#रांची #दहेज_उन्मूलन : सामाजिक जागरूकता बढ़ाने पर राज्यपाल से हुई चर्चा।
दहेज मुक्त झारखंड संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष सिंधु मिश्रा ने रांची में झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात की। इस दौरान संस्था की गतिविधियों, दहेज उन्मूलन अभियान और सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों पर विस्तृत चर्चा हुई। सिंधु मिश्रा ने युवाओं को दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि राज्यपाल ने संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए सहयोग का आश्वासन दिया।
- सिंधु मिश्रा ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से शिष्टाचार मुलाकात की।
- दहेज प्रथा के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों की जानकारी दी गई।
- युवाओं को दहेज लेने और देने का विरोध करने का संदेश दिया गया।
- महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
- राज्यपाल ने संस्था के प्रयासों को सराहनीय बताते हुए शुभकामनाएं दीं।
- दहेज मुक्त समाज के निर्माण के लिए जनभागीदारी पर जोर दिया गया।
रांची में दहेज मुक्त झारखंड संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सिंधु मिश्रा ने झारखंड के महामहिम राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से मुलाकात कर समाज में व्याप्त दहेज प्रथा के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की जानकारी साझा की। इस मुलाकात में संस्था के सामाजिक उद्देश्यों, भविष्य की योजनाओं और दहेज उन्मूलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा हुई।
संस्था की ओर से यह बताया गया कि दहेज प्रथा आज भी समाज के कई हिस्सों में एक गंभीर सामाजिक समस्या बनी हुई है, जिसका सबसे अधिक प्रभाव महिलाओं और उनके परिवारों पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए संस्था लगातार जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन कर रही है।
राज्यपाल से शिष्टाचार मुलाकात
राजभवन में आयोजित इस मुलाकात के दौरान सिंधु मिश्रा ने दहेज मुक्त झारखंड संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संस्था केवल दहेज प्रथा के खिलाफ आवाज उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में महिला सम्मान, समानता और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए भी निरंतर प्रयास कर रही है।
उन्होंने राज्यपाल को संस्था के विभिन्न अभियानों, जनसंवाद कार्यक्रमों और सामाजिक जागरूकता गतिविधियों से अवगत कराया। साथ ही आने वाले समय में व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की योजना भी साझा की।
दहेज प्रथा आज भी बड़ी सामाजिक चुनौती
मुलाकात के दौरान सिंधु मिश्रा ने कहा कि दहेज प्रथा समाज के लिए एक गंभीर अभिशाप है। इसके कारण अनेक परिवार आर्थिक, मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करते हैं।
सिंधु मिश्रा ने कहा: “दहेज प्रथा आज भी समाज के लिए एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। जब दहेज की मांग और उससे जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं, तब कई परिवारों, विशेषकर बहनों और बेटियों को मानसिक एवं सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि कई मामलों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि पीड़ित परिवारों को न्याय और सहायता के लिए विभिन्न संस्थाओं तथा प्रशासन का सहारा लेना पड़ता है।
युवाओं को जागरूक करना समय की आवश्यकता
सिंधु मिश्रा ने कहा कि दहेज प्रथा को समाप्त करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका युवाओं की हो सकती है। यदि युवा स्वयं दहेज लेने और देने से इनकार कर दें, तो समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान पीढ़ी सामाजिक परिवर्तन की वाहक है और यदि युवा वर्ग दहेज जैसी कुप्रथा के विरुद्ध एकजुट होकर अभियान चलाए, तो आने वाले वर्षों में इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
सिंधु मिश्रा ने कहा: “यदि आज के युवा दृढ़ संकल्प के साथ दहेज लेने और देने का विरोध करें तथा अपने परिवार और समाज को इसके दुष्परिणामों से अवगत कराएं, तो इस सामाजिक बुराई को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है।”
महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता पर चर्चा
बैठक के दौरान महिला सम्मान, सामाजिक समानता और परिवारिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर भी चर्चा हुई। संस्था की ओर से यह बताया गया कि दहेज उन्मूलन केवल एक सामाजिक आंदोलन नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है।
संस्था लगातार ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को दहेज मुक्त विवाह के लिए प्रेरित कर रही है। इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
राज्यपाल ने की संस्था के प्रयासों की सराहना
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने संस्था की सोच और सामाजिक सरोकारों की प्रशंसा करते हुए कहा कि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ समाज में व्यापक जागरूकता फैलाने की आवश्यकता है।
उन्होंने संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयासों को सराहनीय बताया और कहा कि सामाजिक बदलाव केवल कानून से नहीं बल्कि जनजागरण और सामूहिक प्रयासों से संभव है।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा: “दहेज जैसी कुप्रथा के विरुद्ध समाज में जागरूकता फैलाना समय की आवश्यकता है।”
राज्यपाल ने संस्था को अपनी शुभकामनाएं देते हुए भविष्य में सहयोग और मार्गदर्शन का आश्वासन भी दिया।
सामाजिक परिवर्तन की दिशा में निरंतर प्रयास
दहेज मुक्त झारखंड संस्था का मानना है कि सामाजिक बुराइयों के खिलाफ निरंतर संवाद और जागरूकता ही स्थायी समाधान का मार्ग है। संस्था समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़कर दहेज मुक्त विवाह और महिला सम्मान के प्रति सकारात्मक वातावरण बनाने की दिशा में कार्य कर रही है।
मुलाकात के अंत में संस्था की ओर से राज्यपाल का आभार व्यक्त किया गया और भविष्य में भी सामाजिक सुधार के मुद्दों पर मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
न्यूज़ देखो: दहेज के खिलाफ सामाजिक आंदोलन की जरूरत
दहेज प्रथा केवल एक कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक समस्या भी है। इसे समाप्त करने के लिए परिवारों, युवाओं, सामाजिक संगठनों और प्रशासन को मिलकर काम करना होगा। सिंधु मिश्रा और उनकी संस्था का प्रयास इस दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा सकता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि समाज का हर वर्ग दहेज के खिलाफ खुलकर आवाज उठाए और दहेज मुक्त विवाह को सामाजिक सम्मान का विषय बनाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बदलाव की शुरुआत अपने घर और परिवार से करें
समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब हम स्वयं उससे जुड़ें। दहेज जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और व्यक्तिगत संकल्प भी जरूरी है।
युवाओं को आगे बढ़कर यह संकल्प लेना चाहिए कि वे दहेज न लेंगे और न ही देंगे। परिवारों को भी बेटियों और बहुओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।
यदि आप भी दहेज मुक्त समाज का समर्थन करते हैं, तो इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं। अपनी राय कमेंट में साझा करें, खबर को शेयर करें और सामाजिक बदलाव की इस मुहिम का हिस्सा बनें।

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