गढ़वा में किसानों के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान, 20 प्रखंडों में चला विशेष जागरूकता कार्यक्रम

गढ़वा में किसानों के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग अभियान, 20 प्रखंडों में चला विशेष जागरूकता कार्यक्रम

author Avinash Kumar
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#गढ़वा #कृषि_जागरूकता : चार दिवसीय अभियान में किसानों को दी गई वैज्ञानिक खेती की जानकारी।

गढ़वा जिले में 18 से 21 अप्रैल 2026 तक संतुलित उर्वरक उपयोग को लेकर व्यापक जागरूकता अभियान चलाया गया। जिला कृषि कार्यालय, आत्मा गढ़वा और कृषि विज्ञान केंद्र के संयुक्त प्रयास से यह कार्यक्रम सभी 20 प्रखंडों में आयोजित हुआ। अभियान का उद्देश्य किसानों को मृदा परीक्षण आधारित खेती और जैविक विकल्पों के उपयोग के लिए प्रेरित करना था। इस पहल से किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन की दिशा में मार्गदर्शन मिला।

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  • 18 से 21 अप्रैल 2026 तक गढ़वा के 20 प्रखंडों में अभियान चला।
  • जिला कृषि कार्यालय, आत्मा गढ़वा और कृषि विज्ञान केंद्र की संयुक्त पहल।
  • किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार उर्वरक उपयोग की सलाह।
  • जैविक खाद, हरी खाद और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर।
  • कृषि वैज्ञानिकों ने संतुलित उर्वरक उपयोग के वैज्ञानिक तरीके समझाए।

गढ़वा जिले में किसानों को आधुनिक और टिकाऊ खेती की दिशा में जागरूक करने के लिए संतुलित उर्वरक उपयोग पर विशेष अभियान चलाया गया। 18 अप्रैल से 21 अप्रैल 2026 तक चले इस चार दिवसीय कार्यक्रम में जिले के सभी 20 प्रखंडों को शामिल किया गया। इस पहल के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक तरीके से खेती करने, मृदा स्वास्थ्य बनाए रखने और लागत कम करने के उपायों की जानकारी दी गई।

अभियान का उद्देश्य और महत्व

इस जागरूकता अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि केवल रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित और मिश्रित खेती पद्धति अपनाना जरूरी है। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि मृदा की उर्वरता बनाए रखने के लिए जैविक और प्राकृतिक उपायों का समावेश अत्यंत आवश्यक है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के महत्व के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि उसी के आधार पर उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। इससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहती है।

किसानों को दिए गए महत्वपूर्ण सुझाव

कार्यक्रम के दौरान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दी गईं, जिनका सीधा लाभ खेती की उत्पादकता पर पड़ता है।

  • मृदा परीक्षण के आधार पर ही उर्वरक का प्रयोग करें
  • नाइट्रोजन (यूरिया) का उपयोग 2–3 बार में विभाजित करके करें
  • N:P:K का संतुलित अनुपात बनाए रखें, केवल यूरिया पर निर्भर न रहें
  • उर्वरक डालते समय खेत में पर्याप्त नमी सुनिश्चित करें
  • उर्वरक को जड़ों के पास 5–10 सेमी गहराई पर डालें
  • सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए पर्णीय छिड़काव (1–4%) अपनाएं
  • खरपतवार नियंत्रण को प्राथमिकता दें

इन सुझावों के माध्यम से किसानों को यह बताया गया कि सही तकनीक अपनाकर कम लागत में बेहतर उत्पादन संभव है।

जैविक और प्राकृतिक खेती पर विशेष जोर

अभियान में जैविक और प्राकृतिक खेती के महत्व को भी विस्तार से समझाया गया। किसानों को बताया गया कि गोबर खाद, कम्पोस्ट और वर्मी-कम्पोस्ट का अधिक उपयोग मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में सहायक होता है।

हरी खाद जैसे ढैंचा और सनई के उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। इसके अलावा जीवामृत, बीजामृत और घनजीवामृत जैसे प्राकृतिक इनपुट के प्रयोग पर भी जोर दिया गया।

फसल अवशेषों का पुनः उपयोग (मल्चिंग) और जैव उर्वरक जैसे राइजोबियम, पीएसबी और एजोटोबैक्टर के प्रयोग को भी किसानों के लिए लाभकारी बताया गया।

कृषि विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि संतुलित + जैविक + प्राकृतिक खेती का संयोजन ही भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार है।

व्यापक भागीदारी से सफल हुआ अभियान

इस कार्यक्रम में आत्मा गढ़वा के प्रखंड तकनीकी प्रबंधक एवं सहायक तकनीकी प्रबंधकों की सक्रिय भूमिका रही। साथ ही पंचायत स्तर के जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लेकर इसे सफल बनाया।

किसानों ने भी इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की जानकारी उन्हें पहले कभी इतने व्यवस्थित तरीके से नहीं मिली थी। इससे उन्हें अपनी खेती को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

खेती में बदलाव की ओर बढ़ता गढ़वा

यह अभियान गढ़वा जिले में कृषि क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव का संकेत देता है। किसानों को अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है।

यदि किसान इन सुझावों को अपनाते हैं, तो न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि मिट्टी की गुणवत्ता भी लंबे समय तक बनी रहेगी।

न्यूज़ देखो: टिकाऊ खेती की दिशा में मजबूत पहल

गढ़वा में चलाया गया यह जागरूकता अभियान खेती के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल किसानों को केवल उत्पादन बढ़ाने ही नहीं, बल्कि मिट्टी और पर्यावरण को बचाने का संदेश भी देती है। अब जरूरी है कि इस अभियान के सुझाव जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू हों और प्रशासन इसकी निरंतर निगरानी करे। क्या यह पहल किसानों की आय बढ़ाने में बड़ा बदलाव ला पाएगी, इस पर सबकी नजर रहेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेती बदलेगी तो भविष्य बदलेगा, जागरूक बनें जिम्मेदार किसान

आज का किसान ही देश की असली ताकत है और उसकी जागरूकता ही समृद्ध भारत की नींव है।
सही जानकारी और तकनीक अपनाकर हम खेती को लाभकारी बना सकते हैं।
जरूरत है कि हर किसान नई तकनीकों को समझे और अपनाए।
प्राकृतिक संसाधनों को बचाकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर भविष्य सुनिश्चित किया जा सकता है।

अगर आप भी खेती से जुड़े हैं या किसानों की भलाई चाहते हैं,
तो इस जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं।
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