#मेदिनीनगर #जल_संरक्षण : भूजल संकट को देखते हुए रेन वाटर हार्वेस्टिंग लागू करने की मांग उठी।
पलामू प्रमंडल में लगातार गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट को लेकर झारखंड प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य हृदयानंद मिश्र ने आयुक्त कुमुद सहाय को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने जल संरक्षण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की। ज्ञापन में शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर जल संकट के प्रभाव को गंभीर चिंता का विषय बताया गया। आयुक्त ने मामले में सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।
हृदयानंद मिश्र ने पलामू प्रमंडल की आयुक्त कुमुद सहाय को सौंपा ज्ञापन।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग को नगर निकायों और सरकारी संस्थानों में अनिवार्य करने की मांग।
पलामू प्रमंडल में लगातार गिरते भूजल स्तर और पेयजल संकट पर जताई चिंता।
विद्यालयों और अस्पतालों में जल संकट से शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं पर असर की बात कही गई।
पुराने तालाब, कुएं और पारंपरिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन पर जोर दिया गया।
आयुक्त कुमुद सहाय ने जल संरक्षण को लेकर प्रशासनिक पहल का आश्वासन दिया।
पलामू प्रमंडल में तेजी से गिरते भूजल स्तर और बढ़ते पेयजल संकट को लेकर सामाजिक एवं राजनीतिक स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी क्रम में झारखंड प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य एवं अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने पलामू प्रमंडल की आयुक्त कुमुद सहाय को ज्ञापन सौंपकर जल संरक्षण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जल संरक्षण की दिशा में गंभीर प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है।
ज्ञापन में जल संकट को केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया गया है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि वर्षा जल संचयन यानी रेन वाटर हार्वेस्टिंग को सभी स्तरों पर अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।
जल संकट का शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर
ज्ञापन में कहा गया कि पलामू प्रमंडल के विभिन्न जिलों में हर वर्ष गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराता जा रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से नीचे जा रहा है, जिससे आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि जल संकट का सबसे अधिक असर विद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों पर पड़ रहा है। कई स्कूलों में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वहीं अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में स्वच्छता प्रभावित होने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं।
हृदयानंद मिश्र ने कहा: “जल संरक्षण आज केवल पर्यावरण का विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य और जनजीवन से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।”
उन्होंने कहा कि स्वच्छ पानी की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है और इसका असर सीधे बच्चों और महिलाओं पर पड़ रहा है।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य करने की मांग
ज्ञापन में मांग की गई कि पलामू प्रमंडल के सभी नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था को अनिवार्य किया जाए। इसके तहत सरकारी भवनों, विद्यालयों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि बारिश के पानी का वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण करने से भूजल स्तर को सुधारने में काफी मदद मिल सकती है। साथ ही भविष्य में जल संकट की समस्या को भी काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
पुराने जलस्रोतों के संरक्षण पर भी जोर
हृदयानंद मिश्र ने प्रशासन से पुराने तालाबों, कुओं और पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की दिशा में भी विशेष अभियान चलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि कई जलस्रोत अतिक्रमण और उपेक्षा के कारण समाप्त होने की कगार पर हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जाए और लोगों को जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाया जाए।
नए भवन निर्माण में सख्ती की मांग
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि नए भवन निर्माण के दौरान वाटर कंजर्वेशन मानकों का पालन अनिवार्य किया जाए। बिना रेन वाटर हार्वेस्टिंग व्यवस्था वाले भवनों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि यदि अभी से सख्त नियम लागू नहीं किए गए तो भविष्य में शहरों और गांवों दोनों में जल संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
आयुक्त ने दिया सकारात्मक आश्वासन
पलामू प्रमंडल की आयुक्त कुमुद सहाय ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जल संरक्षण को लेकर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से आवश्यक कदम उठाएगा और संबंधित विभागों के साथ समन्वय कर जल संरक्षण योजनाओं को प्रभावी बनाया जाएगा।
आयुक्त कुमुद सहाय ने कहा: “जल संरक्षण की दिशा में प्रशासन गंभीरतापूर्वक आवश्यक कदम उठाएगा और जनहित से जुड़े मुद्दों पर प्राथमिकता से कार्य किया जाएगा।”
न्यूज़ देखो: जल संकट पर अब ठोस नीति की जरूरत
पलामू जैसे सूखाग्रस्त क्षेत्रों में जल संरक्षण अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है। भूजल स्तर में लगातार गिरावट आने वाले समय के लिए गंभीर चेतावनी है। हृदयानंद मिश्र द्वारा उठाया गया मुद्दा केवल राजनीतिक पहल नहीं बल्कि जनजीवन से जुड़ा बड़ा सवाल है। अब जरूरत इस बात की है कि प्रशासन आश्वासन से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जल बचाइए, भविष्य सुरक्षित बनाइए
पानी केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों की जीवनरेखा है। यदि आज जल संरक्षण को गंभीरता से नहीं लिया गया तो भविष्य में हर घर पानी के संकट से जूझेगा। अपने आसपास के जलस्रोतों को बचाने और वर्षा जल संचयन को अपनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। सरकार और प्रशासन के साथ समाज की भागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
आप अपने क्षेत्र में जल संरक्षण को लेकर क्या सोचते हैं? कमेंट कर अपनी राय जरूर दें, खबर को साझा करें और जल बचाने के इस अभियान को जनआंदोलन बनाएं।
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