कॉफी विद एसडीएम: प्रज्ञा केंद्र संचालकों से संवाद में उठी ई-गवर्नेंस सुधार और राइट टू सर्विस एक्ट की मजबूती की मांग

कॉफी विद एसडीएम: प्रज्ञा केंद्र संचालकों से संवाद में उठी ई-गवर्नेंस सुधार और राइट टू सर्विस एक्ट की मजबूती की मांग

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #प्रज्ञा_केंद्र : एसडीएम ने प्रज्ञा केंद्र संचालकों से बातचीत कर सरकारी सेवाओं की पारदर्शिता और नागरिक सुविधा बढ़ाने पर जोर दिया
  • अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम में प्रज्ञा केंद्र संचालकों और सीएससी ऑपरेटरों से संवाद किया।
  • बैठक में श्रमाधान योजना में गड़बड़ी, फर्जी प्रज्ञा केंद्र और पंचायत स्तर पर वीएलई की समस्याओं पर चर्चा हुई।
  • झारखंड राइट टू सर्विस एक्ट 2011 के तहत अधिकारियों द्वारा विलंब या बिना कारण आवेदन रिजेक्ट करने पर कार्रवाई और अर्थदंड का आश्वासन दिया गया।
  • डीएससी/प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने बैंक अकाउंट सीज, कार्यालयों के ऑपरेटरों की मनमानी और मुखिया द्वारा राशि दुरुपयोग जैसी समस्याओं की जानकारी दी।
  • कार्यक्रम में करीब तीन दर्जन प्रज्ञा केंद्र संचालक और दोनों डिस्ट्रिक्ट सीएससी मैनेजर मनीष कुमार व कौशल किशोर मौजूद थे।

गढ़वा में अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने आज “कॉफी विद एसडीएम” कार्यक्रम के तहत प्रज्ञा केंद्र संचालकों एवं सीएससी ऑपरेटरों से विस्तृत संवाद किया। बैठक में संचालकों ने अपने दैनिक कार्यों में आने वाली व्यावहारिक समस्याओं और सरकारी कर्मियों से समन्वय में आने वाली कठिनाइयों को सामने रखा। एसडीएम ने सभी की बात ध्यानपूर्वक सुनी और ई-गवर्नेंस सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों से आमजन तक सुविधाएं सहज रूप से पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।

श्रमाधान योजना में गड़बड़ी से संचालकों को हो रही बदनामी

नवादा मोड़ स्थित राज किरण प्रज्ञा केंद्र के संचालक गौतम कश्यप और अन्य प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने बताया कि श्रमाधान योजना में गड़बड़ी के कारण प्रज्ञा केंद्र संचालकों की झूठी बदनामी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बिचौलिये मजदूरों से ₹300–₹500 तक ले रहे हैं और डीबीटी राशि में से आधी मांगते हैं।

संजय कुमार ने कहा: “मैंने मौके पर श्रम अधीक्षक को फोन कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।”

फर्जी प्रज्ञा केंद्र संचालकों पर कार्रवाई की मांग

संचालकों ने यह भी बताया कि कई लोग बिना आधिकारिक आईडी के प्रज्ञा केंद्र का बोर्ड लगाकर गलत कार्य कर रहे हैं। इससे प्रज्ञा केंद्र संचालकों की छवि प्रभावित होती है।

संजय कुमार ने आश्वासन दिया: “इन मामलों में उचित कार्रवाई की जाएगी।”

पंचायत के वीएलई और मुखिया द्वारा राशि दुरुपयोग

कुछ प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने बताया कि पंचायत भवन में रखरखाव के नाम पर मिलने वाली राशि का उपयोग नहीं किया जा रहा है। महुलिया पंचायत में गेट तक न लगना और सफाई का काम स्वयं करना पड़ना इसकी पुष्टि करता है।

एसडीएम ने कहा: “पंचायती राज पदाधिकारी को मामला अग्रसारित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

बैंक अकाउंट और कार्यालयों के ऑपरेटरों की समस्याएं

गढ़वा मेन रोड के संचालक प्रतीक राज सोनी ने बैंक अकाउंट सीज होने की समस्या बताई। इसके अलावा, कई कार्यालयों के कंप्यूटर ऑपरेटर आवेदन की प्रोसेसिंग में देरी कर रहे हैं, जिससे नागरिक परेशान हैं।

संजय कुमार ने कहा: “मैं इन मामलों को वरीय पदाधिकारियों के संज्ञान में लाऊंगा।”

राइट टू सर्विस एक्ट को बढ़ावा देने का आह्वान

एसडीएम ने सभी संचालकों को झारखंड राइट टू सर्विस एक्ट 2011 के तहत 363 नागरिक सेवाओं के दायरे और नियमावली की जानकारी दी।

संजय कुमार ने कहा: “नागरिकों को दोषी अधिकारियों के खिलाफ अपील करने के लिए प्रोत्साहित करें।”

आवेदन रिजेक्ट करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई

संचालकों ने बताया कि कई बार कार्यालय के कर्मी पात्र आवेदनों को बिना कारण रिजेक्ट कर देते हैं।

संजय कुमार ने कहा: “ऐसे मामलों के स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराएँ, विभागीय कार्रवाई और अर्थदंड का प्रावधान लागू किया जाएगा।”

प्रज्ञा केंद्र संचालकों को सशक्त बनाने का आश्वासन

संचालकों ने पंचायत स्तर पर कार्य करने में इंफ्रास्ट्रक्चर और सहयोग की कमी की शिकायत की। एसडीएम ने आश्वासन दिया कि उनकी ओर से सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी और सभी सेवा शुल्क रेट कार्ड के अनुसार ही वसूले जाएँ।

संजय कुमार ने कहा: “आप लोग प्रशासन और नागरिकों के बीच ई-गवर्नेंस की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।”

न्यूज़ देखो: गढ़वा में प्रज्ञा केंद्र संचालकों की समस्याओं पर प्रशासन ने लिया संज्ञान

गढ़वा के प्रज्ञा केंद्र संचालकों ने कई गंभीर मुद्दे उठाए, जिनमें श्रमाधान योजना की गड़बड़ी, फर्जी प्रज्ञा केंद्र, बैंक अकाउंट सीज और कंप्यूटर ऑपरेटर की मनमानी शामिल हैं। एसडीएम ने इन सभी मुद्दों पर कार्रवाई और सुधार का भरोसा दिया। यह बैठक प्रशासन और नागरिकों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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प्रेरक समापन और सक्रिय नागरिकता का संदेश

प्रज्ञा केंद्र संचालक प्रशासन और नागरिकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनकी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सशक्त बनाना न केवल ई-गवर्नेंस को प्रभावी बनाता है, बल्कि आमजन को सरकारी सेवाओं तक सहज पहुँच भी सुनिश्चित करता है। सजग रहें, सक्रिय बनें। अपने विचार कमेंट में साझा करें, खबर को दोस्तों तक पहुँचाएँ और ई-गवर्नेंस सुधार में सहयोग करें।

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गढ़वा

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