#कोलेबिरा #बकरीद_पर्व : लसिया जामा मस्जिद में नमाज के बाद शांति और भाईचारे की दुआ मांगी गई।
कोलेबिरा प्रखंड के लसिया स्थित जामा मस्जिद में ईद-उल-अजहा यानी बकरीद पर्व की नमाज अदा की गई। नमाज के दौरान क्षेत्र में अमन-चैन, खुशहाली और भाईचारे की दुआ मांगी गई। इस अवसर पर मौलाना कमरुल आफरीन के नेतृत्व में धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ, जबकि शांति समिति के सदस्य फिरोज अली ने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से पर्व मनाने की अपील की। उन्होंने सोशल मीडिया पर कुर्बानी से जुड़े फोटो और वीडियो साझा नहीं करने का आग्रह भी किया।
- लसिया जामा मस्जिद में अदा हुई बकरीद की नमाज।
- नमाज का नेतृत्व मौलाना कमरुल आफरीन ने किया।
- लोगों ने क्षेत्र में अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
- फिरोज अली ने भाईचारा और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
- कुर्बानी से जुड़े फोटो-वीडियो सोशल मीडिया पर साझा नहीं करने का आग्रह।
- शांति समिति की ओर से शांतिपूर्ण माहौल में पर्व मनाने की अपील।
कोलेबिरा प्रखंड क्षेत्र के लसिया स्थित जामा मस्जिद में शनिवार को बकरीद पर्व ईद-उल-अजहा पूरे धार्मिक उत्साह और भाईचारे के माहौल में मनाया गया। सुबह से ही मस्जिद परिसर में मुस्लिम समुदाय के लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। नमाज के दौरान लोगों ने अपने परिवार, गांव, समाज और पूरे क्षेत्र में सुख-समृद्धि, शांति और आपसी सौहार्द की दुआ मांगी। धार्मिक कार्यक्रम का नेतृत्व मौलाना कमरुल आफरीन ने किया। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी और भाईचारे का संदेश दिया।
धार्मिक आस्था और भाईचारे के माहौल में संपन्न हुई नमाज
बकरीद इस्लाम धर्म का महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है, जिसे त्याग, समर्पण और कुर्बानी के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। लसिया जामा मस्जिद में आयोजित नमाज में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल हुए। नमाज के बाद लोगों ने देश और समाज में शांति बनाए रखने की दुआ की।
मौलाना कमरुल आफरीन ने अपने संबोधन में कहा कि बकरीद केवल कुर्बानी का पर्व नहीं बल्कि इंसानियत, प्रेम और भाईचारे का संदेश देने वाला त्योहार है। उन्होंने लोगों से समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना बनाए रखने की अपील की।
फिरोज अली ने दी बकरीद की मुबारकबाद
इस अवसर पर लसिया जामा मस्जिद के सेक्रेटरी सह शांति समिति के सक्रिय सदस्य एवं झामुमो केंद्रीय समिति सदस्य फिरोज अली भी उपस्थित रहे। उन्होंने सभी क्षेत्रवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व लोगों को प्रेम और भाईचारे के सूत्र में बांधने का कार्य करता है।
फिरोज अली ने कहा: “बकरीद का पर्व त्याग, कुर्बानी और भाईचारे का संदेश देता है। सभी लोग आपसी प्रेम और सौहार्द के साथ पर्व मनाएं तथा समाज में भाईचारा बनाए रखें।”
उन्होंने कहा कि त्योहारों का असली उद्देश्य लोगों को जोड़ना और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार करना होता है। ऐसे पर्व समाज में एकता और सामाजिक समरसता को मजबूत करने का कार्य करते हैं।
सोशल मीडिया पर संयम बरतने की अपील
फिरोज अली ने लोगों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा कि कुर्बानी का कार्य अपने घरों में शांतिपूर्ण एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न करें। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के दौर में छोटी-छोटी बातें भी बड़ा रूप ले सकती हैं, इसलिए सभी लोगों को जिम्मेदारी और समझदारी के साथ व्यवहार करना चाहिए।
फिरोज अली ने कहा: “कुर्बानी से संबंधित कोई भी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर साझा न करें, ताकि समाज में सौहार्द और शांति बनी रहे।”
उन्होंने कहा कि शांति समिति के सदस्य होने के नाते उनकी जिम्मेदारी है कि क्षेत्र में भाईचारा और शांतिपूर्ण वातावरण बना रहे। उन्होंने लोगों से अफवाहों से बचने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की भी अपील की।
पर्व के दौरान दिखा आपसी मेलजोल
बकरीद के अवसर पर मस्जिद परिसर और आसपास के क्षेत्रों में आपसी मेलजोल और भाईचारे का सुंदर दृश्य देखने को मिला। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे से मुलाकात कर बधाई दी। बच्चों और युवाओं में भी पर्व को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। पर्व के दौरान लोगों ने आपसी मतभेद भूलकर प्रेम और सौहार्द का परिचय दिया। क्षेत्र में शांति और सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए स्थानीय लोगों ने भी सहयोग किया।
शांति समिति की सक्रिय भूमिका
त्योहार के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने में शांति समिति के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही। समिति के सदस्यों ने लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से पर्व मनाने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए लगातार जागरूक किया।
स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन और शांति समिति के प्रयासों की सराहना की। लोगों का कहना था कि धार्मिक पर्वों के दौरान समाज के सभी वर्गों को मिलकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों तक भाईचारे का संदेश पहुंचे।
न्यूज़ देखो: बकरीद के संदेश में छिपा सामाजिक सौहार्द का महत्व
लसिया जामा मस्जिद में आयोजित बकरीद की नमाज केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का मजबूत संदेश भी है। जिस तरह से लोगों ने शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की, वह आज के समय में बेहद महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया पर संयम बरतने की सलाह भी समाज में जिम्मेदार नागरिकता की मिसाल पेश करती है। ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने और आपसी विश्वास को मजबूत करने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
प्रेम और भाईचारे का संदेश समाज को मजबूत बनाता है
त्योहार केवल परंपराएं निभाने का माध्यम नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और इंसानियत का संदेश देने का अवसर भी होते हैं। बकरीद का पर्व त्याग, सेवा और भाईचारे की सीख देता है। यदि समाज का हर व्यक्ति प्रेम, संयम और आपसी सम्मान की भावना अपनाए तो सामाजिक सौहार्द और मजबूत होगा।
पर्वों को केवल उत्सव नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में भी देखें। अफवाहों से बचें, सकारात्मक संदेश फैलाएं और समाज में शांति बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएं।

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