
#घाघरा #गुमला #स्कूलफीस_विवाद : मकरा गांव के निजी स्कूल पर अभिभावकों से अवैध शुल्क वसूली का आरोप लगा।
गुमला जिले के घाघरा प्रखंड के मकरा गांव स्थित सॉलिटेयर एकेडमी स्कूल पर अभिभावकों से मनमानी फीस और अतिरिक्त शुल्क वसूलने का आरोप लगा है। स्थानीय निवासी शिवेश्वर सिंह ने इस मामले में गुमला उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन गरीब और मजदूर वर्ग के अभिभावकों से शिक्षा के नाम पर भारी रकम वसूल रहा है। मामले को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
- घाघरा प्रखंड के मकरा गांव स्थित सॉलिटेयर एकेडमी स्कूल पर मनमानी फीस वसूली का आरोप।
- स्थानीय निवासी शिवेश्वर सिंह ने गुमला उपायुक्त को लिखित शिकायत सौंपकर जांच की मांग की।
- आरोप — हर साल नई किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर किया जाता है।
- वार्षिक शुल्क और अतिरिक्त चार्ज के नाम पर भारी राशि वसूली का आरोप।
- ग्रामीणों की चेतावनी — जांच नहीं हुई तो आंदोलन और विरोध प्रदर्शन करेंगे।
गुमला जिले के घाघरा प्रखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। मकरा गांव स्थित निजी शिक्षण संस्थान सॉलिटेयर एकेडमी स्कूल पर मनमाने तरीके से फीस वसूली और अतिरिक्त शुल्क लगाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर स्थानीय निवासी शिवेश्वर सिंह ने गुमला के उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर जांच की मांग की है।
शिकायत में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधन द्वारा गरीब और मजदूर वर्ग के अभिभावकों से शिक्षा के नाम पर भारी रकम वसूली जा रही है। इससे क्षेत्र के कई परिवार आर्थिक रूप से परेशान हो रहे हैं और बच्चों की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए कठिन होता जा रहा है। इस मामले को लेकर ग्रामीणों में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
उपायुक्त को सौंपा गया लिखित आवेदन
स्थानीय निवासी शिवेश्वर सिंह ने गुमला उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन मनमाने तरीके से फीस निर्धारित कर रहा है और अभिभावकों पर अतिरिक्त शुल्क का दबाव बनाया जा रहा है।
आवेदन में कहा गया है कि कई गरीब परिवार अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने की उम्मीद में इस स्कूल में दाखिला दिलाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें लगातार बढ़ते शुल्क का सामना करना पड़ता है।
शिवेश्वर सिंह ने कहा: “शिक्षा के नाम पर इस तरह की लूट बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने उपायुक्त से मांग की है कि स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर तत्काल रोक लगाई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।”

हर साल नई किताबें खरीदने का आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि स्कूल प्रबंधन हर साल पाठ्यपुस्तकों और शैक्षणिक सामग्री को बदल देता है। इससे अभिभावकों को पुरानी किताबों का उपयोग करने के बजाय नई किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि किताबों और अन्य अध्ययन सामग्री की कीमत काफी अधिक होती है, जिससे गरीब परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है। उनका आरोप है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर अपनाई जाती है ताकि किताबों की खरीद से भी अतिरिक्त लाभ कमाया जा सके।
वार्षिक शुल्क के नाम पर भारी रकम
अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया है कि स्कूल प्रबंधन वार्षिक शुल्क यानी एनुअल चार्जेस के नाम पर भी मोटी रकम वसूलता है। यह राशि कई परिवारों के लिए वहन करना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को बेहतर भविष्य देना होना चाहिए, लेकिन यदि शिक्षा संस्थान ही आर्थिक बोझ बन जाएं तो गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो जाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए मजदूरी या अन्य छोटे काम करते हैं, ऐसे में बार-बार शुल्क बढ़ने से उनके लिए फीस जमा करना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा असंतोष
इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में निष्पक्ष जांच नहीं की गई और स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर रोक नहीं लगी तो वे व्यापक विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे।
उनका कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। यदि निजी शिक्षण संस्थान नियमों का पालन नहीं करेंगे तो इसका सीधा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ेगा।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार का आर्थिक शोषण स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि निजी स्कूल भी नियमों के दायरे में रहकर ही कार्य करें।
न्यूज़ देखो: शिक्षा सेवा है या व्यापार, प्रशासन को तय करना होगा
घाघरा के मकरा गांव में सामने आया यह मामला एक गंभीर सवाल खड़ा करता है कि क्या शिक्षा संस्थान सेवा का माध्यम बने रहेंगे या धीरे-धीरे व्यापार का रूप लेते जाएंगे। यदि अभिभावकों के आरोप सही हैं तो यह न केवल आर्थिक शोषण का मामला है बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल है।
प्रशासन के लिए यह जरूरी है कि इस शिकायत की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निजी स्कूलों में फीस और अन्य शुल्क तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी हो।
यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामलों से आम लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा का अधिकार सुरक्षित रखना हम सभी की जिम्मेदारी
शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव भी। इसलिए जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था पारदर्शी, न्यायसंगत और सभी वर्गों के लिए सुलभ हो।
यदि कहीं शिक्षा के नाम पर अनियमितता या आर्थिक शोषण की शिकायत सामने आती है तो समाज और प्रशासन दोनों को मिलकर उस पर ध्यान देना चाहिए। जागरूक अभिभावक और सक्रिय नागरिक ही व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
यदि आपके क्षेत्र में भी शिक्षा, स्वास्थ्य या किसी सरकारी योजना से जुड़ी कोई समस्या है तो उसे सामने लाना जरूरी है।
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