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फाइलेरिया उन्मूलन के लिए जारी में नाइट ब्लड सर्वे का आयोजन, 300 रक्त पटों का संग्रह

#गुमला #स्वास्थ्य_अभियान : डुमरी सीएचसी क्षेत्र में फाइलेरिया उन्मूलन के तहत कटिंबा और बंझर गांवों में रात्रिकालीन रक्त संग्रह अभियान सफलतापूर्वक संपन्न
  • गुमला जिले के डुमरी सीएचसी क्षेत्र में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत नाइट ब्लड सर्वे का आयोजन किया गया।
  • कटिंबा और बंझर ग्रामों में कुल 300 रक्त पटों का संग्रह किया गया।
  • मेराल पंचायत की मुखिया चाजरेन कुजूर ने अभियान का उद्घाटन किया।
  • पिरामल फाउंडेशन टीम ने जनजागरूकता और व्यवहार परिवर्तन अभियान चलाया।
  • स्वास्थ्य विभाग, सहिया और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के सहयोग से कार्यक्रम सफल हुआ।

जारी (गुमला)। फाइलेरिया जैसी गंभीर बीमारी के उन्मूलन की दिशा में गुमला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सीएचसी डुमरी क्षेत्र के सिकरी पंचायत के कटिंबा ग्राम और मेराल पंचायत के बंझर ग्राम में 3 नवम्बर की रात को नाइट ब्लड सर्वे का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

जनजागरूकता से जुड़ा स्वास्थ्य अभियान

कार्यक्रम का उद्घाटन मेराल पंचायत की मुखिया चाजरेन कुजूर के द्वारा किया गया। इस मौके पर उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे फाइलेरिया रोग के प्रति सतर्क रहें और जांच व उपचार से संबंधित गतिविधियों में भाग लें। सर्वे की शुरुआत से पहले पिरामल फाउंडेशन की टीम ने गांव में घूम-घूमकर सघन जनजागरूकता अभियान चलाया।

टीम ने रात्रि चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों को फाइलेरिया के लक्षण, संक्रमण के स्रोत और रोकथाम के उपायों के बारे में जानकारी दी। इसके अलावा स्थानीय सहियाओं के सहयोग से आईईसी सामग्री, प्रोजेक्टर सत्र और संवादात्मक गतिविधियों के माध्यम से लोगों को इस बीमारी से बचाव के तरीकों के प्रति संवेदनशील किया गया।

पिरामल फाउंडेशन टीम के सदस्य ने कहा: “रात्रिकालीन रक्त संग्रह फाइलेरिया संक्रमण की सटीक पहचान के लिए आवश्यक है, क्योंकि इस समय परजीवी रक्त में सक्रिय रहते हैं।”

300 रक्त पटों का सफल संग्रह

अभियान के दौरान कुल 300 रक्त पटों का संग्रह किया गया। ग्रामीणों ने भी सक्रिय भागीदारी दिखाते हुए रक्त जांच में सहयोग किया। फाइलेरिया संक्रमण की पहचान के लिए यह नाइट ब्लड सर्वे अत्यंत आवश्यक माना जाता है, क्योंकि इस प्रक्रिया से संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान संभव हो जाती है।

इस अभियान में एएनएम ओडिल सेलीना टोप्पो, सीएचओ रीना टिर्की, सीएचओ नीलम जॉन खलखो (सीएचओ श्रीनगर, पंचायत करमटोली), एल.टी. नरेंद्र कुमार एवं एमटीएस ओम प्रकाश मिस्त्री की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

सहयोग से मिली सफलता

यह रात्रिकालीन सर्वे स्वास्थ्य विभाग डुमरी सीएचसी, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सहिया नेटवर्क एवं पिरामल फाउंडेशन गुमला टीम के संयुक्त प्रयास से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सभी टीमों के सामूहिक सहयोग से यह अभियान गुमला जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम सिद्ध हुआ।

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न्यूज़ देखो: जनजागरूकता और सामूहिक प्रयास से ही संभव है उन्मूलन

गुमला जिले में नाइट ब्लड सर्वे की यह पहल दर्शाती है कि जब प्रशासन, स्वास्थ्य कर्मी और जनता एकजुट होते हैं, तो स्वास्थ्य अभियानों में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। फाइलेरिया जैसी उपेक्षित बीमारी को जड़ से मिटाने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहना आवश्यक है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

स्वस्थ समाज, जागरूक नागरिक

फाइलेरिया जैसी बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है — जागरूकता, सतर्कता और समय पर जांच। अब समय है कि हर नागरिक स्वास्थ्य अभियानों में सक्रिय सहयोग दे और अपने समुदाय को रोगमुक्त बनाने की दिशा में योगदान करे।
अपनी राय कमेंट करें, खबर को शेयर करें और इस जागरूकता संदेश को अपने गांव और मोहल्ले तक पहुंचाएं।

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Shahjeb Ansari

जारी, गुमला

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