#लातेहार #अवैध_कोयला : अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में कोयला भंडारण और ढुलाई से ग्रामीण चिंतित।
लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड अंतर्गत चकला पंचायत के अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार तेजी से बढ़ने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की जमीन पर खुलेआम कोयले का भंडारण और रात के अंधेरे में उसकी ढुलाई की जा रही है। लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और अवैध कारोबार पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
- अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में खुलेआम कोयला भंडारण का आरोप।
- ग्रामीणों ने रात में लगातार कोयला ढुलाई होने की बात कही।
- वन भूमि के अवैध उपयोग से पर्यावरण को नुकसान की आशंका।
- कार्रवाई नहीं होने से विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल।
- ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जांच की मांग की।
- रेंजर मेहता से संपर्क का प्रयास, जवाब नहीं मिला।
लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड स्थित चकला पंचायत के अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल की जमीन का इस्तेमाल खुलेआम अवैध कोयला भंडारण और परिवहन के लिए किया जा रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बाहरी इलाकों से कोयला लाकर वन क्षेत्र में जमा किया जाता है और रात के समय उसकी ढुलाई की जाती है। इससे न केवल जंगलों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल रहा है।
वन भूमि पर कोयला भंडारण का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में कई स्थानों पर कोयले का अवैध भंडारण किया जा रहा है। जंगल की जमीन का उपयोग कारोबार के लिए किए जाने से वन संपदा प्रभावित हो रही है।
लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में लगातार वाहनों के माध्यम से कोयले की ढुलाई की जाती है। इसके बावजूद संबंधित विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा: “जंगल क्षेत्र में खुलेआम अवैध कारोबार चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।”
पर्यावरण को नुकसान की आशंका
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि वन क्षेत्र में इस प्रकार की गतिविधियों से पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। जंगलों में लगातार हो रही हलचल और अवैध उपयोग से वन्यजीवों और प्राकृतिक संतुलन पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगाई गई तो वन क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो सकता है।
विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग के कर्मचारियों को पूरे मामले की जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और वन विभाग समय रहते सख्त कदम उठाए तो इस तरह की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जा सकती है।
रेंजर से संपर्क नहीं हो सका
मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए संवाददाता द्वारा संबंधित रेंजर मेहता से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिलने से लोगों के बीच कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
ग्रामीणों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन और वन विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों ने कहा कि अवैध कारोबार में शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
लोगों का कहना है कि जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा: “वन भूमि पर अवैध गतिविधियों को रोकना जरूरी है, अन्यथा इसका दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।”
क्षेत्र में बढ़ रही असामाजिक गतिविधियां
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कोयला कारोबार के कारण क्षेत्र में असामाजिक गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हो रही है। रात में संदिग्ध गतिविधियों और भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से नियमित निगरानी और विशेष अभियान चलाने की मांग की है, ताकि जंगल क्षेत्र में अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
न्यूज़ देखो: जंगल और पर्यावरण की सुरक्षा पर गंभीरता जरूरी
अम्बाटाड़ वन क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार के आरोप प्रशासन और वन विभाग दोनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। जंगल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर हैं। यदि वन भूमि का इस तरह अवैध उपयोग होता रहा तो इसका असर पर्यावरण, वन्यजीव और स्थानीय जीवन पर पड़ेगा। प्रशासन को चाहिए कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करे और वन क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जंगल बचेंगे तभी सुरक्षित रहेगा भविष्य
प्रकृति और जंगल हमारे जीवन का आधार हैं। पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है। अवैध गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाना और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
अपने आसपास हो रही गलत गतिविधियों की जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं और जागरूक नागरिक की भूमिका निभाएं। खबर को ज्यादा से ज्यादा साझा करें और पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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