नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना रद्द — संकल्प सभा में गूंजे जल-जंगल-जमीन बचाने के नारे

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना रद्द — संकल्प सभा में गूंजे जल-जंगल-जमीन बचाने के नारे

author News देखो Team
26 Views

हाइलाइट्स :

  • नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना पर रोक के फैसले पर जनजातीय समुदाय में खुशी
  • केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति के तत्वावधान में संकल्प सभा का आयोजन
  • अहिंसात्मक सत्याग्रह आंदोलन की याद में लिया गया संकल्प
  • जेरोम जेराल्ड कुजूर, अभय मिंज, अजीत पाल कुजुर, अनिल मनोहर ने किया संचालन
  • आदिवासी संस्कृति कार्यक्रमों की भी रही प्रस्तुति

नेतरहाट आंदोलन की ऐतिहासिक याद में संकल्प सभा

महुआडांड़ में केन्द्रीय जनसंघर्ष समिति, लातेहार और गुमला के तत्वावधान में नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना रद्द करने पर रविवार को संकल्प सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का संचालन जेरोम जेराल्ड कुजूर, महुआडांड़ उपप्रमुख अभय मिंज, आदिवासी कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजीत पाल कुजुर और अनिल मनोहर ने किया।

जल-जंगल-जमीन के लिए संकल्प

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने ‘जान नहीं देंगे, जल-जंगल-जमीन हमारा है’ जैसे जोशीले नारों के साथ आदिवासी एकता और अधिकारों पर चर्चा की। जेरोम जेराल्ड ने बताया कि:

“23 मार्च 1994 को हमारे माता-पिता और भाई-बहनों ने सेना की गाड़ियों के सामने खड़े होकर अपने जल-जंगल-जमीन और अस्तित्व की रक्षा के लिए अहिंसात्मक आंदोलन किया और सेना को बिना फायरिंग अभ्यास के लौटने पर मजबूर किया था।”

महिलाओं और युवाओं का योगदान

सभा में बहन फिलो ने नेतरहाट आंदोलन में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला, वहीं कोरेनियुल ने युवाओं के योगदान को रेखांकित किया। वक्ताओं ने ग्राम सभा के महत्व पर भी चर्चा की।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और वार्षिक रिपोर्ट

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए संस्थाओं और ग्राम समूहों द्वारा आदिवासी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। जेरोम जेराल्ड ने स्वागत भाषण एवं वार्षिक रिपोर्ट भी सभी के समक्ष प्रस्तुत की।

सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद

आयोजन के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए गुमला जिले के सर्किल इंस्पेक्टर, गुददरी थाना प्रभारी सहित जिला पुलिस बल की तैनाती रही।

‘न्यूज़ देखो’ की नजर — जनआंदोलन की ताकत और आदिवासी हक की जीत

नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज अधिसूचना पर रोक, न केवल एक सरकारी निर्णय है, बल्कि जनसंगठनों और आदिवासी समुदाय की संघर्ष और एकता की जीत है। सवाल यह है कि क्या सरकार आगे भी इसी तरह जनभावनाओं का सम्मान करती रहेगी? ‘न्यूज़ देखो’ आपकी आवाज़ को लगातार उठाता रहेगा और हर पहलू पर नजर रखेगा।

यह खबर आपके लिए कितनी महत्वपूर्ण थी?

रेटिंग देने के लिए किसी एक स्टार पर क्लिक करें!

इस खबर की औसत रेटिंग: 0 / 5. कुल वोट: 0

अभी तक कोई वोट नहीं! इस खबर को रेट करने वाले पहले व्यक्ति बनें।

चूंकि आपने इस खबर को उपयोगी पाया...

हमें सोशल मीडिया पर फॉलो करें!

🔔

Notification Preferences

error: