#पलामू #उर्स_महोत्सव : मजार पर चादरपोशी और कव्वाली से गूंजा पूरा इलाका
पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत बेड़मा बभनडी गांव में हजरत मकदुम सैयद अब्दुल लतीफ शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर दो दिवसीय सालाना उर्स का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कव्वाली मुकाबला मुख्य आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं ने चादरपोशी कर अमन-चैन की दुआ मांगी। आयोजन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हुए।
- बेड़मा बभनडी गांव में दो दिवसीय सालाना उर्स संपन्न।
- टाईगर कुमार, आयशा सिंह किन्नर ने फीता काटकर किया उद्घाटन।
- मजार पर चादरपोशी कर मांगी गई शांति और भाईचारे की दुआ।
- कव्वाली मुकाबले में शरीफ परवाज और शिवा परवीन की शानदार प्रस्तुति।
- बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की सहभागिता।
पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित बेड़मा बभनडी गांव में हजरत मकदुम सैयद अब्दुल लतीफ शाहदाता रहमतुल्लाह अलैह के मजार पर दो दिवसीय सालाना उर्स का भव्य आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक आयोजन में दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन समाजसेवी टाईगर कुमार, पूर्व मेयर प्रत्याशी आयशा सिंह किन्नर, जिला परिषद सदस्य फजायल अहमद एवं सदर थाना के एएसआई समाल अहमद सहित अन्य गणमान्य लोगों ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। उद्घाटन से पूर्व मुख्य अतिथि टाईगर कुमार का उर्स कमिटी द्वारा गमछा, पगड़ी और माला पहनाकर भव्य स्वागत किया गया।
चादरपोशी और दुआओं का दौर
उर्स के दौरान श्रद्धालुओं ने मजार पर चादरपोशी कर क्षेत्र में अमन-चैन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी। पूरे आयोजन स्थल पर धार्मिक आस्था और सूफियाना माहौल देखने को मिला।
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बाबा की दरगाह में हाजिरी लगाकर अपने परिवार और समाज की खुशहाली की कामना की।
कव्वाली मुकाबला बना मुख्य आकर्षण
उर्स के मौके पर आयोजित कव्वाली मुकाबला कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा। इसमें मशहूर कव्वाल शरीफ परवाज और कव्वाला शिवा परवीन के बीच शानदार मुकाबला देखने को मिला।
दोनों कलाकारों ने एक से बढ़कर एक सूफियाना कलाम पेश कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। “सूफी संगीत” की मधुर धुनों पर दर्शक झूम उठे और देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लेते रहे।
सौहार्द और भाईचारे का संदेश
इस अवसर पर समाजसेवी टाईगर कुमार ने कहा,
“बाबा की दरगाह से कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। यहां हर किसी की मुराद पूरी होती है।”
उन्होंने उर्स कमिटी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के धार्मिक आयोजन समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करते हैं।
बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी
कार्यक्रम में अबुल अंसारी, कलाम अंसारी, सैयद अंसारी, विनोद चौधरी, अयूब अंसारी, ग्यासुदीन अंसारी, मजलुम अंसारी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। साथ ही बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु भी आयोजन में शामिल हुए।
दो दिनों तक चले इस उर्स महोत्सव में धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक रंग भी देखने को मिला, जिससे पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा।
न्यूज़ देखो: परंपरा और सौहार्द का संगम
बेड़मा बभनडी का यह उर्स महोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, भाईचारा और पारस्परिक सम्मान को बढ़ावा देते हैं। आज के दौर में इन परंपराओं को बनाए रखना बेहद जरूरी है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
मिलजुल कर ही बनता है मजबूत समाज
धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज को जोड़ने का काम करते हैं।
हमें इन परंपराओं को आगे बढ़ाना चाहिए और एक-दूसरे के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए।
आपसी सौहार्द ही समाज की असली ताकत है।
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