बानो को अनुमंडल बनाने की मांग तेज, पंचायत स्तर पर जनसमर्थन जुटाने में जुटा मंच

बानो को अनुमंडल बनाने की मांग तेज, पंचायत स्तर पर जनसमर्थन जुटाने में जुटा मंच

author Shivnandan Baraik
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#बानो #अनुमंडल_मांग : पंचायत स्तर पर संपर्क अभियान चलाकर लोगों को जोड़ा जा रहा है।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड में अनुमंडल बनाए जाने की मांग को लेकर जनसमर्थन तेजी से बढ़ रहा है। कोनसौदे पंचायत भवन में आयोजित बैठक में बानो को अनुमंडल बनाओ मंच के सदस्यों ने पंचायत स्तर तक अभियान चलाने और लोगों को जागरूक करने का निर्णय लिया। बैठक में खराब सड़क, जिला मुख्यालय की लंबी दूरी और प्रशासनिक परेशानियों को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकार से जल्द पहल करने की मांग उठाई गई।

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  • कोनसौदे पंचायत भवन में बानो को अनुमंडल बनाओ मंच की बैठक आयोजित हुई।
  • बैठक की अध्यक्षता मुखिया सीता कुमारी ने की।
  • मंच अध्यक्ष बीरजो कंडुलना ने पंचायत स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने की बात कही।
  • ग्रामीणों ने कहा कि कोनसौदे पंचायत जिला मुख्यालय से लगभग 70 किलोमीटर दूर है।
  • खराब सड़क और लंबी दूरी के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए लोगों से आर्थिक सहयोग की भी अपील की गई।

सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड को अनुमंडल बनाने की मांग अब ग्रामीण स्तर पर व्यापक जनसमर्थन हासिल करती दिख रही है। इसी कड़ी में प्रखंड के कोनसौदे पंचायत भवन में बानो को अनुमंडल बनाओ मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र की प्रशासनिक समस्याओं, दूरी और बुनियादी कठिनाइयों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक की अध्यक्षता कोनसौदे पंचायत की मुखिया सीता कुमारी ने की। इस दौरान मंच के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने एकजुट होकर बानो को अनुमंडल बनाने की मांग को और मजबूत तरीके से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

पंचायत स्तर तक पहुंचाया जाएगा आंदोलन

बैठक में मंच के अध्यक्ष सह जिला परिषद सदस्य बीरजो कंडुलना ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक पंचायत या गांव की नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और सुविधा से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि अनुमंडल की मांग को लेकर प्रखंड के सभी पंचायतों में मंच के सदस्य लगातार संपर्क अभियान चला रहे हैं।

बीरजो कंडुलना ने कहा: “हमें मिल-जुलकर अनुमंडल की मांग करनी है। पंचायत स्तर तक पहुंचकर लोगों को इस आंदोलन से जोड़ना जरूरी है।”

उन्होंने बताया कि बानो प्रखंड के कई पंचायतों के लोग प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय तक लंबी दूरी तय करने को मजबूर हैं, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।

जिला मुख्यालय की दूरी बनी बड़ी समस्या

बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि कोनसौदे पंचायत से जिला मुख्यालय की दूरी लगभग 70 किलोमीटर है। किसी भी सरकारी कार्य, प्रमाण पत्र, राजस्व या अन्य प्रशासनिक काम के लिए लोगों को पूरा दिन खर्च करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने सड़क की खराब स्थिति पर भी नाराजगी जाहिर की। लोगों का कहना था कि वर्तमान समय में सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, जिससे मोटरसाइकिल या अन्य वाहनों से यात्रा करना भी मुश्किल हो गया है।

ग्रामीणों ने कहा कि बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है। ऐसे में अनुमंडल बनने से लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी।

आर्थिक सहयोग के लिए भी की गई अपील

बैठक में मौजूद चूड़ामणि यादव ने कहा कि किसी भी जन आंदोलन को मजबूत करने के लिए जनसमर्थन के साथ आर्थिक सहयोग भी जरूरी होता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे पंचायत स्तर पर अधिक से अधिक लोगों तक इस मांग को पहुंचाएं।

चूड़ामणि यादव ने कहा: “आज किसी भी लड़ाई को लड़ने के लिए जन और धन दोनों की जरूरत पड़ती है। हमें हर व्यक्ति तक पहुंचकर इस मांग की जानकारी देनी होगी।”

उन्होंने कहा कि यदि क्षेत्र के लोग एकजुट होकर आवाज उठाएंगे तो सरकार को इस दिशा में सकारात्मक निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

बानो अनुमंडल बनने की सभी शर्तें पूरी करता है

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बानो प्रखंड अनुमंडल बनने के लिए जरूरी सभी मानकों को पूरा करता है। क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, सीमावर्ती पंचायतों की संख्या, प्रशासनिक दूरी और जनसंख्या को देखते हुए यह मांग पूरी तरह उचित है।

ग्रामीणों ने बताया कि बानो प्रखंड के अलावा आसपास के सीमावर्ती प्रखंडों और पंचायतों के लोग भी इस मांग का समर्थन कर रहे हैं। लोगों का मानना है कि अनुमंडल बनने से प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी और आम जनता को राहत मिलेगी।

ग्रामीणों ने दिखाई एकजुटता

बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और सामाजिक प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। लोगों ने कहा कि क्षेत्र के विकास और सुविधा के लिए यह आंदोलन जरूरी है।

मौके पर ग्राम प्रधान शशिकांत उज्ज्वल मड़की, आनन्द मसीह तोपनो, बालमुकुंद सिंह सहित कोनसौदे, केतुङ्गा, कुरुचडेगा, बीरता समेत विभिन्न गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा कि अनुमंडल बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन और विकास कार्यों में तेजी आएगी और लोगों को जिला मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

न्यूज़ देखो: ग्रामीण इलाकों की प्रशासनिक समस्याओं को समझने की जरूरत

बानो को अनुमंडल बनाने की मांग केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आम लोगों की दैनिक परेशानियों से जुड़ा विषय है। जब लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़े, तो यह प्रशासनिक विकेंद्रीकरण की जरूरत को दर्शाता है। सरकार को ऐसे क्षेत्रों की वास्तविक समस्याओं को समझते हुए जनहित में गंभीर पहल करनी चाहिए। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस बढ़ती जनमांग पर क्या निर्णय लेते हैं।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

जनभागीदारी से ही मजबूत होते हैं विकास के आंदोलन

जब लोग अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होते हैं, तभी बदलाव की शुरुआत होती है।
बानो के ग्रामीणों ने यह दिखाया है कि विकास के लिए जागरूकता और एकता दोनों जरूरी हैं।
स्थानीय मुद्दों पर सामूहिक आवाज लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत होती है।
अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझें, जागरूक बनें और सकारात्मक बदलाव के लिए आगे आएं।
अपनी राय कमेंट में जरूर दें और खबर को अधिक से अधिक लोगों तक साझा करें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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