#गढ़वा #कृषिअभियान : रंका के तमगेकलां पंचायत में किसानों को मृदा स्वास्थ्य और उत्पादकता पर किया गया जागरूक
गढ़वा जिले के रंका प्रखंड के तमगेकलां पंचायत में कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा राष्ट्रीय ग्राम पंचायत दिवस के अवसर पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसानों को पंचायती राज की महत्ता के साथ-साथ संतुलित उर्वरक उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती करने पर जोर दिया, जिससे उत्पादन बढ़े और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहे।
- तमगेकलां पंचायत, रंका प्रखंड में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम।
- राष्ट्रीय ग्राम पंचायत दिवस (24 अप्रैल 2026) पर विशेष आयोजन।
- 73वें संविधान संशोधन की 33वीं वर्षगांठ पर चर्चा।
- किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग की दी गई जानकारी।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती करने पर जोर।
- जैविक खाद, कम्पोस्ट और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग की सलाह।
गढ़वा जिले के रंका प्रखंड अंतर्गत तमगेकलां पंचायत में 24 अप्रैल 2026 को कृषि विज्ञान केंद्र, गढ़वा द्वारा राष्ट्रीय ग्राम पंचायत दिवस के अवसर पर एक विशेष जागरूकता अभियान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को पंचायती राज व्यवस्था की महत्ता से अवगत कराना और खेती में संतुलित उर्वरक उपयोग के प्रति जागरूक करना था।
पंचायत दिवस का महत्व बताया गया
कार्यक्रम में उपस्थित वैज्ञानिकों और अतिथियों ने बताया कि राष्ट्रीय ग्राम पंचायत दिवस ऐतिहासिक 73वें संविधान संशोधन अधिनियम की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने देश में पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया। इस वर्ष इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की 33वीं वर्षगांठ मनाई गई।
विशेषज्ञों ने कहा कि पंचायतें ग्रामीण विकास की आधारशिला हैं और इनके सशक्त होने से गांवों का समग्र विकास संभव है।
संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष जोर
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण खेती में संतुलित उर्वरक उपयोग पर जागरूकता रहा। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने से मृदा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि:
- रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद और कम्पोस्ट का भी उपयोग करें
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें
- मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं
इससे न केवल फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक बनी रहेगी।
वैज्ञानिकों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी
कार्यक्रम में रंका प्रखंड की प्रमुख श्रीमती लीलावती देवी, तमगेकलां पंचायत की मुखिया श्रीमती रिंकी देवी, पंचायत सचिव सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
वहीं कृषि विज्ञान केंद्र, गढ़वा के वरीय वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. महेश चंद्र जेराई, पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. बंधनु ओरांव, एसआरएफ नवलेश कुमार सहित अन्य विशेषज्ञों ने किसानों को तकनीकी जानकारी प्रदान की।
किसानों से अपील
कार्यक्रम के दौरान किसानों से आग्रह किया गया कि वे उर्वरकों का उपयोग मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करें। इससे न केवल लागत कम होगी, बल्कि उत्पादन भी बेहतर होगा।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि संतुलित उर्वरक उपयोग से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भूमि सुरक्षित रहती है।
न्यूज़ देखो: खेती में संतुलन ही सफलता की कुंजी
आज के समय में केवल अधिक उत्पादन ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि टिकाऊ और संतुलित खेती पर ध्यान देना जरूरी है। गढ़वा में आयोजित यह कार्यक्रम किसानों को नई दिशा देने वाला है। यदि किसान वैज्ञानिक सलाह को अपनाते हैं, तो निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा।
जागरूक किसान, समृद्ध गांव
संतुलित खेती अपनाएं, मिट्टी को बचाएं।
वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाएं।
जागरूक बनें और दूसरों को भी प्रेरित करें।
ऐसी ही सकारात्मक खबरों के लिए जुड़े रहें “न्यूज़ देखो” के साथ।

🗣️ Join the Conversation!
What are your thoughts on this update? Read what others are saying below, or share your own perspective to keep the discussion going. (Please keep comments respectful and on-topic).