#राउरकेला #रेलवे_लापरवाही : हटिया मेमू ट्रेन में यात्रियों की जगह बीड़ी पत्ता के बोरों की अवैध ढुलाई से यात्री परेशान।
राउरकेला से चलने वाली हटिया मेमू पैसेंजर ट्रेन इन दिनों बीड़ी पत्ता की अवैध ढुलाई का मुख्य जरिया बन चुकी है। ओड़िशा के बीसपुर से सिल्ली स्टेशन तक रोज भारी मात्रा में बोरों में भरकर बीड़ी पत्ता भेजा जा रहा है। इससे आम यात्रियों को बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है, जिससे रेलवे प्रशासन और आरपीएफ की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- हटिया मेमू पैसेंजर ट्रेन में यात्रियों की जगह बड़े पैमाने पर बीड़ी पत्ता की अवैध ढुलाई का मामला आया सामने।
- ओड़िशा के बीसपुर क्षेत्र से ट्रेन में इन बोरों को लादा जाता है और झारखण्ड के सिल्ली स्टेशन पर उतारा जाता है।
- बोगियों में भारी मात्रा में बोरे भरे होने के कारण आम यात्रियों को बैठने और आने-जाने में हो रही भारी परेशानी।
- स्थानीय लोगों ने रेलवे प्रशासन और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की कार्यप्रणाली और कथित मिलीभगत पर उठाए गंभीर सवाल।
- यात्रियों ने यात्री ट्रेनों के इस अवैध व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।
राउरकेला और हटिया के बीच चलने वाली मेमू पैसेंजर ट्रेन इन दिनों यात्रियों के बजाय माल ढुलाई का मुख्य केंद्र बनती जा रही है। इस यात्री ट्रेन के कई डिब्बों में रोजाना भारी मात्रा में बीड़ी पत्ता के बोरे भरकर अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा है। इस अव्यवस्था से रोजाना सफर करने वाले दैनिक यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों की इस परेशानी और रेलवे बोगियों के इस तरह व्यावसायिक इस्तेमाल ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की सतर्कता और स्थानीय रेल प्रशासन पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
बीसपुर से सिल्ली तक चल रहा अवैध परिवहन का खेल
हटिया मेमू पैसेंजर ट्रेन में बीड़ी पत्ता की इस अनियंत्रित ढुलाई के पीछे एक पूरा सिंडिकेट काम कर रहा है। जानकारी के अनुसार, ओड़िशा के बीसपुर क्षेत्र से भारी मात्रा में बीड़ी पत्ता के बोरों को इस पैसेंजर ट्रेन के विभिन्न डिब्बों में लादा जाता है। इसके बाद इन बोरों को झारखण्ड के सिल्ली स्टेशन पर सुरक्षित उतार लिया जाता है। सिल्ली स्टेशन से इस माल को आगे के विभिन्न स्थानीय बाजारों और बीड़ी निर्माण केंद्रों में सप्लाई किया जाता है। स्थानीय यात्रियों का कहना है कि यह कोई एक दिन की घटना नहीं है, बल्कि यह सिलसिला पिछले लंबे समय से रोजाना बेधड़क चल रहा है।
यात्रियों की बोगियां बनीं गोदाम, पैर रखने की जगह नहीं
इस पैसेंजर ट्रेन में सफर करने वाले आम यात्रियों को इस अवैध कारोबार के कारण सबसे ज्यादा प्रताड़ित होना पड़ रहा है। मेमू पैसेंजर ट्रेनों में पहले से ही आम यात्रियों, छोटे व्यापारियों और दैनिक कामगारों की भारी भीड़ होती है। ऐसे में इस अवैध व्यापार से जुड़े लोग बोगियों के भीतर, सीटों के नीचे, सीटों के ऊपर और आने-जाने वाले मुख्य रास्तों पर बीड़ी पत्ता के बड़े-बड़े बोरे ठूंस-ठूंस कर भर देते हैं। पूरी बोगियां माल गोदाम में तब्दील हो जाती हैं, जिससे यात्रियों के पैर रखने तक की जगह नहीं बचती। कई बार महिलाओं और बुजुर्गों को इस भारी भीड़ और बोरों के बीच खड़े होकर दमघोंटू माहौल में सफर करने को मजबूर होना पड़ता है।
रेलवे सुरक्षा बल की भूमिका और मिलीभगत की आशंका
इस पूरे मामले ने रेलवे के सुरक्षा तंत्र और स्थानीय रेल प्रशासन की कार्यशैली को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा कर दिया है। यात्रियों और स्थानीय लोगों का सीधे तौर पर आरोप है कि जिस स्टेशन से इतनी भारी मात्रा में माल ट्रेन पर चढ़ाया जाता है और जहां उतारा जाता है, वहां मौजूद रेलकर्मी और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के जवान मूकदर्शक बने रहते हैं। इतनी बड़ी तादाद में बोरों का आवागमन बिना किसी वैध बुकिंग, पार्सल रसीद या कमर्शियल पास के होना, रेलवे की सुरक्षा में एक बड़ी चूक है। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी बेहद तेज है कि यह पूरा अवैध खेल बिना स्थानीय रेल अधिकारियों की मिलीभगत और मोटी रकम के लेन-देन के संभव ही नहीं हो सकता। यात्रियों ने अब इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर इसमें संलिप्त रेल कर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

न्यूज़ देखो: यात्री ट्रेनों का मालगाड़ी में बदलना सुरक्षा और व्यवस्था पर बड़ा तमाचा
हटिया मेमू एक्सप्रेस में आम यात्रियों के हक की सीटों पर बीड़ी पत्ता के बोरों का कब्जा होना बेहद चिंताजनक और निंदनीय है। पैसेंजर ट्रेनें आम और गरीब जनता के सुलभ व सुरक्षित सफर के लिए होती हैं, न कि तस्करों के अवैध माल की बेधड़क ढुलाई के लिए। आरपीएफ और स्टेशन प्रबंधन की नाक के नीचे रोज ओड़िशा से झारखण्ड तक माल का यह अवैध परिवहन तंत्र की संलिप्तता की ओर साफ इशारा करता है। रेलवे प्रशासन को केवल कागजी दावों तक सीमित न रहकर इस सिंडिकेट को तुरंत ध्वस्त करना चाहिए ताकि यात्रियों का सफर आरामदायक हो सके।
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सजग यात्री ही बनेंगे सुरक्षित और बेहतर भारतीय रेलवे की असली ताकत
भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा है और इसकी संपत्तियों व व्यवस्थाओं पर पहला अधिकार देश के आम नागरिकों का है। जब हम अपनी आंखों के सामने अपनी ही सहूलियत के डिब्बों को माल गोदाम बनते देखते हैं और चुप रहते हैं, तो इससे अव्यवस्था फैलाने वाले तत्वों के हौसले और बुलंद होते हैं। एक जागरूक नागरिक और यात्री के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम ऐसी किसी भी अवैध गतिविधि को चुपचाप सहन न करें। जब भी ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा से खिलवाड़ हो, तो इसकी शिकायत तुरंत रेलवे के हेल्पलाइन नंबरों, रेल मदद ऐप या उच्च अधिकारियों से करें, ताकि भ्रष्ट कर्मियों और तस्करों पर नकेल कसी जा सके।
क्या आपके सफर के दौरान भी कभी यात्री ट्रेनों में इस तरह सामानों की अवैध और जबरन ढुलाई देखने को मिली है? इस अव्यवस्था और रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर आपकी क्या राय है, हमें नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताएं। इस महत्वपूर्ण खबर को अपने सभी रेल यात्रियों, मित्रों और राउरकेला व हटिया रूट के ग्रुप्स में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि यह आवाज रेल मंत्रालय और सीनियर अधिकारियों तक पहुंचे और मेमू ट्रेन का यह अवैध खेल हमेशा के लिए बंद हो सके।

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