#लातेहार #निर्माण_अनियमितता : पुल निर्माण में बालू भंडारण से राजस्व नुकसान की आशंका जताई गई।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड स्थित छेचानी क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यहां बड़ी मात्रा में बालू के भंडारण पर स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों को आशंका है कि बिना वैध प्रक्रिया के बालू का उपयोग किया जा रहा है, जिससे राजस्व को नुकसान हो सकता है। प्रशासन ने मामले की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
- छेचानी क्षेत्र, बरवाडीह में पुल निर्माण के लिए भारी मात्रा में बालू भंडारण।
- ग्रामीणों ने वैधता और पारदर्शिता पर उठाए गंभीर सवाल।
- योजना औरंगा नदी पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्माणाधीन।
- आरोप: नदी से सीधे बालू उठाकर किया जा रहा भंडारण।
- अंचलाधिकारी लवकेश सिंह ने जांच कर कार्रवाई की बात कही।
- डीएमओ नदीम सफी ने स्थल जांच कर कदम उठाने का दिया भरोसा।
लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड अंतर्गत बेतला पंचायत के छेचानी क्षेत्र में बन रहे पुल को लेकर इन दिनों चर्चा तेज हो गई है। यह पुल सतबरवा प्रखंड को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिससे इलाके के लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिलने की उम्मीद है। लेकिन निर्माण कार्य के बीच बालू के बड़े पैमाने पर भंडारण ने इस योजना की पारदर्शिता और वैधता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विकास की अहम परियोजना पर उठे सवाल
छेचानी स्थित औरंगा नदी पर बन रहा यह पुल करोड़ों रुपये की लागत से तैयार किया जा रहा है। यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे दो प्रखंडों के बीच संपर्क बेहतर होगा।
हालांकि, निर्माण कार्य के दौरान जिस तरह से बड़ी मात्रा में बालू का भंडारण किया गया है, उसने लोगों के मन में कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।
बालू के स्रोत और वैधता पर संशय
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य के लिए आसपास की नदी से ही बालू उठाकर जमा किया जा रहा है। यदि यह बिना वैध अनुमति के किया जा रहा है, तो यह नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है।
एक स्थानीय ग्रामीण ने कहा: “अगर बिना अनुमति के बालू उठाया जा रहा है, तो यह गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए।”
प्रशासन ने लिया संज्ञान
इस मामले को लेकर प्रशासन भी सक्रिय होता नजर आ रहा है। बरवाडीह के अंचलाधिकारी लवकेश सिंह ने स्पष्ट किया कि
“यदि बालू से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं, तो जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं जिला खनन पदाधिकारी नदीम सफी ने कहा:
“बालू भंडारण का मामला हमारे संज्ञान में आया है। जल्द ही स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।”
गुणवत्ता और पारदर्शिता की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि करोड़ों रुपये की इस योजना में किसी भी प्रकार की अनियमितता भविष्य में बड़ी समस्या बन सकती है।
उन्होंने मांग की है कि
- निर्माण सामग्री की नियमित जांच हो
- बालू के भंडारण और उपयोग की वैधता सुनिश्चित की जाए
- पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए
जांच की मांग तेज, कार्रवाई का इंतजार
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला और गंभीर हो सकता है।
यह भी कहा जा रहा है कि ऐसी परियोजनाओं में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनाए रखना बेहद जरूरी है, ताकि विकास कार्यों का लाभ आम जनता तक सही तरीके से पहुंच सके।
न्यूज़ देखो: विकास बनाम अनियमितता का सवाल
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या विकास कार्यों में पारदर्शिता और नियमों का पालन हो रहा है? छेचानी पुल जैसी महत्वपूर्ण परियोजना में उठे सवाल प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। अब देखना होगा कि जांच कितनी निष्पक्ष और प्रभावी होती है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
विकास तभी सार्थक, जब पारदर्शिता हो मजबूत
किसी भी क्षेत्र का विकास तभी सार्थक होता है, जब उसमें गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों शामिल हों। ऐसे मामलों में समाज की जागरूकता और प्रशासन की जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण होती है।
अगर आपके आसपास भी किसी योजना में अनियमितता दिखे, तो आवाज उठाइए और सच को सामने लाने में सहयोग करें।
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