रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन रोकने पर भड़की झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन, सीसीएल में बड़े आंदोलन की चेतावनी

रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन रोकने पर भड़की झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन, सीसीएल में बड़े आंदोलन की चेतावनी

author Jitendra Giri
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#खलारी #मजदूर_आंदोलन : वेतन कटौती के विरोध में यूनियन ने आंदोलन की तैयारी तेज की।

खलारी में झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन ने सीसीएल कर्मियों के रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। यूनियन के एनके एरिया अध्यक्ष जगरनाथ महतो ने इसे मजदूर हितों के खिलाफ कदम बताते हुए राष्ट्रीय यूनियनों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते विरोध नहीं हुआ तो भविष्य में मासिक वेतन और अन्य सुविधाओं पर भी असर पड़ सकता है। यूनियन ने पूरे सीसीएल क्षेत्र में व्यापक आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी है।

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  • झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन ने रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन रोके जाने का विरोध किया।
  • एनके एरिया अध्यक्ष जगरनाथ महतो ने राष्ट्रीय यूनियन प्रतिनिधियों की भूमिका पर चिंता जताई।
  • यूनियन ने कहा कि यह कदम भविष्य में बड़े श्रमिक संकट का संकेत हो सकता है।
  • सीसीएल के सभी क्षेत्रों में आंदोलन की तैयारी शुरू करने की घोषणा।
  • भू-रैयतों और मजदूरों के हितों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई।
  • मजदूर विरोधी नीतियों पर रोक लगाने की मांग करते हुए संघर्ष का ऐलान।

खलारी स्थित कोयलांचल क्षेत्र में श्रमिक हितों से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा सामने आया है। झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन ने सीसीएल कर्मियों के रविवारीय और पेड हॉलिडे के वेतन भुगतान पर रोक लगाए जाने का विरोध करते हुए इसे मजदूर विरोधी कदम बताया है। यूनियन का कहना है कि इस प्रकार के निर्णयों का असर न केवल कर्मचारियों पर पड़ेगा, बल्कि इससे कोयला उद्योग और उससे जुड़े हजारों परिवारों का भविष्य भी प्रभावित हो सकता है।

यूनियन के एनके एरिया अध्यक्ष जगरनाथ महतो ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि यदि समय रहते इसका विरोध नहीं किया गया तो भविष्य में मजदूरों के अन्य अधिकारों पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

वेतन रोकने के फैसले पर यूनियन की नाराजगी

झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन के एनके एरिया अध्यक्ष जगरनाथ महतो ने कहा कि प्रबंधन द्वारा फंड की कमी का हवाला देकर रविवारीय और पेड हॉलिडे का वेतन रोकना चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में राष्ट्रीय स्तर की यूनियनों के कुछ प्रतिनिधियों की मौन सहमति भी दिखाई दे रही है, जो मजदूर हितों के लिए उचित नहीं है।

उनका कहना है कि श्रमिकों के अधिकारों से जुड़ा कोई भी निर्णय बिना व्यापक सहमति और चर्चा के नहीं लिया जाना चाहिए।

भविष्य में मासिक वेतन पर भी पड़ सकता है असर

जगरनाथ महतो ने आशंका जताई कि यदि इस निर्णय का पुरजोर विरोध नहीं हुआ तो आने वाले समय में केवल रविवारीय वेतन ही नहीं, बल्कि मासिक वेतन भुगतान पर भी असर पड़ सकता है।

जगरनाथ महतो ने कहा:

“जिस तरह से प्रबंधन फंड की कमी का रोना रोकर रविवारीय और पेड हॉलिडे का वेतन रोक रही है, यह केंद्र सरकार और कोल इंडिया प्रबंधन की परीक्षा है। यदि इसका विरोध नहीं हुआ तो भविष्य में मासिक वेतन पर भी रोक लगाई जा सकती है, जैसा कि कोल इंडिया की कुछ कंपनियों में देखने को मिल रहा है।”

उन्होंने कहा कि श्रमिकों को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने की आवश्यकता है और इस मुद्दे को केवल वेतन कटौती तक सीमित नहीं समझना चाहिए।

निजीकरण की आशंका भी जताई

यूनियन अध्यक्ष ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियां कोयला उद्योग के निजीकरण की दिशा में बढ़ते कदमों की ओर संकेत करती हैं। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि यदि सार्वजनिक क्षेत्र की खदानों को कमजोर किया गया तो भविष्य में उन्हें निजी हाथों में सौंपे जाने की संभावना बढ़ सकती है।

उनका कहना है कि इसका सबसे अधिक असर उन भू-रैयत परिवारों पर पड़ेगा जिन्होंने अपनी जमीन खनन परियोजनाओं के लिए दी है और जिनका जीवन-यापन आज कंपनी और उससे जुड़े रोजगार पर निर्भर है।

भू-रैयतों के हितों की भी उठाई आवाज

जगरनाथ महतो ने कहा कि खदान क्षेत्रों में रहने वाले अनेक भू-रैयत परिवार पहले ही अपनी जमीन खो चुके हैं। यदि मजदूरों की सुविधाओं और वेतन में कटौती होती है तो इसका सीधा प्रभाव इन परिवारों की आर्थिक स्थिति पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि रोजगार, वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसी सुविधाओं को कमजोर करने का प्रयास क्षेत्रीय विकास और सामाजिक संतुलन के लिए भी नुकसानदायक साबित होगा।

पूरे सीसीएल क्षेत्र में आंदोलन की तैयारी

झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन ने स्पष्ट किया है कि वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। यूनियन ने पूरे सीसीएल क्षेत्र में व्यापक जनसंपर्क और आंदोलन की तैयारी शुरू करने का निर्णय लिया है।

जगरनाथ महतो ने कहा:

“झारखंड कोलियरी मजदूर यूनियन मजदूरों और रैयतों के हित में तथा कंपनी को बचाने के लिए पूरे सीसीएल क्षेत्र में जोरदार आंदोलन करने की तैयारी कर रही है। हमारा उद्देश्य भारत सरकार और कोल इंडिया प्रबंधन को मजदूरों के आक्रोश से अवगत कराना है ताकि मजदूर विरोधी नीतियों पर रोक लग सके।”

उन्होंने कहा कि आंदोलन का स्वरूप जल्द तय किया जाएगा और इसमें मजदूरों, रैयतों तथा अन्य हितधारकों को भी शामिल किया जाएगा।

श्रमिक एकता पर दिया जोर

यूनियन ने श्रमिकों से एकजुट रहने की अपील की है। संगठन का मानना है कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा केवल सामूहिक संघर्ष और संगठनात्मक मजबूती से ही संभव है।

यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि यह समय अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने का है। यदि श्रमिक वर्ग बंटा रहा तो भविष्य में और भी कठिन निर्णय उन पर थोपे जा सकते हैं।

कोयलांचल क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मुद्दा

रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन भुगतान का मामला कोयलांचल क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। विभिन्न परियोजनाओं में कार्यरत कर्मचारी इस निर्णय को लेकर अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं।

श्रमिक संगठनों की आगामी रणनीति और प्रबंधन की प्रतिक्रिया पर अब सभी की नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सीसीएल क्षेत्र की औद्योगिक गतिविधियों और श्रमिक राजनीति पर प्रभाव डाल सकता है।

न्यूज़ देखो: वेतन और अधिकारों का सवाल केवल मजदूरों तक सीमित नहीं

रविवारीय और पेड हॉलिडे वेतन रोकने का मामला केवल कर्मचारियों के वेतन का प्रश्न नहीं है, बल्कि श्रमिक अधिकारों और औद्योगिक सुरक्षा से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। यदि श्रमिकों की आशंकाएं सही साबित होती हैं तो इसका असर हजारों परिवारों और पूरे कोयलांचल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। प्रबंधन और श्रमिक संगठनों के बीच संवाद और पारदर्शिता इस विवाद के समाधान की सबसे बड़ी आवश्यकता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

श्रमिक अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूकता जरूरी

उद्योगों की मजबूती और श्रमिकों का सम्मान एक-दूसरे के पूरक हैं। जब कर्मचारी सुरक्षित और संतुष्ट होते हैं, तभी उत्पादन और विकास की गति भी मजबूत होती है।

समय की मांग है कि सभी पक्ष संवाद, पारदर्शिता और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें। श्रमिक हितों और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।

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Written by

खलारी, रांची

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