#गढ़वा #प्रशासन_संवाद : कॉफी विद एसडीएम में आदिवासी मुद्दे—अधिकार, शिक्षा और आजीविका पर विचार-विमर्श।
गढ़वा में एसडीएम संजय कुमार ने कॉफी विद एसडीएम कार्यक्रम में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं से संवाद किया। बैठक में जल जंगल जमीन, शिक्षा, स्वास्थ्य और योजनाओं की पहुंच पर चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कई मुद्दे उठाए, जिन पर प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया। यह संवाद प्रशासन और समाज के बीच विश्वास बढ़ाने का प्रयास रहा।
- एसडीएम संजय कुमार ने आदिवासी प्रतिनिधियों से संवाद किया।
- जल, जंगल और जमीन के अधिकारों पर चर्चा।
- शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार मुद्दे उठाए गए।
- नशा मुक्ति और परंपरा संरक्षण पर जोर।
- प्रशासन ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।
गढ़वा जिले में प्रशासन और आदिवासी समाज के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। सदर एसडीएम संजय कुमार के साप्ताहिक कार्यक्रम ‘कॉफी विद एसडीएम’ के तहत इस बार आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ विस्तृत संवाद आयोजित किया गया।
इस बैठक में गढ़वा, मेराल, माझिआंव, डंडई और रंका क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया और अपने समाज से जुड़े मुद्दों को खुलकर रखा।
जल जंगल जमीन के मुद्दों पर जोर
बैठक के दौरान आदिवासी प्रतिनिधियों ने पारंपरिक अधिकारों से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने वनाधिकार पट्टा, लघु वनोपज के उचित मूल्य और स्थानीय संसाधनों पर अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की।
एक प्रतिनिधि ने कहा: “जल, जंगल और जमीन हमारे जीवन का आधार है, इसे सुरक्षित रखना जरूरी है।”
शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर चर्चा
संवाद में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर भी गंभीर चर्चा हुई। विद्यालयों में उपस्थिति, ड्रॉपआउट की समस्या और युवाओं के लिए कौशल विकास के अवसरों को लेकर सुझाव दिए गए।
साथ ही रोजगार और आजीविका के बेहतर विकल्प विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
स्वास्थ्य और पोषण की चुनौतियां
बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, कुपोषण और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे भी सामने आए।
नशा और अंधविश्वास के खिलाफ अभियान की मांग
प्रतिनिधियों ने समाज में बढ़ती नशाखोरी और अंधविश्वास को लेकर चिंता जताई। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में अभियान चलाने का अनुरोध किया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा: “नशा और अंधविश्वास समाज को पीछे धकेल रहे हैं।”
सांस्कृतिक पहचान पर जोर
बैठक में सरहुल, करमा जैसे पारंपरिक पर्वों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने स्थानीय परंपराओं और ज्ञान को संरक्षित करने की आवश्यकता जताई।
सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत
बैठक में पेंशन, आवास, राशन, मनरेगा और आजीविका मिशन जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने बताया कि कई योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है।
कुछ प्रतिनिधियों ने घुमकुड़िया में शिक्षकों की नियुक्ति, नए घुमकुड़िया निर्माण, सरना स्थल की घेराबंदी और डाकिया योजना में पारदर्शिता जैसे मुद्दे उठाए।
प्रशासन ने दिया आश्वासन
एसडीएम संजय कुमार ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा—
“आदिवासी समाज का विकास और अधिकारों का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकता है।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर समस्याओं के समाधान का प्रयास किया जाएगा।
संवाद से बढ़ा विश्वास
बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। इस दौरान एसडीएम ने सभी प्रतिभागियों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
प्रतिभागियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे उनकी आवाज सीधे प्रशासन तक पहुंचती है।
उपस्थित रहे प्रतिनिधि
इस कार्यक्रम में लवली टोप्पो, उमेश उरांव, सुखबीर उरांव, मौसम उरांव, चतुर्गुण बैगा, गोपाल कुजूर, मनी परहिया, मंजू देवी खरवार, सुरेश परहिया, सुनील उरांव, सोहराय उरांव, देवनाथ उरांव, योगेंद्र उरांव, महेंद्र उरांव, पंचन उरांव, जगदीश उरांव सहित कई लोग उपस्थित रहे।



न्यूज़ देखो: संवाद से समाधान की राह
गढ़वा का यह कार्यक्रम दिखाता है कि जब प्रशासन सीधे समाज से संवाद करता है, तो जमीनी समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। अब देखना होगा कि इन मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अपनी बात रखें, बदलाव लाएं
समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब हम उन्हें सामने रखें।
संवाद से ही भरोसा और विकास दोनों बढ़ते हैं।
जरूरी है कि समाज और प्रशासन साथ मिलकर काम करें।
आइए, हम जागरूक नागरिक बनें।
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