#लातेहारसमाचार #आंदोलनकारीसंघर्ष : महुआडांड़ बैठक में आंदोलनकारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।
लातेहार जिले के महुआडांड़ में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की बैठक आयोजित हुई, जिसमें आंदोलनकारियों से जुड़े वादों को पूरा नहीं किए जाने पर नाराजगी जताई गई। बैठक में 10 जून 2026 को मुख्यमंत्री आवास के अनिश्चितकालीन घेराव और प्रदर्शन को ऐतिहासिक बनाने का निर्णय लिया गया। आंदोलनकारियों ने सम्मान, पहचान, पेंशन और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग की।
- महुआडांड़ के अमवा टोली पंचायत भवन में आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की बैठक आयोजित।
- सरकार पर आंदोलनकारियों से किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप।
- 10 जून 2026 को मुख्यमंत्री आवास के अनिश्चितकालीन घेराव का ऐलान।
- आंदोलनकारियों ने सम्मान पेंशन, पहचान और रोजगार की मांग दोहराई।
- नेताओं ने आंदोलन को “अंतिम संघर्ष” और “आर-पार की लड़ाई” बताया।
- बैठक में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और पदाधिकारी मौजूद रहे।
लातेहार जिले के महुआडांड़ में झारखंड आंदोलनकारी संघर्ष मोर्चा की आवश्यक बैठक आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलनकारियों ने नाराजगी जाहिर की। अमवा टोली स्थित पंचायत भवन परिसर में हुई इस बैठक में सरकार द्वारा आंदोलनकारियों से किए गए वादों को अब तक पूरा नहीं किए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 10 जून 2026 को मुख्यमंत्री आवास के समक्ष अनिश्चितकालीन घेराव-प्रदर्शन कार्यक्रम को ऐतिहासिक बनाया जाएगा। आंदोलनकारियों ने इसे अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई बताया।
सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल अध्यक्ष रोजलीन तिर्की ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों को राजकीय मान-सम्मान, अलग पहचान, सम्मान पेंशन और उनके बच्चों को रोजगार व नियोजन की गारंटी देने का सरकार ने संकल्प लिया था।
उन्होंने कहा:
“सरकार ने आंदोलनकारियों से कई वादे किए थे, लेकिन आज तक उन पर अमल नहीं हुआ। आंदोलनकारी अपनी इज्जत और प्रतिष्ठा बचाने के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि 10 जून का आंदोलन आंदोलनकारियों का अंतिम संघर्ष साबित हो सकता है।
आंदोलन को लेकर दी गई चेतावनी
रोजलीन तिर्की ने कहा कि मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान अनिश्चितकालीन प्रदर्शन, आमरण अनशन और आत्मदाह तक का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उन्होंने सरकार से समय रहते आंदोलनकारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की।
बैठक में मौजूद लोगों ने भी आंदोलन को निर्णायक लड़ाई बताते हुए व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही।
“न्याय और सम्मान चाहिए, टेंशन नहीं”
विशिष्ट अतिथि एवं महिला पलामू प्रमंडल अध्यक्ष विलंगना किंडो ने आंदोलनकारियों की उपेक्षा पर नाराजगी जताते हुए कहा:
“सरकार आंदोलनकारियों को न्याय, पहचान, सम्मान और पेंशन दे, टेंशन नहीं।”
उन्होंने कहा कि अलग राज्य के लिए संघर्ष करने वाले लोगों की लगातार अनदेखी की जा रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
“आर-पार की लड़ाई” का ऐलान
बैठक की अध्यक्षता कर रहे अध्यक्ष रंजीत टोप्पो ने कहा कि सरकार को झारखंड राज्य गठन के संवैधानिक मूल्यों और मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा:
“आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करने के बजाय उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। अब आंदोलनकारियों के हक पर डाका डालने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने 10 जून के आंदोलन को “आर-पार की लड़ाई” बताया और सभी आंदोलनकारियों से एकजुट होकर भाग लेने की अपील की।
बड़ी संख्या में शामिल हुए आंदोलनकारी
बैठक में बड़ी संख्या में आंदोलनकारी और संगठन के सदस्य मौजूद रहे। प्रमुख रूप से:
जेरोम तिग्गा, राजेश लकड़ा, वीरेंद्र टोप्पो, बेरियानुस मिंज, कृति किरण गिद्ध, फूलजेंट एक्का, तमासुयुस मिंज, सुमित हिटलर मिंज, बृजमोहन मिंज, कालिस्ता तिग्गा, हरि एक्का, जॉन कुजूर, फ्लोर एक्का, गीता तिर्की, मेसरेकन खलखो, सेबेरियुस मिंज, अजय कुजुर, पुरुष वाणी खालखो, विनोद कुजुर और निर्मल कुजूर सहित सैकड़ों आंदोलनकारी उपस्थित रहे।
आंदोलनकारियों के मुद्दे फिर चर्चा में
बैठक के बाद एक बार फिर झारखंड आंदोलनकारियों के सम्मान, पहचान और पेंशन से जुड़े मुद्दे चर्चा में आ गए हैं। लंबे समय से आंदोलनकारी संगठन सरकार से ठोस नीति और सुविधाओं की मांग करते रहे हैं।
अब 10 जून को प्रस्तावित आंदोलन को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी नजरें टिक गई हैं।
न्यूज़ देखो: राज्य निर्माण के संघर्ष और सम्मान की मांग का सवाल
झारखंड आंदोलनकारियों का मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं बल्कि राज्य निर्माण के इतिहास और सम्मान से भी जुड़ा हुआ है। जिन लोगों ने अलग राज्य के लिए संघर्ष किया, वे आज भी पहचान और अधिकार की मांग कर रहे हैं।
महुआडांड़ की बैठक यह संकेत देती है कि आंदोलनकारी अब अपनी मांगों को लेकर निर्णायक रुख अपनाने की तैयारी में हैं। सरकार के लिए यह जरूरी है कि संवाद और समाधान की दिशा में गंभीर पहल हो ताकि स्थिति टकराव की ओर न बढ़े। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकार, सम्मान और लोकतांत्रिक संघर्ष की ताकत
लोकतंत्र में हर आवाज का सम्मान होना जरूरी है। जब लोग अपने अधिकारों और पहचान के लिए संघर्ष करते हैं, तो समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि उनकी बात सुनी जाए।
जरूरी है कि संवाद, संवेदनशीलता और न्याय के रास्ते पर आगे बढ़ते हुए समस्याओं का समाधान निकाला जाए। यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की असली ताकत है।
सजग रहें, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए आवाज उठाएं। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भागीदारी निभाएं।

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