#सिमडेगा #पर्पल_फेयर : दिव्यांगजनों की प्रतिभा निखरी—समावेशी समाज का संदेश मजबूत हुआ।
सिमडेगा में जिला स्थापना दिवस की रजत जयंती पर पर्पल फेयर 2026 का आयोजन किया गया, जिसमें दिव्यांगजनों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिला। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही तथा सहायक उपकरणों का वितरण किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रदर्शनी ने लोगों को प्रभावित किया। यह आयोजन समावेशी समाज की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
- नगर भवन सिमडेगा में आयोजित हुआ भव्य पर्पल फेयर 2026।
- अभयनंदन अंबष्ट, भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोंगाड़ी सहित कई गणमान्य उपस्थित।
- करीब 400 से अधिक प्रतिभागियों ने कार्यक्रम में भाग लिया।
- 37 दिव्यांग कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
- 52 लाभार्थियों को 222 सहायक उपकरण वितरित किए गए।
- रोजगार व योजनाओं की जानकारी के लिए 6 स्टॉल लगाए गए।
सिमडेगा में जिला स्थापना दिवस की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित पर्पल फेयर 2026 ने समाज को एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश दिया। नगर भवन में आयोजित इस कार्यक्रम में दिव्यांगजनों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला। कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को मंच प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और समावेशी सोच को मजबूत करना था।
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ
कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य नि:शक्तता आयुक्त अभयनंदन अंबष्ट, सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा, कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी, उपायुक्त कंचन सिंह एवं सीआरसी रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया गया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में दिव्यांगजन, उनके परिजन, छात्र-छात्राएं, आंगनबाड़ी सेविकाएं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। लगभग 400 से अधिक लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।
दिव्यांग सशक्तिकरण पर जोर
राज्य नि:शक्तता आयुक्त अभयनंदन अंबष्ट ने कहा:
“दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के लागू होने के बाद देश में दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर बड़ा बदलाव आया है। ऐसे आयोजन उन्हें पहचान और अवसर प्रदान करते हैं।”
सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने कहा:
“दिव्यांगजन किसी भी मायने में कमजोर नहीं हैं, उनके भीतर अपार क्षमता और आत्मबल होता है।”
कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने कहा:
“उचित अवसर मिलने पर दिव्यांगजन समाज के लिए प्रेरणा बन सकते हैं और हर क्षेत्र में अपनी पहचान स्थापित कर सकते हैं।”
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा:
“पर्पल फेयर केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि समावेशी समाज की दिशा में एक सशक्त कदम है।”
उन्होंने बताया कि जिले में लगभग 4 हजार दिव्यांगजन पेंशन योजना से लाभान्वित हो रहे हैं और हाल ही में 172 लाभार्थियों को सहायक उपकरण वितरित किए गए हैं।
प्रतिभा और रचनात्मकता का शानदार प्रदर्शन
कार्यक्रम के दौरान 37 दिव्यांग कलाकारों ने नृत्य, संगीत, कविता पाठ और चित्रकला जैसी प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावुक और प्रेरित दोनों किया।
इसके अलावा दिव्यांगजनों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और कलाकृतियों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे लोगों ने काफी सराहा। यह प्रदर्शनी उनके कौशल और आत्मनिर्भरता की मिसाल बनी।
सहायक उपकरणों का वितरण
कार्यक्रम के दौरान 52 दिव्यांगजन एवं वृद्ध लाभार्थियों के बीच कुल 222 सहायक उपकरण वितरित किए गए। इनमें शामिल हैं:
- 17 व्हीलचेयर
- 1 मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल
- 34 कमोड युक्त व्हीलचेयर
- 34 कमर बेल्ट
- 68 घुटने के सपोर्ट
- 34 चलने की छड़ी
- 34 सिलिकॉन फोम सीट
इसके अलावा एडिप और वयोश्री योजना के तहत कई लाभार्थियों का आकलन भी किया गया।
रोजगार और जागरूकता के लिए स्टॉल
कार्यक्रम में सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा 6 स्टॉल लगाए गए, जहां रोजगार, शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास से संबंधित जानकारी दी गई। इन स्टॉल्स के माध्यम से दिव्यांगजनों को विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया गया।
सुलभता पर विशेष ध्यान
सीआरसी रांची के निदेशक सूर्यमणि प्रसाद ने बताया:
“कार्यक्रम स्थल को पूरी तरह दिव्यांगजनों के अनुकूल बनाया गया था, जिसमें रैंप, सुलभ शौचालय और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई थीं।”
उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन समाज की महत्वपूर्ण शक्ति हैं और उन्हें मंच देना बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन सीआरसी रांची के सहायक प्राध्यापक (श्रवण एवं वाक्) मुकेश कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों का आभार व्यक्त किया और भविष्य में ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

न्यूज़ देखो: समावेशी समाज की ओर बढ़ता सिमडेगा
सिमडेगा का पर्पल फेयर 2026 यह दिखाता है कि समाज में बदलाव केवल नीतियों से नहीं, बल्कि ऐसे संवेदनशील आयोजनों से भी आता है। दिव्यांगजनों को मंच देना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। हालांकि, सवाल यह भी है कि क्या ऐसे प्रयास सालभर जारी रहेंगे या केवल आयोजनों तक सीमित रह जाएंगे। प्रशासन और समाज दोनों को मिलकर इस दिशा में निरंतर काम करना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
बदलाव की शुरुआत यहीं से होती है
जब समाज हर व्यक्ति को समान अवसर देता है, तभी असली विकास संभव होता है।
दिव्यांगजन हमारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारी ताकत हैं—उन्हें पहचान देना जरूरी है।
छोटी पहल भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है, बस जरूरत है संवेदनशील सोच की।
आइए हम सब मिलकर एक ऐसा समाज बनाएं, जहां कोई भी खुद को पीछे महसूस न करे।
आपकी भागीदारी ही बदलाव की असली ताकत है।
इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं, अपनी राय कमेंट में जरूर दें और समावेशी समाज के इस अभियान का हिस्सा बनें।

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