#चंदवा #लातेहार #विराटहिंदूसम्मेलन : अक्षत-कलश के माध्यम से घर-घर पहुंचाया जा रहा सम्मेलन का निमंत्रण।
लातेहार जिले के चंदवा प्रखंड में 15 मार्च को प्रस्तावित विराट हिंदू सम्मेलन की तैयारियां तेज हो गई हैं। 22 फरवरी को बुध बाजार दुर्गा मंडल परिसर में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर सभी गांवों के लिए अक्षत-कलश प्रेषित किए गए। इसके साथ ही घर-घर निमंत्रण देने के लिए जनसंपर्क अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। यह सम्मेलन धार्मिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक सहभागिता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- 15 मार्च को चंदवा में आयोजित होगा विराट हिंदू सम्मेलन।
- बुध बाजार दुर्गा मंडल परिसर से अक्षत-कलश प्रेषण कार्यक्रम सम्पन्न।
- अध्यक्षता रमेश प्रसाद साहू ने की, वैदिक पूजन पुजारी गोपाल मिश्रा द्वारा।
- गांव-गांव जाकर घर-घर निमंत्रण देने के लिए जनसंपर्क अभियान शुरू।
- कार्यक्रम में कलश यात्रा, 51 कुंडीय हवन, हनुमान चालीसा पाठ सहित कई अनुष्ठान होंगे।
चंदवा प्रखंड में आगामी 15 मार्च को प्रस्तावित विराट हिंदू सम्मेलन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। रविवार, 22 फरवरी को बुध बाजार स्थित दुर्गा मंडल परिसर में एक विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें प्रखंड के विभिन्न गांवों के लिए अक्षत-कलश प्रेषित कर जनसंपर्क अभियान की औपचारिक शुरुआत की गई। इस आयोजन का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को सम्मेलन से जोड़ना और घर-घर निमंत्रण पहुंचाना बताया गया।
अक्षत-कलश प्रेषण से जनसंपर्क अभियान की शुरुआत
बुध बाजार दुर्गा मंडल परिसर में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश प्रसाद साहू ने की। कार्यक्रम में वैदिक परंपरा के अनुसार विधिवत पूजा-अर्चना कर अक्षत-कलश तैयार किए गए, जिन्हें प्रखंड के विभिन्न गांवों से आए कार्यकर्ताओं को सौंपा गया।
शिव मंदिर के पुजारी गोपाल मिश्रा ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलशों का पूजन कराया, जिसके बाद धार्मिक वातावरण के बीच कार्यकर्ताओं को अक्षत-कलश प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सम्मेलन को सफल बनाने का संकल्प भी लिया।
गोपाल मिश्रा ने कहा: “अक्षत-कलश के माध्यम से घर-घर आमंत्रण देना भारतीय परंपरा का प्रतीक है, इससे लोगों में धार्मिक आस्था और सहभागिता की भावना बढ़ती है।”
घर-घर पहुंचाया जाएगा सम्मेलन का निमंत्रण
आयोजकों ने बताया कि अक्षत-कलश के माध्यम से प्रत्येक गांव और हर परिवार तक सम्मेलन का संदेश पहुंचाया जाएगा। कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्रों में घर-घर जाकर अक्षत देंगे और 15 मार्च को सम्मेलन में शामिल होने का आग्रह करेंगे।
इस पहल को धार्मिक परंपरा और जनसंपर्क का समन्वित अभियान बताया जा रहा है, जिससे समाज के सभी वर्गों तक सम्मेलन की जानकारी सहज रूप से पहुंचेगी। विशेष रूप से महिला, पुरुष, युवा और बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया जा रहा है।
विश्व हिन्दू परिषद के तत्वावधान में होगा आयोजन
विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन विश्व हिन्दू परिषद के तत्वावधान में किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम का स्वरूप धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से परिपूर्ण रहेगा।
सम्मेलन की शुरुआत 15 मार्च की सुबह 7:00 बजे भव्य कलश यात्रा के साथ होगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना जताई गई है। इसके बाद 51 कुंडीय हवन का आयोजन किया जाएगा, जो पूरे कार्यक्रम का प्रमुख धार्मिक अनुष्ठान होगा।
दिनभर चलेंगे धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम
सम्मेलन के दौरान सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ, बौद्धिक सत्र और संत-महात्माओं के प्रवचन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि दिनभर धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक गतिविधियों का क्रम जारी रहेगा, जिससे श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण का अनुभव होगा।
कार्यक्रम को अनुशासित और भव्य बनाने के लिए विभिन्न समितियों का गठन किया जा रहा है, जो व्यवस्था, स्वागत, जनसंपर्क और आयोजन प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगी।
समाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता पर जोर
आयोजकों ने बताया कि यह सम्मेलन केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज की एकता, जागरूकता और सांस्कृतिक समरसता को मजबूत करने का भी एक प्रयास है। प्रखंड के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई गई है।
वक्ताओं ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाएगा और सभी कार्यकर्ताओं से अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई।
आयोजकों ने कहा: “सम्मेलन में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”
कार्यकर्ताओं को सौंपी गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
बैठक के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं को अपने-अपने गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की जिम्मेदारी दी गई। उन्हें निर्देश दिया गया कि वे लोगों को सम्मेलन के उद्देश्य, कार्यक्रम की रूपरेखा और धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दें।
इस अभियान के तहत विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों पर फोकस किया जा रहा है ताकि हर वर्ग तक सम्मेलन की सूचना समय रहते पहुंच सके और अधिकतम सहभागिता सुनिश्चित हो।
न्यूज़ देखो: धार्मिक आयोजन के जरिए जनसंपर्क की रणनीति
चंदवा में अक्षत-कलश के माध्यम से निमंत्रण देने की पहल पारंपरिक धार्मिक पद्धति और संगठित जनसंपर्क का अनूठा उदाहरण है। इससे यह स्पष्ट होता है कि आयोजक सम्मेलन को व्यापक और ऐतिहासिक बनाने के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय रणनीति अपना रहे हैं। अब यह देखना अहम होगा कि 15 मार्च के सम्मेलन में अपेक्षित जनभागीदारी किस स्तर तक पहुंचती है और इसका सामाजिक प्रभाव क्या रहता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सामाजिक सहभागिता से ही सफल होते हैं बड़े आयोजन
ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज को जोड़ने और जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनते हैं।
यदि हर व्यक्ति अपने स्तर पर सहभागिता निभाए, तो सामूहिक आयोजन और भी भव्य बन सकते हैं।
अपने क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेना सामुदायिक एकता को मजबूत करता है।
जागरूक बनें, जुड़े रहें और सकारात्मक गतिविधियों का समर्थन करें।
आपकी भागीदारी ही किसी भी आयोजन की असली ताकत होती है।
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