बाल सुरक्षित वातावरण की ओर बढ़ा चैनपुर, बाल संसदों और किशोरियों के उत्साह से सजा वार्षिक सम्मेलन

बाल सुरक्षित वातावरण की ओर बढ़ा चैनपुर, बाल संसदों और किशोरियों के उत्साह से सजा वार्षिक सम्मेलन

author Aditya Kumar
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#चैनपुर #बाल_सुरक्षा : 10 गांवों के बच्चों ने सम्मेलन में भाग लेकर दिया जागरूकता का संदेश।

चैनपुर में गुड शेफर्ड संस्था द्वारा संचालित सीसीएसई प्रोजेक्ट के तहत बाल सुरक्षित वातावरण निर्माण को लेकर वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। बरवे हाई स्कूल हॉल में हुए कार्यक्रम में 10 गांवों के बाल संसद और किशोरी समूह के बच्चों ने भाग लिया। सम्मेलन में शिक्षा, अनुशासन और नियमित उपस्थिति पर जोर दिया गया। बेहतर उपस्थिति वाले बच्चों को सम्मानित कर प्रोत्साहित भी किया गया।

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  • बरवे हाई स्कूल हॉल में भव्य वार्षिक सम्मेलन आयोजित।
  • 10 गांवों के बाल संसद और किशोरी समूह शामिल हुए।
  • बच्चों को शिक्षा और अनुशासन का संदेश दिया गया।
  • बेहतर उपस्थिति वाले बच्चों को सम्मानित किया गया।
  • कई जनप्रतिनिधि, शिक्षक और अधिकारी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
  • बाल सुरक्षित वातावरण निर्माण पर विशेष जोर।

चैनपुर प्रखंड में बच्चों के अधिकार, शिक्षा और सुरक्षित वातावरण को लेकर एक प्रेरणादायक आयोजन देखने को मिला। गुड शेफर्ड संस्था द्वारा संचालित सीसीएसई प्रोजेक्ट “भारत चैनपुर में बाल संसद और किशोरियों के समूह के माध्यम से बाल सुरक्षित वातावरण का निर्माण” के तहत रविवार को बरवे हाई स्कूल हॉल में स्थल स्तरीय वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 10 गांवों से पहुंचे बच्चों, किशोरियों, अभिभावकों और सामाजिक प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

बच्चों के जोश से गूंजा सभागार

सम्मेलन स्थल पर सुबह से ही उत्साहपूर्ण माहौल रहा। अलग-अलग गांवों से पहुंचे बाल संसद और किशोरी समूह के सदस्य पारंपरिक उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।

बच्चों ने अनुशासन, नेतृत्व और सहभागिता का शानदार परिचय दिया। पूरे कार्यक्रम में सीखने और आगे बढ़ने की ऊर्जा साफ दिखाई दी।

शिक्षा और अनुशासन पर जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने बच्चों को संबोधित करते हुए शिक्षा के महत्व पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए नियमित पढ़ाई, अनुशासन और स्कूल में उपस्थिति अत्यंत जरूरी है।

उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने और निरंतर मेहनत करने के लिए प्रेरित किया।

मुख्य अतिथि ने कहा: “जो बच्चा नियमित स्कूल जाता है और अनुशासन अपनाता है, वही भविष्य में आगे बढ़ता है।”

बाल संसद की भूमिका पर चर्चा

सम्मेलन में बाल संसदों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि गांव स्तर पर बाल संसद बच्चों को नेतृत्व, अधिकारों की समझ और सामूहिक जिम्मेदारी का अवसर देती है।

इस मंच के माध्यम से बच्चे स्कूल, स्वच्छता, बाल सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर अपनी आवाज रख सकते हैं।

किशोरियों के समूह ने दिया सशक्त संदेश

कार्यक्रम में शामिल किशोरी समूहों ने भी आत्मविश्वास और जागरूकता का परिचय दिया। समूहों के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वाभिमान और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

इस तरह के मंच ग्रामीण क्षेत्र की बालिकाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।

सम्मान समारोह बना आकर्षण

बच्चों का मनोबल बढ़ाने के लिए विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें झरगांव और तिलवारी गांव के उन बच्चों को सम्मानित किया गया, जिनकी स्कूल उपस्थिति सबसे बेहतर और नियमित रही।

सम्मान मिलने पर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे और अन्य विद्यार्थियों को भी प्रेरणा मिली।

आयोजकों ने कहा: “नियमित उपस्थिति ही अच्छी शिक्षा की पहली शर्त है।”

आयोजन में इनकी रही अहम भूमिका

कार्यक्रम को सफल बनाने में सीसीएसई प्रोजेक्ट की इंचार्ज सिस्टर नित्या और परियोजना समन्वयक बिनय पन्ना की मुख्य भूमिका रही।

मौके पर जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा, चैनपुर मुखिया शोभा देवी, चैनपुर थाना के एसआई विजय उरांव, बरवे हाई स्कूल के उप-प्रधानाचार्य फादर अजीत कुमार एक्का, सेंट माइकल इंग्लिश मीडियम स्कूल के प्राचार्य फादर प्रताप विलोम मौजूद रहे।

इसके अलावा चाइल्ड फंड ऑफ इंडिया के स्टाफ सचित विल्सन एक्का, सीताराम मुंडा, अजय तिर्की, ईजे स्टाफ की ज्योति किरण एक्का, कुमुद मुंडा, होली क्रॉस की बहनें, जेएसएलपीएस स्टाफ, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सहायिकाएं और बड़ी संख्या में अभिभावक उपस्थित रहे।

सुरक्षित समाज की मजबूत नींव

विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को यदि सुरक्षित वातावरण, शिक्षा और भागीदारी का अवसर मिले, तो समाज की दिशा बदल सकती है।

बाल संसद जैसे मंच बच्चों में नेतृत्व, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं।

न्यूज़ देखो: बच्चों को मंच मिलेगा तो समाज मजबूत होगा

चैनपुर का यह आयोजन बताता है कि बाल सुरक्षा केवल नारे से नहीं, भागीदारी से संभव है। जब बच्चों को बोलने, सीखने और नेतृत्व का अवसर मिलता है, तब वे बदलाव के वाहक बनते हैं। प्रशासन, स्कूल और समाज को ऐसे कार्यक्रमों को लगातार समर्थन देना चाहिए। सुरक्षित बचपन ही मजबूत भारत की पहचान है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हर बच्चे को मिले सुरक्षित भविष्य

बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
स्कूल उपस्थिति और अनुशासन को आदत बनाएं।
बेटियों और बेटों को बराबर अवसर दें।
बच्चों की आवाज सुनना भी जिम्मेदारी है।
आज का सुरक्षित बचपन ही कल का उज्ज्वल समाज है।
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Written by

डुमरी, गुमला

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