#सिमडेगा #हॉकी_गौरव : जिले की दो बेटियां जापान में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
झारखंड के सिमडेगा जिले की दो युवा हॉकी खिलाड़ियों संदीपा कुमारी और पुष्पा मांझी का चयन भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में हुआ है। दोनों खिलाड़ी 29 मई से जापान के काकामिगाहारा में आयोजित एशिया कप 2026 में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी। खेल विभाग के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और आवासीय हॉकी सेंटर सिमडेगा से प्रशिक्षण प्राप्त कर रही इन खिलाड़ियों की उपलब्धि से पूरे जिले में उत्साह का माहौल है। ग्रामीण प्रतिभाओं के अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने को जिले और राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
- संदीपा कुमारी और पुष्पा मांझी का भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम में चयन हुआ।
- दोनों खिलाड़ी 29 मई से जापान के काकामिगाहारा में होने वाले एशिया कप में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।
- संदीपा कुमारी फॉरवर्ड और पुष्पा मांझी मिडफील्डर की भूमिका निभाएंगी।
- दोनों खिलाड़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं आवासीय हॉकी सेंटर सिमडेगा की प्रशिक्षु हैं।
- कोच तारिणी कुमारी के मार्गदर्शन में दोनों ने लगातार मेहनत कर यह उपलब्धि हासिल की।
- चयन के बाद पूरे सिमडेगा जिले में खुशी और गर्व का माहौल है।
हॉकी की नर्सरी के रूप में पहचान बना चुके सिमडेगा जिले ने एक बार फिर देश को दो प्रतिभाशाली खिलाड़ी दी हैं। हॉकी इंडिया द्वारा घोषित भारतीय महिला अंडर-18 टीम में जिले की संदीपा कुमारी और पुष्पा मांझी का चयन हुआ है। दोनों खिलाड़ी आगामी एशिया कप 2026 में भारतीय टीम का हिस्सा बनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करेंगी। इस उपलब्धि से न केवल सिमडेगा बल्कि पूरे झारखंड में गर्व और खुशी का माहौल है।
महिला अंडर-18 एशिया कप 2026 का आयोजन 29 मई से जापान के काकामिगाहारा शहर में होगा। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में एशिया के कई देशों की मजबूत टीमें हिस्सा लेंगी। भारतीय टीम में जगह बनाना दोनों खिलाड़ियों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचीं बेटियां
भारतीय टीम में चयनित संदीपा कुमारी रसई प्रखंड के करंगागुड़ी नवा टोली गांव की निवासी हैं। उन्हें टीम में फॉरवर्ड खिलाड़ी के रूप में शामिल किया गया है। संदीपा पहले से ही अपनी तेज खेल शैली और गोल करने की क्षमता के लिए जानी जाती हैं।
संदीपा की खास बात यह भी है कि वह भारतीय महिला हॉकी टीम की खिलाड़ी संगीता कुमारी की छोटी बहन हैं। परिवार में पहले से खेल का माहौल होने के कारण संदीपा को बचपन से ही हॉकी के प्रति प्रेरणा मिली।
वहीं दूसरी खिलाड़ी पुष्पा मांझी कुरडेग प्रखंड के आसनबेडा कुसुम टोली गांव की रहने वाली हैं। उन्हें टीम में मिडफील्डर की भूमिका सौंपी गई है। मैदान में तेज पासिंग, नियंत्रण और टीम समन्वय के लिए पुष्पा की पहचान बनी हुई है।
दोनों खिलाड़ियों की सफलता यह साबित करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मार्गदर्शन और अवसर की होती है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बना खिलाड़ियों की सफलता का आधार
संदीपा और पुष्पा दोनों खेल विभाग द्वारा संचालित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एवं आवासीय हॉकी सेंटर सिमडेगा की प्रशिक्षु हैं। यहां उन्हें आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रशिक्षण दिया गया।
कोच तारिणी कुमारी के मार्गदर्शन में दोनों खिलाड़ियों ने लगातार मेहनत की और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। नियमित अभ्यास, अनुशासन और समर्पण ने उन्हें भारतीय टीम तक पहुंचाया।
स्थानीय खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सिमडेगा में खेल के लिए बेहतर माहौल और समर्पित कोचिंग व्यवस्था के कारण लगातार राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल रहे हैं।
उपायुक्त और खेल प्रेमियों ने दी बधाई
दोनों खिलाड़ियों के चयन पर सिमडेगा उपायुक्त कंचन सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार ग्रामीण प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है।
उपायुक्त कंचन सिंह ने कहा: “ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। संदीपा और पुष्पा ने जिले और राज्य का नाम रोशन किया है।”
वहीं हॉकी सिमडेगा के प्रतिनिधि मनोज कोनबेगी ने कहा कि सिमडेगा एक बार फिर देश के सामने हॉकी की नर्सरी के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है।
मनोज कोनबेगी ने कहा: “यह सिमडेगा के लिए गर्व का क्षण है। यहां की बेटियां लगातार देश का नाम रोशन कर रही हैं।”
जिले में खुशी और गर्व का माहौल
दोनों खिलाड़ियों के चयन की खबर सामने आते ही जिले में खुशी की लहर दौड़ गई। खेल प्रेमियों, शिक्षकों, ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।
ग्रामीणों का कहना है कि संदीपा और पुष्पा की सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। खासकर ग्रामीण बेटियों को यह संदेश मिलेगा कि मेहनत और लगन से किसी भी बड़े मंच तक पहुंचा जा सकता है।
सिमडेगा जिले का हॉकी से पुराना और मजबूत रिश्ता रहा है। यहां से कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकल चुके हैं। अब संदीपा और पुष्पा ने इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का काम किया है।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से मजबूत हो रहा खेल जगत
विशेषज्ञों का मानना है कि महिला खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी से झारखंड में खेल संस्कृति और मजबूत हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियां अब खेल को करियर के रूप में अपना रही हैं।
हॉकी जैसे खेल में लगातार राष्ट्रीय स्तर पर चयन यह दिखाता है कि यदि खिलाड़ियों को उचित प्रशिक्षण, संसाधन और समर्थन मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकती हैं।
संदीपा और पुष्पा का चयन सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा और उम्मीद की नई कहानी बन गया है।
न्यूज़ देखो: सिमडेगा फिर बना हॉकी प्रतिभाओं की सबसे मजबूत नर्सरी
सिमडेगा की बेटियों का भारतीय टीम में चयन यह साबित करता है कि छोटे गांवों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं। खेल के क्षेत्र में झारखंड की बेटियां लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है। जरूरत इस बात की है कि ऐसी प्रतिभाओं को लगातार संसाधन, प्रशिक्षण और अवसर मिलते रहें ताकि देश को और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी मिल सकें। अब पूरे देश की नजर जापान में होने वाले इस टूर्नामेंट पर रहेगी, जहां सिमडेगा की बेटियां भारत का तिरंगा ऊंचा करने उतरेंगी।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मेहनत और सपनों की ताकत से बदलती है पहचान
गांव की मिट्टी से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना आसान नहीं होता।
संदीपा और पुष्पा ने साबित कर दिया कि लगन, अनुशासन और मेहनत से हर मंजिल हासिल की जा सकती है।
आज की बेटियां खेल, शिक्षा और हर क्षेत्र में नया इतिहास लिख रही हैं।
जरूरत है कि समाज और परिवार मिलकर ऐसी प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का काम करें।
आप भी इन बेटियों को शुभकामनाएं दें, खबर को साझा करें और अपने आसपास की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

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