सबजी खेती और मनरेगा कार्य से आत्मनिर्भर बनी फिलोमिना टोप्पो, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

सबजी खेती और मनरेगा कार्य से आत्मनिर्भर बनी फिलोमिना टोप्पो, ग्रामीण महिलाओं के लिए बनी प्रेरणा

author News देखो Team
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#महुआडांड #महिलासशक्तिकरण #खेती_संघर्ष : चैनपुर पंचायत की फिलोमिना टोप्पो ने खेती से आत्मनिर्भरता हासिल की।

लातेहार जिले के महुआडांड प्रखंड अंतर्गत चैनपुर पंचायत के अहिरपुरवा गांव की फिलोमिना टोप्पो ने सीमित संसाधनों के बीच सब्जी खेती और मनरेगा कार्य से अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। पति और तीन बेटियों के साथ साधारण जीवन जीते हुए उन्होंने मेहनत और प्रशिक्षण के बल पर नई पहचान बनाई। मनरेगा महिला मेट के रूप में चयन के बाद उन्होंने कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई और खेती को आय का प्रमुख साधन बनाया। उनकी यह सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

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  • फिलोमिना टोप्पो, अहिरपुरवा गांव, चैनपुर पंचायत, महुआडांड की निवासी।
  • मनरेगा महिला मेट के रूप में चयन के बाद मिली नई दिशा।
  • लीड्स संस्था के प्रशिक्षण से बढ़ा आत्मविश्वास और कार्य क्षमता।
  • खेतों में कद्दू, करेला, भिंडी, नेनुआ, खीरा की खेती से आय शुरू।
  • प्रतिदिन लगभग 1000–1200 रुपये की आमदनी कर रही हैं।
  • बेटी की शिक्षा एवं परिवार के खर्च में खेती से मिल रही मदद।

महुआडांड की फिलोमिना टोप्पो की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन और मेहनत से ग्रामीण जीवन में भी बड़ा बदलाव संभव है। मनरेगा योजना के तहत मिली भूमिका और प्रशिक्षण ने उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया। पहले जहां आर्थिक तंगी जीवन की चुनौती थी, वहीं अब खेती उनके जीवन का आधार बन चुकी है।

मनरेगा और प्रशिक्षण से मिली नई पहचान

फिलोमिना टोप्पो का चयन ग्रामसभा के माध्यम से मनरेगा महिला मेट के रूप में हुआ, जिसके बाद उन्होंने नहर जीर्णोद्धार कार्य में भी सक्रिय भूमिका निभाई। लीड्स संस्था द्वारा दिए गए प्रशिक्षण ने उन्हें न केवल तकनीकी जानकारी दी, बल्कि नेतृत्व क्षमता भी विकसित की।

सब्जी खेती से बदली आर्थिक स्थिति

फिलोमिना ने अपने खेत में विविध प्रकार की सब्जियों की खेती शुरू की। इसमें कद्दू, करेला, भिंडी, नेनुआ और खीरे जैसी फसलें शामिल हैं। वे प्रतिदिन सुबह से ही खेतों की देखभाल और फिर बाजार में बिक्री का कार्य करती हैं।

इस मेहनत का परिणाम यह है कि उन्हें रोजाना लगभग 1000 से 1200 रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है।

परिवार का सहयोग और भविष्य की योजना

फिलोमिना के पति विमल मिंज उनके कार्यों में पूरा सहयोग करते हैं। अब वे दोनों मिलकर बागवानी को और बड़े स्तर पर ले जाने की योजना बना रहे हैं।

फिलोमिना का कहना है कि मेहनत और सही अवसर मिलने पर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। उनकी कहानी ग्रामीण क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण

फिलोमिना टोप्पो की यह सफलता ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की वास्तविक तस्वीर पेश करती है। मनरेगा और प्रशिक्षण कार्यक्रमों का सही उपयोग कैसे जीवन बदल सकता है, यह इस कहानी से स्पष्ट होता है।
हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या ऐसे मॉडल हर गांव तक समान रूप से पहुंच पा रहे हैं या नहीं। अगर ऐसे प्रयास और मजबूत हों तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल सकती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मेहनत और आत्मनिर्भरता से बदलता भविष्य

हर व्यक्ति के जीवन में बदलाव का पहला कदम मेहनत और विश्वास होता है।
फिलोमिना की कहानी हमें यह सिखाती है कि सीमित संसाधन भी सफलता में बाधा नहीं बन सकते।
जरूरत है तो केवल सही दिशा, प्रशिक्षण और निरंतर प्रयास की।
आइए, ऐसी कहानियों से प्रेरणा लें और अपने आसपास भी आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दें।

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