#पिपरवार #मुहर्रम_मेला : पारंपरिक आयोजन को भव्य और शांतिपूर्ण बनाने की तैयारी।
पिपरवार कोयलांचल क्षेत्र के बहेरा स्थित कर्बला मैदान में ग्रामीणों की बैठक आयोजित कर 28 जून को मुहर्रम मेला सह लाठी खेल प्रतियोगिता आयोजित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में पर्व को पारंपरिक, शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से मनाने पर सहमति बनी। आयोजन की सफलता के लिए एक समिति का गठन किया गया, जिसमें विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां सौंपी गईं। ग्रामीणों ने सौहार्द और सहयोग के साथ कार्यक्रम को सफल बनाने का संकल्प लिया।
- बहेरा कर्बला मैदान में ग्रामीणों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई।
- 28 जून को मुहर्रम मेला सह लाठी खेल प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया गया।
- आयोजन को सफल बनाने के लिए सर्वसम्मति से समिति का गठन किया गया।
- मो. कासिम उर्फ मुन्ना को आयोजन समिति का अध्यक्ष चुना गया।
- मुहर्रम पर्व को शांतिपूर्ण एवं पारंपरिक तरीके से मनाने पर जोर दिया गया।
- ग्रामीणों ने सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजन संपन्न कराने का संकल्प लिया।
पिपरवार कोयलांचल क्षेत्र के बहेरा गांव में आगामी मुहर्रम पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में बहेरा स्थित कर्बला मैदान में ग्रामीणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुहर्रम मेला सह लाठी खेल प्रतियोगिता के आयोजन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और समाज के गणमान्य लोगों ने भाग लिया तथा आयोजन को भव्य और सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लिए गए।
बैठक की अध्यक्षता पूर्व मुखिया हाजी आशिक अली उर्फ बाढ़ो मियां ने की, जबकि संचालन हाजी कमालुद्दीन ने किया। बैठक में मुख्य अतिथि के रूप में चतरा जिला कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष सह आरसीएमयू के पिपरवार क्षेत्रीय अध्यक्ष मो. कासिम उर्फ मुन्ना उपस्थित रहे।
मुहर्रम पर्व को लेकर उपस्थित लोगों ने कहा कि यह केवल धार्मिक आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, भाईचारे और पारंपरिक संस्कृति का भी प्रतीक है। इसलिए इसे पूरी गरिमा, अनुशासन और सौहार्द के साथ मनाया जाना चाहिए।
28 जून को होगा मुहर्रम मेला सह लाठी खेल प्रतियोगिता
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 28 जून 2026 को बहेरा विस्थापित मैदान में मुहर्रम मेला सह लाठी खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों की टीमों द्वारा पारंपरिक लाठी खेल का प्रदर्शन किया जाएगा, जो वर्षों से इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा कि प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को अपनी पारंपरिक कला और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही क्षेत्र के लोगों को आपसी मेल-जोल और भाईचारे को मजबूत करने का भी अवसर प्राप्त होगा।
आयोजन समिति का किया गया गठन
कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए बैठक में एक आयोजन समिति का गठन किया गया। समिति के विभिन्न पदों पर जिम्मेदार व्यक्तियों को जिम्मेदारी सौंपी गई।
संरक्षक मंडल
- हाजी आशिक अली उर्फ बाढ़ो मियां
- हाजी कमालुद्दीन
- अब्दुल अंसारी
- क्युम अंसारी
- हाजी इस्लाम अंसारी
- आशिक अली
मुख्य पदाधिकारी
- अध्यक्ष – मो. कासिम उर्फ मुन्ना
- उपाध्यक्ष – इदरीस अंसारी, हाजी मो. ताज, फहीम रजा
- सचिव – सलीम जावेद
- उप सचिव – शकील अंसारी, मोहम्मद अनवर, मोहम्मद खुर्शीद
- कोषाध्यक्ष – मोहम्मद गुड्डे, मोहम्मद नौशाद, मोहम्मद साजिद
इसके अतिरिक्त कई अन्य लोगों को कार्यकारिणी समिति में शामिल कर विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गईं।
पारंपरिक आयोजन को भव्य बनाने पर जोर
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि मुहर्रम मेला और लाठी खेल प्रतियोगिता क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसकी गरिमा और परंपरा को बनाए रखते हुए आयोजन को सफल बनाया जाएगा।
हाजी आशिक अली उर्फ बाढ़ो मियां ने कहा: “मुहर्रम का पर्व आपसी भाईचारे, अनुशासन और सामाजिक एकता का संदेश देता है। हम सभी की जिम्मेदारी है कि इस आयोजन को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराएं।”
बैठक में उपस्थित लोगों ने भी आयोजन को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
बैठक में हाजी कमालुद्दीन, अब्दुल अंसारी, फहीम रजा, मोहम्मद जुल्फान, मोहम्मद अनवर, मोहम्मद मुश्ताक, मोहम्मद सरफराज, फैय्याज खान, जाहिद अली, मतीउल अंसारी, मोहम्मद नासिर, आजाद, जावेद, कैफ, आसिफ रजा, राजा खान, मिनहाज आलम सहित दर्जनों ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित लोगों ने आयोजन को सफल बनाने के लिए आवश्यक सहयोग देने और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने का संकल्प लिया।
भाईचारे और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है मुहर्रम
बैठक में यह भी कहा गया कि मुहर्रम का पर्व समाज को त्याग, बलिदान, अनुशासन और इंसानियत का संदेश देता है। लाठी खेल जैसी पारंपरिक प्रतियोगिताएं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का माध्यम बनती हैं।
ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि आयोजन के दौरान सुरक्षा, अनुशासन और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा ताकि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो सके।
न्यूज़ देखो: सामाजिक सौहार्द और परंपरा को सहेजने की पहल
बहेरा में मुहर्रम मेला और लाठी खेल प्रतियोगिता को लेकर हुई बैठक यह दर्शाती है कि ग्रामीण समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार प्रयासरत है। ऐसे आयोजन केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी को परंपराओं से परिचित कराने का भी माध्यम बनते हैं। आयोजन समिति के गठन के साथ तैयारियों को गति मिली है और अब सभी की नजरें 28 जून को होने वाले इस आयोजन पर टिकी हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
परंपरा और भाईचारे को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएं
सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे अवसर हमें अपनी विरासत, संस्कृति और सामूहिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
आइए, हम सभी मिलकर शांति, सौहार्द और भाईचारे के संदेश को मजबूत करें। अपने क्षेत्र की सकारात्मक गतिविधियों में भागीदारी निभाएं और समाज को जोड़ने वाले प्रयासों का समर्थन करें।
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