#लातेहार #पदयात्रा : टोरी फ्लाईओवर परियोजना में देरी और बढ़ती लागत के विरोध में किसानों एवं माकपा कार्यकर्ताओं का आंदोलन तेज होगा।
लातेहार जिले के टोरी-चंदवा क्षेत्र में फ्लाईओवर निर्माण में हो रही देरी को लेकर किसान और माकपा कार्यकर्ता 15 जून को पदयात्रा निकालेंगे। इस कार्यक्रम में पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। माकपा नेताओं का आरोप है कि परियोजना की लागत कई गुना बढ़ने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। क्षेत्र के लोग वर्षों से जाम और यातायात समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जिसके खिलाफ यह पदयात्रा आयोजित की जा रही है।
- 15 जून को टोरी-चंदवा क्षेत्र में किसान और माकपा कार्यकर्ताओं की पदयात्रा आयोजित।
- टोरी फ्लाईओवर परियोजना में देरी और निर्माण कार्य शुरू नहीं होने का मुद्दा प्रमुख।
- प्रकाश विप्लव, सुखनाथ लोहरा और संजय पासवान कार्यक्रम में होंगे शामिल।
- परियोजना की लागत 43 करोड़ रुपये से बढ़कर 119.71 करोड़ रुपये से अधिक पहुंची।
- अब तक करीब छह बार टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं।
- जाम की समस्या से परेशान लोगों के समर्थन में आंदोलन को धार देने की तैयारी।
लातेहार जिले के टोरी-चंदवा क्षेत्र में लंबे समय से लंबित फ्लाईओवर निर्माण को लेकर किसानों और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। 15 जून को आयोजित होने वाली पदयात्रा की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। माकपा नेताओं का कहना है कि वर्षों से लंबित इस परियोजना के कारण आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पदयात्रा में शामिल होंगे पार्टी के वरिष्ठ नेता
माकपा राज्य कमेटी सदस्य अयुब खान और जिला सचिव रसीद मियां ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी कर कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पदयात्रा में पार्टी के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, जिला प्रभारी सुखनाथ लोहरा तथा राज्य कमेटी सदस्य संजय पासवान भी शामिल होंगे।
नेताओं के अनुसार, यह पदयात्रा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि क्षेत्र की जनता की लंबे समय से चली आ रही मांगों को सरकार और संबंधित विभागों तक पहुंचाने का प्रयास है।
फ्लाईओवर परियोजना की लागत में भारी बढ़ोतरी
माकपा नेताओं ने बताया कि टोरी फ्लाईओवर परियोजना का प्रारंभिक प्राक्कलन लगभग 43 करोड़ रुपये था। लेकिन समय बीतने के साथ परियोजना की लागत बढ़कर 119 करोड़ 71 लाख 70 हजार 507 रुपये 90 पैसे तक पहुंच गई है।
इसके बावजूद अब तक परियोजना का निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो सका है। नेताओं ने आरोप लगाया कि लागत बढ़ने के बावजूद नई राशि पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिससे परियोजना लगातार लटकती जा रही है।
छह बार निकला टेंडर, फिर भी नहीं शुरू हुआ निर्माण
प्रेस वक्तव्य में कहा गया कि फ्लाईओवर निर्माण के लिए अब तक लगभग छह बार टेंडर निकाला जा चुका है। एक बार संवेदक को कार्य आवंटित भी हुआ, लेकिन कम राशि और अन्य कारणों के चलते उसने काम छोड़ दिया।
इसके बाद भी विभागीय स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं हो सकी, जिसके कारण परियोजना अधर में लटकी हुई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य शुरू हो जाता तो क्षेत्र को यातायात जाम की गंभीर समस्या से काफी राहत मिल सकती थी।
जाम से परेशान हैं आम लोग
टोरी-चंदवा क्षेत्र रेलवे क्रॉसिंग और राष्ट्रीय राजमार्ग के कारण लंबे समय से यातायात दबाव झेल रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक और यात्री वाहन यहां से गुजरते हैं, जिससे घंटों जाम की स्थिति बनी रहती है।
माकपा नेताओं का कहना है कि फ्लाईओवर निर्माण में हो रही देरी का खामियाजा आम जनता, किसानों, छात्रों, मरीजों और व्यवसायियों को भुगतना पड़ रहा है। लोगों का समय और धन दोनों बर्बाद हो रहे हैं, जबकि दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
अयुब खान और रसीद मियां ने कहा: “केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग विभाग की उदासीनता के कारण टोरी क्षेत्र की जनता वर्षों से जाम की समस्या झेल रही है। फ्लाईओवर निर्माण में हो रही देरी के खिलाफ जनता की आवाज को मजबूत करने के लिए पदयात्रा आयोजित की जा रही है।”
जनता की मांग को आंदोलन के जरिए मिलेगी ताकत
माकपा का कहना है कि पदयात्रा के माध्यम से सरकार और संबंधित विभागों का ध्यान इस महत्वपूर्ण परियोजना की ओर आकर्षित किया जाएगा। पार्टी नेताओं का दावा है कि क्षेत्र के किसान, मजदूर, युवा और आम नागरिक इस अभियान में बड़ी संख्या में भाग लेंगे।
पदयात्रा के दौरान फ्लाईओवर निर्माण कार्य जल्द शुरू करने, लंबित टेंडर प्रक्रिया पूरी करने और क्षेत्र को जाम से मुक्ति दिलाने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी।
न्यूज़ देखो: विकास परियोजनाओं में देरी पर बढ़ते सवाल
टोरी फ्लाईओवर परियोजना की बढ़ती लागत और लगातार टलते निर्माण कार्य कई सवाल खड़े करते हैं। यदि किसी महत्वपूर्ण परियोजना का प्राक्कलन कई गुना बढ़ जाए और फिर भी उसका निर्माण शुरू न हो, तो इसका सीधा असर जनता पर पड़ता है। क्षेत्र की यातायात समस्या वर्षों से बनी हुई है और लोगों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और संबंधित विभाग इस जनदबाव पर क्या कदम उठाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विकास की राह तभी आसान होगी जब जनता की आवाज सुनी जाएगी
सड़क, पुल और फ्लाईओवर जैसी आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण परियोजनाएं नहीं बल्कि लोगों के दैनिक जीवन से जुड़ी जरूरतें हैं।
जब जनता अपनी समस्याओं को लोकतांत्रिक तरीके से उठाती है तो शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दों पर जागरूक रहें और जनहित के सवालों पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
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