पलामू टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ प्री मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स, वन्यजीवों की गतिविधियों पर विशेष नजर

पलामू टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ प्री मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स, वन्यजीवों की गतिविधियों पर विशेष नजर

author Akram Ansari
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#लातेहार #वन्यजीव_संरक्षण : पीटीआर में एक सप्ताह तक वन्यजीवों की गणना और गतिविधियों का होगा आकलन।

पलामू टाइगर रिजर्व में सोमवार से प्री-मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स की शुरुआत कर दी गई है। एक सप्ताह तक चलने वाले इस अभियान के दौरान जंगलों में वन्यजीवों की संख्या, गतिविधियों और पर्यावास का अध्ययन किया जाएगा। वन विभाग की टीम पगमार्क, मल और प्रत्यक्ष दृश्य के आधार पर जानवरों की उपस्थिति दर्ज कर रही है। इस अभियान से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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  • पलामू टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ प्री-मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स।
  • एक सप्ताह तक जंगलों में वन्यजीवों की गतिविधियों का होगा अध्ययन।
  • बाघ, हाथी, हिरण और तेंदुआ समेत कई वन्यजीवों पर रखी जा रही नजर।
  • वनकर्मी पगमार्क, मल और प्रत्यक्ष दृश्य के आधार पर जुटा रहे जानकारी।
  • अभियान में वन विभाग के अधिकारी, वनरक्षी और ट्रेकर गार्ड शामिल।
  • सेंसेक्स से वन्यजीव संरक्षण योजनाओं को मजबूत बनाने में मिलेगी मदद।

लातेहार जिले स्थित पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) में हर वर्ष की तरह इस बार भी प्री-मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स की शुरुआत सोमवार से कर दी गई। यह विशेष अभियान आगामी एक सप्ताह तक चलेगा, जिसके दौरान रिजर्व क्षेत्र के जंगलों में वन्यजीवों की स्थिति, संख्या, गतिविधियों और उनके प्राकृतिक आवास का विस्तृत आकलन किया जाएगा।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस सेंसेक्स का उद्देश्य जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति को समझना और संरक्षण योजनाओं को और प्रभावी बनाना है। अभियान के तहत विभिन्न बीट क्षेत्रों में वनकर्मियों की टीम लगातार निगरानी कर रही है।

मॉनसून से पहले कराया जाता है सेंसेक्स

बेतला वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश कुमार दुबे और छिपादोहर पश्चिमी वन क्षेत्र पदाधिकारी अजय टोप्पो ने बताया कि हर वर्ष मॉनसून आने से पहले यह वाइल्डलाइफ सेंसेक्स कराया जाता है। इसका मकसद जंगलों में मौजूद वन्यजीवों की गतिविधियों और उनकी संख्या का सही आकलन करना होता है।

वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश कुमार दुबे ने कहा: “प्री-मॉनसून सेंसेक्स से जंगलों में वन्यजीवों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाता है, जिससे संरक्षण योजनाएं तैयार करने में मदद मिलती है।”

उन्होंने बताया कि मॉनसून के दौरान जंगलों की परिस्थितियां बदल जाती हैं, इसलिए उससे पहले वन्यजीवों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

पगमार्क और मल के आधार पर जुटाई जा रही जानकारी

सेंसेक्स अभियान के दौरान वन विभाग की टीम जंगलों में जाकर जानवरों के पगमार्क, मल और प्रत्यक्ष दृश्य स्थलों को चिन्हित कर रही है। इन संकेतों के आधार पर वन्यजीवों की उपस्थिति और उनकी गतिविधियों का अध्ययन किया जा रहा है।

वनकर्मी विभिन्न बीट क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर डेटा एकत्रित कर रहे हैं। यह जानकारी भविष्य में वन्यजीव संरक्षण, जंगल प्रबंधन और सुरक्षा रणनीति बनाने में उपयोगी साबित होगी।

बाघ और हाथियों की गतिविधियों पर विशेष नजर

इस अभियान के दौरान विशेष रूप से बाघ, हाथी, हिरण, तेंदुआ समेत अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। पलामू टाइगर रिजर्व राज्य का महत्वपूर्ण वन्यजीव क्षेत्र माना जाता है, जहां कई दुर्लभ वन्यजीव पाए जाते हैं।

वन विभाग का मानना है कि नियमित सेंसेक्स से यह पता लगाने में आसानी होती है कि किन क्षेत्रों में वन्यजीवों की गतिविधियां अधिक हैं और किन क्षेत्रों में संरक्षण की अतिरिक्त आवश्यकता है।

वनकर्मी और ट्रेकर गार्ड कर रहे निगरानी

इस सेंसेक्स अभियान में वन विभाग के कई अधिकारी, वनपाल, वनरक्षी और ट्रेकर गार्ड सक्रिय रूप से शामिल हैं। बेतला क्षेत्र में वनपाल संतोष सिंह, नंदलाल साहू, वनरक्षी देवपाल भगत, धीरज कुमार, गुलशन सुरीन समेत कई वनकर्मी अभियान में लगे हुए हैं।

वहीं छिपादोहर पश्चिमी वन क्षेत्र में फोरेस्टर श्रवन कुमार, रजनीश कुमार, मुकेश मिंज और अविनाश एक्का सहित अन्य वनकर्मी जंगलों में लगातार निगरानी कर रहे हैं।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जंगलों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद टीम पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण अभियान

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के वाइल्डलाइफ सेंसेक्स वन्यजीव संरक्षण के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इससे जंगलों में जैव विविधता की स्थिति का आकलन किया जा सकता है और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाई जा सकती है।

सेंसेक्स के माध्यम से यह भी पता लगाया जाता है कि किसी विशेष वन्यजीव की संख्या बढ़ रही है या घट रही है। इसके आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार की जाती है।

पीटीआर की जैव विविधता बनी आकर्षण का केंद्र

पलामू टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और घने जंगलों के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। यहां बाघों के अलावा हाथी, तेंदुआ, हिरण, भालू और कई दुर्लभ पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।

वन विभाग का कहना है कि यदि जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा इसी तरह मजबूत की जाती रही तो आने वाले समय में पीटीआर पर्यटन और संरक्षण दोनों दृष्टि से और अधिक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

न्यूज़ देखो: जंगल और वन्यजीव संरक्षण के लिए जरूरी है वैज्ञानिक निगरानी

पलामू टाइगर रिजर्व में शुरू हुआ प्री-मॉनसून वाइल्डलाइफ सेंसेक्स यह दर्शाता है कि वन विभाग अब वैज्ञानिक पद्धति से वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। जंगलों की जैव विविधता केवल पर्यावरण संतुलन के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। नियमित निगरानी और संरक्षण योजनाएं ही बाघ, हाथी और अन्य वन्यजीवों के सुरक्षित अस्तित्व की गारंटी बन सकती हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

प्रकृति और वन्यजीवों की रक्षा में निभाएं अपनी भूमिका

जंगल और वन्यजीव हमारे प्राकृतिक जीवन चक्र का अहम हिस्सा हैं। यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे, तभी पर्यावरण संतुलित रहेगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ प्रकृति मिल सकेगी। वन्यजीवों की सुरक्षा केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर व्यक्ति का कर्तव्य है।

प्रकृति से प्रेम करें, जंगलों और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से दूर रहें और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक बनाएं। इस खबर को शेयर करें और वन्यजीव संरक्षण को लेकर अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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Written by

बरवाडीह, लातेहार

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