रहा है।
जेएसएलपीएस और एफपीओ की अहम भूमिका
इस पूरी पहल में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) और किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। आम की तोड़ाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।
एफपीओ कर्मियों और जेएसएलपीएस कैडरों ने किसानों को तकनीकी सहायता देने के साथ-साथ बाजार व्यवस्था में भी सहयोग किया। इसके अलावा मनरेगा, प्रदान संस्था और किसान उत्पादक कंपनी भी इस पहल में भागीदारी निभा रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही नई दिशा
बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत फलदार पौधों की खेती और बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ग्रामीण किसानों और महिला समूहों को स्थायी आय का स्रोत उपलब्ध कराना है।
पाकरटांड़ के किसान अब यह महसूस कर रहे हैं कि यदि सही मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध हो तो गांवों से भी बड़े व्यापारिक मॉडल तैयार किए जा सकते हैं। इससे पलायन कम करने और ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने में भी मदद मिल सकती है।
प्रशासन ने भविष्य की योजना बताई
उप विकास आयुक्त दीपांकर चौधरी ने कहा कि जिला प्रशासन किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य दिलाने के लिए लगातार काम कर रहा है। आने वाले समय में अधिक किसानों और महिला समूहों को इस पहल से जोड़ा जाएगा।
वहीं उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण किसानों और महिला समूहों के लिए आय सृजन का मजबूत माध्यम बन रही है। जिला प्रशासन कृषि और बागवानी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है।
गांवों से राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही पहचान
सिमडेगा जैसे ग्रामीण जिलों के लिए यह पहल केवल व्यापार नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता कदम माना जा रहा है। किसानों की मेहनत, प्रशासनिक सहयोग और योजनाओं के सही क्रियान्वयन का यह उदाहरण अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक बन सकता है।
ग्रामीण इलाकों में फल उत्पादन और बागवानी आधारित खेती भविष्य में किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का बड़ा माध्यम बन सकती है। पाकरटांड़ के किसानों ने यह साबित कर दिया है कि सही दिशा और सहयोग मिलने पर गांवों से भी राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाई जा सकती है।
न्यूज़ देखो: बागवानी से बदल रही ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर
पाकरटांड़ से आम्रपाली आम की अंतरराज्यीय सप्लाई यह दिखाती है कि योजनाओं का सही क्रियान्वयन किसानों की जिंदगी बदल सकता है। प्रशासन, एफपीओ और जेएसएलपीएस का समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है। यदि इसी तरह किसानों को बाजार, तकनीक और परिवहन सुविधा मिलती रही तो सिमडेगा जैसे जिले कृषि आधारित व्यापार के बड़े केंद्र बन सकते हैं। अब जरूरत इस मॉडल को और अधिक गांवों तक पहुंचाने की है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
गांव की मेहनत अब राष्ट्रीय बाजार तक पहुंच रही
किसानों की सफलता पूरे समाज की ताकत होती है।
स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाया जा सकता है।
युवा खेती और बागवानी को आधुनिक व्यवसाय के रूप में अपनाएं।
महिला समूहों और छोटे किसानों को आगे बढ़ाने में सामूहिक सहयोग जरूरी है।
अपने क्षेत्र के किसानों की मेहनत को सम्मान दें और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दें।
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अपनी राय कमेंट में जरूर लिखें और ग्रामीण विकास की इस पहल को समर्थन दें।

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