#खलारी #आदिवासीधर्मकोड : धरना प्रदर्शन में भाग लेने दिल्ली रवाना हुआ प्रतिनिधिमंडल।
खरवार भोगता समाज विकास संघ और राष्ट्रीय चेरो जनजाति महासंघ के प्रतिनिधि 25 फरवरी को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली पहुंचे हैं। केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु के नेतृत्व में यह दल खलारी से रवाना हुआ। धरना का उद्देश्य आदिवासी धर्म कोड की मांग को केंद्र सरकार तक प्रभावी रूप से पहुंचाना है। इसमें विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के हजारों लोगों की भागीदारी अपेक्षित है।
- दर्शन गंझु के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा।
- गरीब रथ एक्सप्रेस से मंगलवार को रवाना हुआ दल।
- 25 फरवरी को जंतर-मंतर पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन।
- आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर केंद्र सरकार का ध्यान आकृष्ट करने की तैयारी।
- झारखंड से खरवार-भोगता और चेरो समाज के बड़ी संख्या में प्रतिनिधि शामिल।
खलारी, रांची से खरवार भोगता समाज विकास संघ एवं राष्ट्रीय चेरो जनजाति महासंघ के पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों का एक महत्वपूर्ण दल मंगलवार को गरीब रथ एक्सप्रेस से दिल्ली पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल 25 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन में भाग लेने के उद्देश्य से रवाना हुआ है। इस कार्यक्रम का मुख्य मुद्दा आदिवासी धर्म कोड की मांग को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाना है, जिसे लेकर लंबे समय से विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा आवाज उठाई जा रही है।
केंद्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में दिल्ली पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व खरवार भोगता समाज विकास संघ के केंद्रीय अध्यक्ष दर्शन गंझु कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर देश के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग दिल्ली पहुंच रहे हैं।
दर्शन गंझु ने कहा: “25 फरवरी को जंतर-मंतर पर आयोजित धरना-प्रदर्शन के माध्यम से हम आदिवासी धर्म कोड की मांग को केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से रखेंगे और अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण तरीके से आवाज बुलंद करेंगे।”
उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड से खरवार-भोगता और चेरो समाज के बड़ी संख्या में प्रतिनिधि इस आंदोलन में भाग लेने के लिए पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं।
आदिवासी धर्म कोड की मांग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर लामबंदी
धरना-प्रदर्शन का उद्देश्य आदिवासी समुदाय की पहचान, परंपरा और धार्मिक मान्यता को लेकर लंबे समय से लंबित मांगों को राष्ट्रीय मंच पर उठाना है। जंतर-मंतर पर आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए केंद्र सरकार का ध्यान आदिवासी धर्म कोड लागू करने की दिशा में आकर्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
समाज के नेताओं का मानना है कि अलग धर्म कोड से आदिवासी समुदाय की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक आस्था को संवैधानिक मान्यता मिल सकेगी। इसी मांग को लेकर विभिन्न संगठनों द्वारा समय-समय पर आंदोलन और जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।
झारखंड से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल
दर्शन गंझु ने बताया कि झारखंड के अलग-अलग जिलों से समाज के प्रतिनिधि और पदाधिकारी दिल्ली पहुंचे हैं, जो इस ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन का हिस्सा बनेंगे। उनका कहना है कि यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता और अधिकारों से जुड़ा आंदोलन है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को रखने के लिए यह धरना आयोजित किया जा रहा है, ताकि सरकार तक समाज की वास्तविक आवाज पहुंच सके।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल प्रमुख पदाधिकारी
दिल्ली पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी और समाज के सक्रिय सदस्य शामिल हैं। इनमें केंद्रीय सदस्य अर्जुन गंझु, रामलखन गंझु, बिगन सिंह भोगता, धनेश्वर गंझु, रामगढ़ जिला अध्यक्ष अजय गंझु, बंधन गंझु, प्रभाकर गंझु, बालेश्वर गंझु शामिल हैं।
इसके अलावा राष्ट्रीय चेरो जनजाति महासंघ के प्रदेश संयोजक आशुतोष सिंह चेरो, शिवम मुंडा सहित अनेक पदाधिकारी और समाज के लोग भी इस दल का हिस्सा हैं। सभी प्रतिनिधि संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन में भाग लेकर अपनी मांगों को संगठित तरीके से प्रस्तुत करेंगे।
जंतर-मंतर पर होगा एक दिवसीय शांतिपूर्ण धरना
दिल्ली के जंतर-मंतर को देशभर में लोकतांत्रिक आंदोलनों और जनआंदोलनों का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इसी स्थान पर 25 फरवरी को आयोजित होने वाले इस धरना-प्रदर्शन में विभिन्न राज्यों से आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी होने की संभावना जताई जा रही है।
समाज के नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आयोजित किया जाएगा, जिसमें समाज की समस्याओं, मांगों और अधिकारों को संगठित स्वर में रखा जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा भी व्यक्त की जाएगी।
सामाजिक एकजुटता का संदेश भी है यह कार्यक्रम
इस यात्रा और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से समाज के बीच एकजुटता का संदेश भी दिया जा रहा है। विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधि एक मंच पर जुटकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक आवाज उठाएंगे।
समाज के वरिष्ठ सदस्यों का मानना है कि संगठित प्रयासों से ही बड़े स्तर पर नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित किया जा सकता है और समाज की लंबित मांगों को गति मिल सकती है।
न्यूज़ देखो: पहचान और अधिकार की आवाज दिल्ली तक
दिल्ली में प्रस्तावित यह धरना केवल एक विरोध कार्यक्रम नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों से जुड़ा एक संगठित प्रयास है। झारखंड सहित कई राज्यों से प्रतिनिधियों की भागीदारी इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शाती है। अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और संवाद की दिशा में कोई ठोस पहल होती है या नहीं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
अधिकारों की आवाज को मिलकर दें मजबूती
लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से उठाना हर नागरिक का अधिकार है।
सामाजिक एकजुटता ही किसी भी आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत होती है।
जरूरत है जागरूकता, संवाद और संगठित प्रयासों की, ताकि समाज की आवाज नीति-निर्माताओं तक पहुंचे।
आप भी सामाजिक मुद्दों पर जागरूक रहें और सकारात्मक भागीदारी निभाएं।
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