पातालकोहड टोला में दूषित पानी पीने को मजबूर आदिवासी परिवार, स्वच्छ पेयजल को लेकर उठी आवाज

पातालकोहड टोला में दूषित पानी पीने को मजबूर आदिवासी परिवार, स्वच्छ पेयजल को लेकर उठी आवाज

author Akram Ansari
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#लातेहारसमाचार #जलसंकट : बरवाडीह के सुदूर गांव में स्वच्छ पानी के लिए ग्रामीणों की गुहार।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत पातालकोहड टोला में आदिवासी परिवार दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से स्वच्छ पेयजल की उचित व्यवस्था नहीं की गई, जिससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। मामले को लेकर प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने विभाग और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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  • बरवाडीह के पातालकोहड टोला में दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीण।
  • आदिवासी परिवार वर्षों से स्वच्छ पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं।
  • प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने विभाग और मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की।
  • सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने एक माह में समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
  • ग्रामीणों ने कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं होने का आरोप लगाया।
  • जल संकट को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और विकास दावों पर उठे सवाल।

लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के सुदूरवर्ती क्षेत्र लात पंचायत अंतर्गत ग़ासेदाग गांव स्थित पातालकोहड टोला में स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या सामने आई है। यहां रहने वाले आदिवासी परिवार वर्षों से दूषित और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार प्रशासन और संबंधित विभाग को जानकारी देने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।

ग्रामीण क्षेत्रों में विकास और मूलभूत सुविधाओं को लेकर किए जाने वाले दावों के बीच यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी आवश्यकता से वंचित ग्रामीणों की स्थिति अब चिंता का विषय बन गई है।

दूषित पानी से बढ़ रही परेशानी

पातालकोहड टोला के ग्रामीणों के अनुसार, गांव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग मजबूरी में ऐसे जल स्रोतों पर निर्भर हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से सुरक्षित नहीं माने जाते।

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात और गर्मी के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है। दूषित पानी पीने के कारण बीमारियों का खतरा लगातार बना रहता है। महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।

विकास के दावों पर उठे सवाल

ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव के दौरान गांवों में विकास और मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग दिखाई देती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आज भी आदिवासी परिवारों को स्वच्छ पानी जैसी जरूरी सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है।

प्रमुख सुशीला देवी ने उठाया मामला

मामला सामने आने के बाद बरवाडीह प्रखंड प्रमुख सुशीला देवी ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी दी।

उन्होंने इस समस्या को गंभीर बताते हुए राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया। साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आग्रह किया कि संबंधित विभाग को आवश्यक निर्देश देकर जल्द समाधान सुनिश्चित कराया जाए।

प्रमुख ने कहा कि आदिवासी परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता और विभाग को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने दी चेतावनी

सांसद प्रतिनिधि दीपक राज ने भी इस मुद्दे को लेकर प्रशासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी हर नागरिक का अधिकार है और ग्रामीणों को इसके लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा:

“यदि एक माह के भीतर विभाग द्वारा वहां स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की गई, तो पीएचईडी कार्यालय का घेराव किया जाएगा।”

दीपक राज ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करने की मांग की।

स्थायी समाधान की मांग तेज

ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। वे गांव में स्थायी जलापूर्ति योजना, हैंडपंप या पाइपलाइन आधारित पेयजल व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि लंबे समय से समस्या बने रहने के कारण अब धैर्य टूटने लगा है और जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन तेज हो सकता है।

आदिवासी गांवों में बुनियादी सुविधाओं की चुनौती

यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि सुदूरवर्ती आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को भी सामने लाता है। कई गांव आज भी सड़क, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाओं से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन क्षेत्रों में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।

ग्रामीणों में बढ़ती चिंता

ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने से बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर लगातार खतरा बना हुआ है। कई परिवारों को दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी लाना पड़ता है।

महिलाओं ने कहा कि हर दिन पानी की व्यवस्था करना उनके लिए बड़ी चुनौती बन चुका है।

न्यूज़ देखो: विकास के दावों के बीच बुनियादी जरूरतों की अनदेखी

पातालकोहड टोला की स्थिति यह बताती है कि विकास के दावे तब अधूरे रह जाते हैं जब लोगों को स्वच्छ पानी जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाती। आदिवासी और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में योजनाओं की वास्तविक पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी है।
यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं हुआ तो यह केवल स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि सामाजिक असंतोष का कारण भी बन सकता है। अब जरूरत है कि विभाग और सरकार संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित और स्थायी समाधान सुनिश्चित करें। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

पानी का अधिकार और जागरूक समाज की जिम्मेदारी

स्वच्छ पानी केवल सुविधा नहीं बल्कि हर इंसान का बुनियादी अधिकार है। जब किसी गांव के लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हों, तो यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय होना चाहिए।
जरूरी है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर ऐसे क्षेत्रों की समस्याओं को प्राथमिकता दें और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
सजग रहें, अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और जरूरतमंद लोगों की आवाज को मजबूत करें। अपनी राय साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और स्वच्छ जल के अधिकार के लिए जनजागरण का हिस्सा बनें।

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बरवाडीह, लातेहार

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