
#सिमडेगा #लचरागढ़ #कैथोलिक_महिला_संघ : दो दिवसीय अधिवेशन में माताओं ने परिवार, समाज और कानून पर की चर्चा।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ भिखारिएट में कैथोलिक महिला संघ का 29वां दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन 14–15 मार्च 2026 को आयोजित किया गया। इस दौरान विभिन्न पल्ली की माताओं ने परिवार, समाज और धार्मिक मूल्यों से जुड़े विषयों पर चर्चा की। कार्यक्रम में बाइबल पाठ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, क्विज प्रतियोगिता और पेसा कानून पर जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया।
- लचरागढ़ भिखारिएट में 14–15 मार्च को आयोजित हुआ कैथोलिक महिला संघ का 29वां वार्षिक अधिवेशन।
- कार्यक्रम का उद्घाटन रेभ. फा. राजेश केरकेट्टा, सुचिता जोजो और सिस्टर एंजलीना मिंज ने किया।
- अधिवेशन में नौ पल्ली की सभानेत्रियों और सैकड़ों माताओं ने लिया भाग।
- “बच्चों की परवरिश में माता की चुनौतियां और समाधान” विषय पर हुआ विशेष सत्र।
- पेसा कानून पर पुष्पा सेकुंडा टेटे ने ग्राम सभा सशक्तिकरण की जानकारी दी।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम, बाइबल क्विज, झांकी और आराधना के साथ कार्यक्रम सम्पन्न।
सिमडेगा जिले के लचरागढ़ भिखारिएट में कैथोलिक महिला संघ का 29वां दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन बड़े ही उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। 14 और 15 मार्च 2026 को आयोजित इस अधिवेशन में क्षेत्र के विभिन्न पल्ली से आई माताओं ने भाग लेकर सामाजिक, धार्मिक और पारिवारिक विषयों पर विचार-विमर्श किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ 14 मार्च को दोपहर 1 बजे झंडोतोलन और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन समारोह में रेभ. फा. राजेश केरकेट्टा (डीन, लचरागढ़ भिखारिएट), सुचिता जोजो (उपसचिव, पूर्वी क्षेत्रीय कैथोलिक महिला संघ सह सभानेत्री), सिस्टर एंजलीना मिंज (संचालिका, लचरागढ़ भिखारिएट) तथा नौ पल्ली की सभानेत्रियों ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
संत मोनिका को श्रद्धांजलि और बाइबल पाठ
उद्घाटन के बाद संत मोनिका की तस्वीर पर माल्यार्पण और आरती की गई। इसके पश्चात बनो पल्ली की अगुवाई में बाइबल पाठ का आयोजन किया गया। आध्यात्मिक माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम में माताओं ने प्रार्थना और धार्मिक गीतों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की।
पहले सत्र में “बच्चों की परवरिश में माता की चुनौतियां और समाधान” विषय पर श्रीमती सुचिता जोजो ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में बच्चों के पालन-पोषण में कई चुनौतियां सामने आ रही हैं, लेकिन प्रेम, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के माध्यम से माता-पिता इन चुनौतियों का सामना कर सकते हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम और बाइबल क्विज का आयोजन
कार्यक्रम के सांस्कृतिक सत्र में बांकी पल्ली द्वारा बाहा–बाला जादूर नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। इसके साथ ही संत लुकास के सुसमाचार (अध्याय 1–24) पर आधारित बाइबल क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
इस प्रतियोगिता में प्रत्येक पल्ली से पांच प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों ने बाइबल के ज्ञान को और अधिक गहराई से समझने का प्रयास किया।
संध्या समय रोजरी प्रार्थना, पवित्र सैक्रामेंट आराधना और पाप स्वीकार का कार्यक्रम जितुटोली पल्ली की अगुवाई में सम्पन्न हुआ। वहीं बरवाडी पल्ली द्वारा बाइबल झांकी प्रस्तुत की गई, जिसने कार्यक्रम को और भी प्रेरणादायक बना दिया।
दूसरे दिन हुआ पवित्र मिस्सा और अतिथि स्वागत
15 मार्च रविवार की सुबह कार्यक्रम की शुरुआत बेसराजरा पल्ली की माताओं द्वारा आयोजित मनन–चिंतन सत्र से हुई। इसके बाद मुख्य धार्मिक अनुष्ठान समारोही ख्रीस्तयाग (पवित्र मिस्सा) का आयोजन किया गया, जिसका संचालन रेभ. फा. राजेश केरकेट्टा ने किया। मिस्सा के दौरान गीत संचालन लचरागढ़ पल्ली की माताओं ने किया।
नाश्ते के बाद अतिथियों के स्वागत का कार्यक्रम आयोजित हुआ। नरोडेगा के भाई–बहनों ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि जमटोली पल्ली की अगुवाई में सभी पल्ली की सभानेत्रियां झंडे के साथ अतिथियों को सभा स्थल तक लेकर आईं।
पेसा कानून पर दी गई महत्वपूर्ण जानकारी
दूसरे दिन के सत्र में “पेसा कानून” विषय पर पुष्पा सेकुंडा टेटे (सिमडेगा भवन, रांची) ने विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 30 वर्षों के बाद झारखंड में पेसा कानून लागू हुआ है, जो आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि ग्राम सभा का पंजीकरण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि जब तक ग्राम सभा मजबूत नहीं होगी, तब तक गांव का समुचित विकास संभव नहीं है। उन्होंने पारंपरिक ग्राम सभाओं से जल्द से जल्द डीसी कार्यालय में पंजीकरण कराने की अपील की।
प्रेम और सेवा का संदेश
इसके बाद लचरागढ़ पल्ली द्वारा “मैंने तुमको प्रेम किया” विषय पर एक प्रेरणादायक झांकी प्रस्तुत की गई। इसी विषय पर फादर केरोबिम तिर्की (सिमडेगा भवन, रांची) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि ईश्वर की महिमा प्रकट करने में गरीबों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
उन्होंने कहा कि समाज में गरीब और जरूरतमंद लोगों के प्रति संवेदनशील होना ही सच्ची मानवता और ईश्वर की सेवा है।
आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथियों के संदेश, संचालिका का संबोधन और उपसभानेत्री के धन्यवाद ज्ञापन के बाद आशीर्वचन दिया गया। इसके पश्चात संत मोनिका का गीत गाते हुए झंडा उतारकर अधिवेशन का समापन किया गया।
इस अधिवेशन को सफल बनाने में कैथोलिक सभा के समिति सदस्यों और युवा संघ के सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

न्यूज़ देखो: सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता का मंच बना अधिवेशन
लचरागढ़ में आयोजित यह अधिवेशन केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि सामाजिक और कानूनी जागरूकता का भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित हुआ। बच्चों की परवरिश, ग्राम सभा की मजबूती और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे विषयों पर हुई चर्चा समाज के लिए प्रेरणादायक है। ऐसे कार्यक्रम समुदाय को एकजुट करने और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
समाज और परिवार की मजबूती में महिलाओं की अहम भूमिका
किसी भी समाज की असली ताकत उसके परिवार और महिलाओं में होती है। जब महिलाएं जागरूक और सशक्त होती हैं, तब समाज भी मजबूत बनता है।
ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों के प्रति जागरूक करते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में प्रेरित करते हैं।
आप भी ऐसे सामाजिक और प्रेरणादायक कार्यक्रमों की जानकारी दूसरों तक जरूर साझा करें और समाज में जागरूकता फैलाने में अपनी भूमिका निभाएं।






