सिमरिया में खरीफ फसल कार्यशाला आयोजित, किसानों को उन्नत खेती और कीट नियंत्रण की दी गई जानकारी

सिमरिया में खरीफ फसल कार्यशाला आयोजित, किसानों को उन्नत खेती और कीट नियंत्रण की दी गई जानकारी

author Binod Kumar
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#चतरा #खरीफ_कृषि : कार्यशाला में किसानों को उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती की सलाह दी गई।

चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड सभागार में खरीफ फसल को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में किसानों को उन्नत खेती, बेहतर बीज चयन और फसलों में लगने वाले कीटों से बचाव की जानकारी दी गई। जनप्रतिनिधियों और कृषि अधिकारियों ने किसानों से वैज्ञानिक तरीके अपनाकर उत्पादन बढ़ाने की अपील की।

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  • सिमरिया प्रखंड सभागार में खरीफ फसल कार्यशाला आयोजित हुई।
  • कार्यक्रम का उद्घाटन देवनन्दन साहू, रोहन साहू और चंद्रदेव प्रसाद ने किया।
  • किसानों को धान, मक्का, बाजरा और अरहर जैसी खरीफ फसलों की जानकारी दी गई।
  • कृषि विशेषज्ञों ने उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी।
  • फसलों में लगने वाले कीटों और उनके बचाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
  • कार्यशाला में सैकड़ों किसान, महिला समूह और कृषि मित्र शामिल हुए।

चतरा जिले के सिमरिया प्रखंड मुख्यालय स्थित सभागार कक्ष में खरीफ फसल को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक, उन्नत बीज और वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना था, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यशाला का उद्घाटन जिला परिषद सदस्य देवनन्दन साहू, प्रमुख रोहन साहू तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी चंद्रदेव प्रसाद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों, कृषि विशेषज्ञों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।

वर्षा पर निर्भर है खरीफ फसल

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अतिथियों ने कहा कि खरीफ फसल देश की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह मुख्य रूप से वर्षा पर निर्भर करती है। उन्होंने किसानों को समय पर खेती की तैयारी करने और उन्नत तकनीक अपनाने की सलाह दी।

जिप सदस्य देवनन्दन साहू ने कहा: “यदि समय पर अच्छी वर्षा होती है तो किसानों की मेहनत रंग लाती है, लेकिन मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए वैज्ञानिक खेती अपनाना जरूरी हो गया है।”

उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक कृषि पद्धति और उन्नत बीजों का उपयोग कर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

किसानों को दी गई उन्नत खेती की जानकारी

कार्यशाला में किसानों को खरीफ मौसम में बोई जाने वाली प्रमुख फसलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि धान, मक्का, बाजरा, बेदाम, अरहर और ज्वार जैसी फसलें खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें हैं, जिन्हें वर्षा ऋतु में बोया जाता है।

किसानों को बेहतर उत्पादन के लिए उन्नत किस्म के बीजों के उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही मिट्टी परीक्षण, उचित खाद प्रबंधन और समय पर सिंचाई जैसी बातों पर भी जोर दिया गया।

कीट नियंत्रण पर भी हुई चर्चा

कार्यशाला के दौरान फसलों में लगने वाले कीट और रोगों के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई। कृषि अधिकारियों ने किसानों को बताया कि समय पर पहचान और उचित दवा के इस्तेमाल से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।

पौधा संरक्षक उमाशंकर प्रसाद ने कहा: “फसल में कीट लगने की स्थिति में घबराने के बजाय वैज्ञानिक सलाह लेकर उचित उपचार करना चाहिए।”

उन्होंने किसानों को जैविक और संतुलित कीटनाशकों के प्रयोग की भी जानकारी दी ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बनी रहे।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने दिया मार्गदर्शन

कार्यक्रम में प्रखंड कृषि पदाधिकारी तथा पौधा संरक्षक उमाशंकर प्रसाद, कृषि निरीक्षक इम्तियाज, बीटीएम राजेश कुमार, एटीएम सुधीर कुमार, जेएसएलपीएस के महेश कुमार, एग्रीक्लीनिक के अश्वनी कुमार और अमन राज ने किसानों को कृषि संबंधी विभिन्न विषयों पर जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने किसानों को सरकारी कृषि योजनाओं, बीज वितरण और कृषि उपकरणों की जानकारी भी साझा की।

बड़ी संख्या में शामिल हुए किसान

कार्यशाला में प्रगतिशील कृषक एवं किसान मित्र बीरेन्द्र साहू, कलीम अंसारी, सहदेव यादव, द्वारिका यादव सहित सैकड़ों महिला एवं पुरुष किसान मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान किसानों ने कृषि विशेषज्ञों से अपनी समस्याओं से जुड़े सवाल भी पूछे, जिनका मौके पर समाधान बताया गया। किसानों ने इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बेहद उपयोगी बताया।

वैज्ञानिक खेती की ओर बढ़ रहा ग्रामीण क्षेत्र

सिमरिया में आयोजित यह कार्यशाला इस बात का संकेत है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों के किसान भी आधुनिक और वैज्ञानिक खेती की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कृषि विभाग द्वारा लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने से किसानों में नई तकनीकों के प्रति रुचि बढ़ी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को समय-समय पर प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन मिलता रहे तो कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों में सकारात्मक वृद्धि संभव है।

न्यूज़ देखो: वैज्ञानिक खेती ही किसानों की मजबूती का रास्ता

बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के बीच किसानों को अब पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाना जरूरी हो गया है। सिमरिया में आयोजित यह कार्यशाला किसानों को जागरूक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यदि कृषि विभाग इसी तरह गांव-गांव तक प्रशिक्षण पहुंचाता रहा तो खेती को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मेहनत के साथ तकनीक जोड़ें, खेती को बनाएं और मजबूत

किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनकी सफलता ही गांवों की समृद्धि तय करती है।
समय के साथ नई तकनीक और वैज्ञानिक सोच अपनाकर खेती को और बेहतर बनाया जा सकता है।
उन्नत बीज, सही सलाह और जागरूकता किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
आइए, खेती को आधुनिक बनाकर गांव और किसान दोनों को मजबूत करें।

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Written by

लावालोंग, चतरा

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