गढ़वा में श्री रुद्र महायज्ञ की तैयारियां तेज, यज्ञशाला निर्माण हेतु कुश कटाई का शुभारंभ

गढ़वा में श्री रुद्र महायज्ञ की तैयारियां तेज, यज्ञशाला निर्माण हेतु कुश कटाई का शुभारंभ

author Sonu Kumar
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#गढ़वा #धार्मिक_आयोजन : नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में रुद्र महायज्ञ की तैयारियां शुरू।

गढ़वा जिला मुख्यालय के समीप ग्राम जोबरईया स्थित बंडा पहाड़ के श्री नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में प्रस्तावित नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ की तैयारियां औपचारिक रूप से प्रारंभ हो गई हैं। यज्ञशाला निर्माण के लिए आवश्यक कुश संग्रह हेतु नवगढ़ गांव के कोयल नदी तट पर श्रमदान के माध्यम से कुश कटाई की गई। यह कार्य यज्ञाधीश आचार्य आशीष वैद्य जी महाराज के निर्देशन में सम्पन्न हुआ। आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और सामूहिक सहभागिता को मजबूत किया है।

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  • श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, ग्राम जोबरईया में रुद्र महायज्ञ की तैयारी शुरू।
  • यज्ञशाला निर्माण हेतु कोयल नदी तट से कुश संग्रह।
  • आचार्य आशीष वैद्य जी महाराज के निर्देशन में धार्मिक अनुष्ठान।
  • जागृति युवा क्लब सह यज्ञ आयोजन समिति ने निभाई प्रमुख भूमिका।
  • ग्रामीणों व युवाओं का श्रमदान, सामाजिक एकजुटता का उदाहरण।

गढ़वा जिले में आगामी श्री रुद्र महायज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह चरम पर है। इस महायज्ञ के निमित्त यज्ञशाला निर्माण का कार्य विधिवत प्रारंभ हो गया है। यज्ञशाला में प्रयुक्त होने वाले कुश के संग्रह के लिए जागृति युवा क्लब सह यज्ञ आयोजन समिति के सदस्यों एवं ग्रामीणों ने श्रमदान कर धार्मिक परंपराओं के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

कोयल नदी तट पर विधिवत पूजा के बाद कुश कटाई

यज्ञाधीश श्री श्री आचार्य आशीष वैद्य जी महाराज के निर्देशन में समर्पित सदस्यों की एक टीम प्रातः लगभग 8 बजे सतबहिनी स्टेशन के समीप नवगढ़ गांव स्थित कोयल नदी के तट पर पहुंची। यहां नदी तट पर आचार्य जी एवं यज्ञ आयोजन समिति के अध्यक्ष जितेंद्र कुमार पाल द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की गई।
पूजा के पश्चात सनातन परंपरा के अनुसार कुश की कटाई प्रारंभ की गई, जिसमें सभी ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ भाग लिया।

यज्ञाधीश ने की समर्पण भावना की सराहना

कुश कटाई के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए आचार्य आशीष वैद्य जी महाराज ने कहा:

आचार्य आशीष वैद्य जी महाराज ने कहा: “धार्मिक आयोजनों की सफलता समाज के सामूहिक समर्पण पर निर्भर करती है। जिस श्रद्धा से आप सभी श्रमदान कर रहे हैं, वह सनातन संस्कृति की सच्ची पहचान है।”

उन्होंने कहा कि यज्ञ केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, शुद्ध आचरण और लोककल्याण का माध्यम है।

ग्रामीणों की सक्रिय सहभागिता

इस पावन कार्य में स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कुश संग्रह में शिवपूजन पाल, कृष्णा राम, राजकिशोर पाल, रोहित कुमार चंद्रवंशी, कौशल कुशवाहा, रामाशीष कुशवाहा, मदन कुशवाहा, उदित पाल सहित कई ग्रामीण सक्रिय रूप से उपस्थित रहे।
ग्रामीणों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आयोजन केवल समिति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक प्रयास होता है।

जागृति युवा क्लब की संगठित भूमिका

इस आयोजन में जागृति युवा क्लब के वरीय एवं कनिष्ठ सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। क्लब के उपाध्यक्ष सत्येंद्र पाल, सचिव विनय पाल, कोषाध्यक्ष विवेकानंद पाल, उपकोषाध्यक्ष चैतू कुमार भुईयां सहित अन्य सीनियर-जूनियर सदस्यों ने श्रमदान और समन्वय के माध्यम से आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।

नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ का कार्यक्रम

विदित हो कि ग्राम जोबरईया स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर परिसर में 08 मार्च 2026 से 16 मार्च 2026 तक नौ दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ का आयोजन प्रस्तावित है। इस महायज्ञ के लिए श्री हनुमत ध्वज का अधिष्ठापन कार्यक्रम पूर्व में ही संपन्न हो चुका है, जिसके बाद अब तैयारी का कार्य तेज कर दिया गया है।

प्रधान संयोजक ने जताया आभार

श्री रुद्र महायज्ञ के प्रधान संयोजक एवं युवा समाजसेवी राकेश कुमार पाल ने कुश कटाई के कार्य में लगे सभी समर्पित लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा कि:

राकेश कुमार पाल ने कहा: “यह श्रमदान ही इस महायज्ञ की आत्मा है। समाज के हर वर्ग की भागीदारी इसे ऐतिहासिक बनाएगी।”

उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में और भी व्यापक स्तर पर तैयारियां की जाएंगी।

न्यूज़ देखो: आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का संगम

श्री रुद्र महायज्ञ की यह तैयारी बताती है कि आज भी ग्रामीण समाज में धार्मिक परंपराएं सामूहिक सहभागिता से जीवंत हैं। श्रमदान के माध्यम से युवाओं और ग्रामीणों की भागीदारी सामाजिक एकजुटता को मजबूत करती है। ऐसे आयोजन संस्कृति संरक्षण के साथ सामाजिक समरसता का भी संदेश देते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

श्रद्धा से जुड़ें, संस्कृति को संजोएं

धार्मिक आयोजन तभी सार्थक होते हैं जब समाज एकजुट होकर उनमें भागीदारी निभाए। ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
इस खबर पर अपनी राय साझा करें, लेख को आगे बढ़ाएं और सनातन संस्कृति के संरक्षण में अपनी भूमिका निभाएं।

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