#चंदवा #शहादत_दिवस : जननायक लादू बाबू की स्मृति में श्रद्धांजलि और प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम आयोजित होगा।
चंदवा के लोकप्रिय जननायक स्वर्गीय प्रहलाद प्रसाद उर्फ लादू बाबू के शहादत दिवस पर 15 जून को श्रद्धांजलि सभा सह प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। बुद्ध बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में होने वाले इस आयोजन में क्षेत्र के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे। लादू बाबू को न्यायप्रिय, संघर्षशील और जनहित के मुद्दों पर मुखर नेतृत्व के लिए याद किया जाता है। उनकी शहादत आज भी क्षेत्र के लोगों को सामाजिक न्याय और जनसेवा के लिए प्रेरित करती है।
- 15 जून को मनाया जाएगा स्वर्गीय प्रहलाद प्रसाद उर्फ लादू बाबू का शहादत दिवस।
- बुद्ध बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में होगा श्रद्धांजलि सभा सह प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम।
- कार्यक्रम का आयोजन सुबह 9:30 बजे से किया जाएगा।
- लादू बाबू को क्षेत्र में न्यायप्रिय और जनहित के लिए संघर्षरत नेता के रूप में याद किया जाता है।
- 15 जून 2015 को जनआंदोलन की लड़ाई के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
- आयोजन समिति ने सभी समाज, युवाओं और आम लोगों से कार्यक्रम में शामिल होने की अपील की है।
चंदवा के सामाजिक और जनआंदोलन के इतिहास में अपनी अलग पहचान रखने वाले स्वर्गीय प्रहलाद प्रसाद उर्फ लादू बाबू की शहादत को सोमवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाएगा। उनके शहादत दिवस के अवसर पर श्रद्धांजलि सभा और प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
बुद्ध बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में होगा आयोजन
शौंडिक जायसवाल समाज चंदवा के अध्यक्ष प्रमोद साहू ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि श्रद्धांजलि सभा सह प्रतिमा अनावरण कार्यक्रम का आयोजन बुद्ध बाजार स्थित शिव मंदिर परिसर में किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9:30 बजे से होगी।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक स्मृति कार्यक्रम नहीं बल्कि उन मूल्यों को याद करने का अवसर है, जिनके लिए लादू बाबू ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था।
न्यायप्रिय और जननायक के रूप में थी पहचान
चंदवा क्षेत्र में लादू बाबू की पहचान एक ऐसे जननेता के रूप में रही, जो समाज के हर वर्ग की समस्याओं को अपनी समस्या मानते थे। वे गरीब, मजदूर, किसान और आम लोगों के अधिकारों की आवाज बुलंद करते थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, लादू बाबू का व्यक्तित्व जाति, धर्म और सामाजिक सीमाओं से ऊपर था। वे सभी समुदायों के लोगों के बीच समान रूप से सम्मानित थे। किसी भी जनसमस्या पर वे खुलकर अपनी बात रखते थे और उसके समाधान के लिए संघर्ष करने से पीछे नहीं हटते थे।
जनहित के मुद्दों पर हमेशा रहे मुखर
लादू बाबू का जीवन जनसेवा और सामाजिक न्याय के संघर्ष का प्रतीक माना जाता है। क्षेत्र में सड़क, शिक्षा, रोजगार और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर वे लगातार सक्रिय रहते थे।
जनआंदोलनों में उनकी सक्रिय भागीदारी और लोगों के हक-अधिकार के लिए संघर्ष ने उन्हें आम जनता के बीच लोकप्रिय बना दिया था। यही कारण है कि उनके निधन के वर्षों बाद भी लोग उन्हें सम्मान और श्रद्धा के साथ याद करते हैं।
प्रमोद साहू ने कहा: “लादू बाबू ने अपना पूरा जीवन न्याय, जनहित और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया था। उनकी शहादत आज भी चंदवा के लोगों को संघर्ष और जनसेवा की प्रेरणा देती है।”
15 जून 2015 को हुई थी हत्या
प्रमोद साहू ने बताया कि जनआंदोलन की लड़ाई के दौरान 15 जून 2015 को लादू बाबू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्या की घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया था।
आज भी उनकी शहादत को लोग जनहित और न्याय की लड़ाई में दिए गए सर्वोच्च बलिदान के रूप में याद करते हैं। उनके समर्थकों और क्षेत्रवासियों का मानना है कि उन्होंने समाज के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
प्रतिमा अनावरण के साथ दी जाएगी श्रद्धांजलि
शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धांजलि सभा के साथ-साथ लादू बाबू की प्रतिमा का अनावरण भी किया जाएगा। आयोजन समिति का मानना है कि यह प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, विचारों और जनसेवा की भावना की याद दिलाती रहेगी।
कार्यक्रम में क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि, युवा तथा आम नागरिक शामिल होंगे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
लोगों से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील
आयोजन समिति ने चंदवा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। समिति का कहना है कि यह अवसर केवल श्रद्धांजलि देने का नहीं बल्कि समाज और जनहित के लिए किए गए संघर्षों को याद करने का भी है।
कार्यक्रम में शामिल होकर लोग लादू बाबू के विचारों और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी लेंगे।
न्यूज़ देखो: जनसेवा का संघर्ष कभी भुलाया नहीं जाता
समाज में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल एक व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि एक विचार और संघर्ष के प्रतीक के रूप में बन जाती है। लादू बाबू का जीवन जनहित, न्याय और सामाजिक सरोकारों के प्रति समर्पण का उदाहरण माना जाता है। उनकी स्मृति में आयोजित कार्यक्रम यह दर्शाता है कि जनता के लिए किए गए कार्य वर्षों बाद भी लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई पीढ़ी उनके संघर्ष और मूल्यों को किस तरह आगे बढ़ाती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शहादत की विरासत से प्रेरणा लेने का समय
समाज को बेहतर बनाने वाले लोगों की स्मृतियां केवल इतिहास नहीं होतीं, वे भविष्य का मार्ग भी दिखाती हैं।
जनहित, न्याय और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को मजबूत करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है।
ऐसे अवसर हमें समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने और सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करते हैं।
अपने क्षेत्र के प्रेरणादायक व्यक्तित्वों की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी एक महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य है।
लादू बाबू को अपनी श्रद्धांजलि व्यक्त करें, इस खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें और जनसेवा व सामाजिक न्याय के संदेश को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं।

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