देवीडीह में आंगनबाड़ी भवन जर्जर, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता — सामुदायिक भवन में चल रहा केंद्र

देवीडीह में आंगनबाड़ी भवन जर्जर, ग्रामीणों में बढ़ी चिंता — सामुदायिक भवन में चल रहा केंद्र

author Shahjeb Ansari
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#देवीडीह #आंगनबाड़ी_समस्या : जर्जर आंगनवाड़ी भवन के कारण बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में, ग्रामीणों ने विभाग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
  • जारी प्रखंड के मेराल पंचायत अंतर्गत देवीडीह गांव का आंगनबाड़ी भवन पूरी तरह जर्जर
  • आंगनबाड़ी सेविका सुनीता लकड़ा ने बताया—पिछले एक साल से सामुदायिक भवन में चल रहा है केंद्र।
  • विभाग को कई बार सूचना देने के बाद भी अब तक कोई अधिकारी नहीं पहुँचा
  • ग्रामीणों ने गर्भवती महिलाओं व छोटे बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए तत्काल नया भवन निर्माण की मांग की।
  • भवन की हालत इतनी खराब कि किसी भी दिन हादसा होने की आशंका।
  • विभाग की चुप्पी को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जारी प्रखंड (गुमला)।
मेराल पंचायत के सुदूरवर्ती देवीडीह गांव में आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। गांव के लोग और आंगनबाड़ी सेविका कई महीनों से विभाग का ध्यान इस ओर खींचने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिर भी वर्तमान आंगनवाड़ी भवन के जर्जर और खतरनाक हालात जस के तस बने हुए हैं। भवन की दीवारें टूट चुकी हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और कई जगहों पर दरारें इतनी बढ़ गई हैं कि ग्रामीणों को किसी भी बड़े हादसे का डर सता रहा है।

आंगनवाड़ी भवन जर्जर, खतरे में मासूम बच्चों की सुरक्षा

देवीडीह का आंगनवाड़ी भवन आज पूरी तरह खंडहर जैसा प्रतीत होता है। चारों तरफ से टूट-फूट इतनी बढ़ चुकी है कि सेविका और सहायिका यहां बच्चों को बैठाने से डरती हैं।
स्थानीय लोग बताते हैं कि बारिश के दिनों में भवन का अंदरूनी हिस्सा और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। दीवारों से पानी रिसता है, छत से टुकड़े गिरते हैं और फर्श उखड़ चुका है। ग्रामीण मानते हैं कि यदि किसी दिन भवन ढह गया, तो दुर्घटना बहुत गंभीर हो सकती है।

सामुदायिक भवन बना सहारा, लेकिन समस्याएँ यहीं खत्म नहीं

भवन की खराब हालत को देखते हुए पिछले एक वर्ष से आंगनवाड़ी गतिविधियाँ गांव के सामुदायिक भवन में संचालित की जा रही हैं। लेकिन सामुदायिक भवन भी स्थायी समाधान नहीं है। वहाँ जगह की कमी रहती है, अन्य गतिविधियों के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं को असुविधा होती है और कभी–कभी केंद्र बाधित भी हो जाता है।

आंगनवाड़ी सेविका सुनीता लकड़ा ने कहा: “भवन इतना कमजोर हो गया है कि बच्चों को वहां बैठाना जोखिम भरा है। पिछले एक साल से हम सामुदायिक भवन में काम चला रहे हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है। विभाग को कई बार बताया, फिर भी अब तक कोई अधिकारी देखने नहीं आया।”

विभाग को मिली सूचना, लेकिन कार्रवाई नदारद

देवीडीह गांव के ग्रामीणों और सेविका ने कई बार विभागीय अधिकारियों को भवन की मरम्मत और नए निर्माण की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे लगातार जानकारी दे रहे हैं, तस्वीरें भेज रहे हैं और आवेदन कर रहे हैं, फिर भी अब तक कोई अधिकारी गांव का निरीक्षण करने नहीं पहुँचा। यह लापरवाही ग्रामीणों को खटक रही है और विभाग की जिम्मेदारियों पर सवाल उठा रही है।

ग्रामीणों ने उठाई आवाज—नया भवन या सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था बने प्राथमिकता

स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र गांव के छोटे बच्चों, किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के लिए बेहद आवश्यक जगह है।
यहां पोषण कार्यक्रम, टीकाकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता जैसी कई गतिविधियाँ संचालित होती हैं। ऐसे में जर्जर भवन इस पूरे सिस्टम को प्रभावित कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि या तो तुरंत नया भवन निर्माण कराया जाए या फिर अस्थायी, लेकिन सुरक्षित संरचना उपलब्ध कराई जाए ताकि केंद्र की गतिविधियाँ बिना किसी जोखिम के चल सकें।

एक ग्रामीण ने कहा: “हमारे बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे जरूरी है। विभाग को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए, लेकिन अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। यह चिंता का विषय है।”

बच्चे और महिलाएं झेल रहे परेशानी—भविष्य पर असर की आशंका

आंगनवाड़ी केंद्र की सेवाएँ बाधित होने से बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा पर असर पड़ रहा है।
सहायिका और सेविका बताती हैं कि सामुदायिक भवन में जगह कम होने से बच्चों के खेल उपकरण, मिड-डे मील वितरण और बैठने की उचित व्यवस्था करने में कठिनाई होती है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य परामर्श और पोषण कार्यक्रम के दौरान पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है।

यह स्थिति ग्रामीण बच्चों के समग्र विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

देवीडीह गांव के लोग इस बात से निराश हैं कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विभाग की प्रतिक्रिया शून्य है। आंगनवाड़ी केंद्र की स्थिति एक दिन में जर्जर नहीं हुई; वर्षों से भवन कमजोर होता जा रहा था, लेकिन समय रहते मरम्मत न होने से समस्या अब गंभीर स्तर पर पहुंच चुकी है।

ग्रामीण अब उम्मीद कर रहे हैं कि मीडिया में मुद्दा उठने के बाद प्रशासन हरकत में आएगा और जल्द कार्रवाई होगी।

न्यूज़ देखो: बच्चों के अधिकारों से जुड़ी लापरवाही चिंताजनक

देवीडीह का मुद्दा यह याद दिलाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत ढांचा आज भी कितना उपेक्षित है। आंगनवाड़ी प्रणाली बच्चों के पोषण और शिक्षा के लिए बनायी गई है, लेकिन भवनों की दुर्दशा इस व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
यह मामला प्रशासनिक उदासीनता का संकेत भी है, जिसे सुधारना समय की मांग है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार और विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

सुरक्षित भविष्य के लिए जागरूकता और जिम्मेदारी का समय

एक जर्जर भवन में बच्चों का होना किसी भी समाज के लिए चिंता की बात है। हमें यह समझना होगा कि बच्चों की सुरक्षा, पोषण और शिक्षा दीर्घकालीन विकास की नींव हैं। ग्रामीणों की आवाज़ को मजबूत बनाना, विभाग तक पहुंचाना और समाधान तक साथ खड़े रहना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।

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Written by

जारी, गुमला

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