#गुमला : गुमला में पांच माह से वेतन न मिलने पर स्वास्थ्यकर्मियों ने उठाई आवाज।
गुमला जिले के सदर अस्पताल और विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने पिछले पांच महीनों से वेतन न मिलने को लेकर मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी से मुलाकात की। स्वास्थ्यकर्मियों ने आर्थिक संकट और कार्यस्थल पर अनियमितताओं की शिकायत की। कर्मियों का कहना है कि लंबे समय से वेतन भुगतान में देरी हो रही है। सिविल सर्जन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
- गुमला सदर अस्पताल और CHC में कार्यरत स्वास्थ्यकर्मियों ने 5 माह से वेतन न मिलने पर उठाई आवाज।
- मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी से मुलाकात कर समस्याएं रखीं।
- कर्मियों ने GSIS प्राइवेट लिमिटेड के तहत कार्यरत होने और अनियमित वेतन का आरोप लगाया।
- न्यूनतम वेतन से कम भुगतान, PF-ESI और GST कटौती पर भी गंभीर सवाल उठे।
- सिविल सर्जन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र भुगतान का आश्वासन दिया।
- वेतन पर्ची और वास्तविक भुगतान में अंतर को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी देखी गई।
गुमला जिले के स्वास्थ्य तंत्र में कार्यरत संविदा स्वास्थ्यकर्मियों ने मंगलवार को एकजुट होकर अपने वेतन संकट को लेकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया। ये सभी कर्मचारी सदर अस्पताल और विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ नर्स, लैब टेक्निशियन, फार्मासिस्ट, ओटी असिस्टेंट, एक्स-रे टेक्निशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, हेल्थ वर्कर और अन्य सपोर्ट स्टाफ के रूप में कार्यरत हैं।
कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है। लगातार पांच महीनों से भुगतान न होने के कारण उनके सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
स्वास्थ्यकर्मियों ने उठाए गंभीर आरोप
कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें लगभग 15,619 रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाता है, जो उनके कार्यभार और निर्धारित मानकों के अनुसार काफी कम है। इसके साथ ही कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि नियुक्ति के शुरुआती छह महीनों का पीएफ और ईएसआई जमा नहीं किया गया।
कर्मियों के अनुसार वेतन भुगतान हर महीने 15 तारीख के बाद किया जाता है, जिससे उनकी वित्तीय योजना पूरी तरह प्रभावित हो जाती है। सबसे गंभीर आरोप यह भी सामने आया कि वेतन से जीएसटी की कटौती की जा रही है, जिसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती।
सिविल सर्जन से हुई महत्वपूर्ण बैठक
सभी प्रभावित स्वास्थ्यकर्मी मंगलवार को गुमला सदर अस्पताल पहुंचे और सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी को आवेदन सौंपा। बैठक के दौरान कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं।
सिविल सर्जन ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और संबंधित एजेंसी तथा विभागीय स्तर पर कार्रवाई कर जल्द भुगतान सुनिश्चित करने का भरोसा दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वेतन पर्ची और वास्तविक भुगतान में अंतर की जांच की जाएगी।
आर्थिक और मानसिक दबाव में कर्मचारी
पिछले पांच महीनों से वेतन न मिलने के कारण स्वास्थ्यकर्मी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। कई कर्मचारियों ने बताया कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, जबकि कार्यस्थल पर ड्यूटी लगातार जारी रखनी पड़ रही है।
इस स्थिति ने कर्मचारियों पर मानसिक दबाव भी बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से उनके परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं।
GSIS एजेंसी की भूमिका पर सवाल
कर्मचारियों ने सामान्य सिक्योरिटी एंड इंटेलिजेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (GSIS) पर भी कई गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसी द्वारा न तो समय पर वेतन दिया जा रहा है और न ही सामाजिक सुरक्षा लाभों का सही पालन किया जा रहा है।
सिविल सर्जन की भूमिका और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
गुमला के सिविल सर्जन डॉ. शंभू नाथ चौधरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी से जवाब-तलब किया जाएगा और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।
इस दौरान कर्मचारियों ने सिविल सर्जन की संवेदनशीलता की सराहना की और उम्मीद जताई कि जल्द ही उन्हें उनका लंबित वेतन मिल जाएगा।

न्यूज़ देखो: स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कर्मियों का वेतन संकट चिंताजनक संकेत
यह मामला स्पष्ट करता है कि स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत संविदा कर्मियों की स्थिति आज भी अस्थिर बनी हुई है। पांच महीने तक वेतन न मिलना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय पर समाधान नहीं हुआ तो इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। यह भी जरूरी है कि एजेंसी आधारित नियुक्तियों की पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सम्मान और अधिकार दोनों जरूरी हैं, जिम्मेदार व्यवस्था की ओर बढ़ें
स्वास्थ्यकर्मी समाज की रीढ़ होते हैं, जिनके बिना व्यवस्था की कल्पना भी नहीं की जा सकती। ऐसे में उनका समय पर वेतन और सम्मान दोनों सुनिश्चित होना आवश्यक है।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी जरूरी है।
आइए, ऐसे मुद्दों पर आवाज उठाएं और जिम्मेदार प्रशासन की मांग करें।
अपनी राय कमेंट करें, खबर साझा करें और समाज में जागरूकता फैलाने में भागीदार बनें।

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