बिरसा हरित आम बागवानी योजना से बदली किसान की तस्वीर, पत्रकार तस्लीम खान बने मिसाल

बिरसा हरित आम बागवानी योजना से बदली किसान की तस्वीर, पत्रकार तस्लीम खान बने मिसाल

author Akram Ansari
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#लातेहार #कृषि_पहल : बागवानी योजना से किसान ने मेहनत से खेती को दी नई पहचान।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत छेचा गांव में बिरसा हरित आम बागवानी योजना के तहत एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है। वरिष्ठ पत्रकार सह किसान तस्लीम खान ने अपनी निजी जमीन पर आधुनिक खेती और बागवानी कर नई पहचान बनाई है। एक एकड़ भूमि में आम के साथ विभिन्न सब्जियों की खेती कर वे आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को मजबूत करने का उदाहरण बन रही है।

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  • छेचा गांव के तस्लीम खान ने बागवानी योजना से खेती को नया रूप दिया।
  • लगभग एक एकड़ जमीन में आम और सब्जियों की उन्नत खेती।
  • भिंडी, खीरा, कद्दू, टमाटर, बैंगन सहित कई फसलों का उत्पादन।
  • जरूरत से अधिक उत्पादन को स्थानीय बाजार में बिक्री
  • परिवार, विशेषकर धर्मपत्नी का सहयोग, खेती को बना रहा सफल।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के छेचा पंचायत अंतर्गत छेचा गांव में एक किसान ने अपनी मेहनत और लगन से खेती को नई दिशा देने का कार्य किया है। वरिष्ठ पत्रकार सह किसान तस्लीम खान ने बिरसा हरित आम बागवानी योजना का लाभ उठाते हुए अपनी जमीन को न केवल उपजाऊ बनाया, बल्कि उसे आय का सशक्त माध्यम भी बना दिया है। उनका यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।

बिरसा हरित आम बागवानी योजना से मिली नई राह

तस्लीम खान ने अपनी निजी रैयती जमीन पर लगभग एक एकड़ क्षेत्र को घेराबंदी कर व्यवस्थित तरीके से खेती शुरू की। इस योजना के तहत उन्होंने आम के पौधे लगाए और उसके साथ ही बहुफसली खेती को अपनाया। यह योजना झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना और हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना है।

इस योजना का सही उपयोग कर तस्लीम खान ने यह साबित कर दिया कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए, तो सीमित संसाधनों में भी बेहतर परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।

सब्जियों की बहुफसली खेती से बढ़ी आमदनी

अपने खेत में तस्लीम खान विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों की खेती कर रहे हैं। इनमें भिंडी, खीरा, ककड़ी, कद्दू, प्याज, नेनुआ, करेला, टमाटर और बैंगन जैसी फसलें शामिल हैं। यह बहुफसली खेती उन्हें सालभर आय का स्रोत प्रदान करती है।

वे बताते हैं कि घर की जरूरत के लिए ताजी सब्जियां यहीं से मिल जाती हैं और अतिरिक्त उत्पादन को वे स्थानीय लोगों को उचित मूल्य पर बेच देते हैं। इससे न केवल उनकी आय बढ़ती है, बल्कि आसपास के लोगों को भी ताजी सब्जियां उपलब्ध होती हैं।

तस्लीम खान ने कहा: “खेती हमारे परिवार की पुरानी परंपरा है। इससे घर की जरूरतें पूरी होती हैं और शरीर भी स्वस्थ रहता है। हम आगे भी इसे जारी रखेंगे।”

परिवार का सहयोग बना सफलता की कुंजी

तस्लीम खान की इस सफलता के पीछे उनके परिवार का भी महत्वपूर्ण योगदान है। विशेष रूप से उनकी धर्मपत्नी खेती के कार्य में उनका पूरा साथ देती हैं। जब वे पत्रकारिता के कार्य से बाहर रहते हैं, तब उनकी पत्नी खेत की देखरेख और सिंचाई की जिम्मेदारी संभालती हैं।

यह पारिवारिक सहयोग खेती को निरंतर और सफल बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

पारंपरिक और आधुनिक खेती का संतुलन

आम बागवानी के अलावा तस्लीम खान अन्य जमीन पर मौसम के अनुसार धान, मक्का, गेहूं, सरसों और अरहर की भी खेती करते हैं। इस तरह वे पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़कर बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं।

जरूरत से अधिक उत्पादन को वे बाजार या स्थानीय साहुकारों को बेच देते हैं, जिससे उनकी आय में स्थिरता बनी रहती है।

ग्रामीणों के लिए बन रहे प्रेरणा स्रोत

तस्लीम खान का यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया है। ग्रामीण अब उनके खेत का दौरा कर खेती के नए तरीके सीख रहे हैं और बहुफसली खेती को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

उनका मानना है कि यदि हर किसान अपनी जमीन का सही उपयोग करे, तो गांव की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।

न्यूज़ देखो: योजनाओं का सही उपयोग बदलेगा गांव की तस्वीर

तस्लीम खान की कहानी यह दिखाती है कि सरकारी योजनाएं तभी सफल होती हैं जब लाभुक उन्हें सही दिशा में अपनाएं। बिरसा हरित आम बागवानी योजना जैसे प्रयास ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकते हैं, बशर्ते जागरूकता और मेहनत दोनों साथ हों। क्या अन्य किसान भी इस मॉडल को अपनाएंगे? क्या प्रशासन ऐसे सफल किसानों को प्रोत्साहित करेगा? हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

खेती में मेहनत और सोच का संगम ही बनाता है सफलता की कहानी

तस्लीम खान की तरह यदि हर किसान अपनी जमीन और संसाधनों का सही उपयोग करे, तो गांव की तस्वीर बदल सकती है। खेती केवल पेशा नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार है।

आज जरूरत है कि हम पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक को जोड़ें और खेती को लाभकारी बनाएं।

आप भी अपने आसपास के सफल किसानों से सीखें, नई तकनीक अपनाएं और खेती को सम्मानजनक और लाभकारी बनाएं। इस प्रेरणादायक कहानी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें और ग्रामीण विकास की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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