#गढ़वा #नदी_संरक्षण : जनसहभागिता से सरस्वतिया नदी को स्वच्छ और जीवंत बनाने का प्रयास जारी।
गढ़वा में चल रहे “आपन सरस्वतिया” अभियान के तहत लगातार 12वें दिन भी सरस्वतिया नदी की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य जारी रहा। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयास से नदी के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्स्थापित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। अभियान में सामाजिक कार्यकर्ताओं और व्यवसायियों का भी सहयोग मिल रहा है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यह पहल पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है।
- “आपन सरस्वतिया” अभियान के तहत 12वें दिन भी नदी सफाई और डी-सिल्टिंग कार्य जारी रहा।
- नवादा क्षेत्र में गाद, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाया गया।
- सामाजिक कार्यकर्ता रविकांत दुबे ने अभियान को प्रायोजित कर महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
- अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने जनभागीदारी को अभियान की सबसे बड़ी ताकत बताया।
- मेराल क्षेत्र में भी नदी पुनर्जीवन के लिए सफाई अभियान लगातार जारी है।
- विश्व पर्यावरण दिवस पर नदी संरक्षण को लेकर लोगों ने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।
गढ़वा जिले में सरस्वतिया नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के उद्देश्य से चलाया जा रहा “आपन सरस्वतिया” अभियान लगातार गति पकड़ रहा है। प्रशासन और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयास से शुरू हुआ यह अभियान अब एक जनआंदोलन का स्वरूप लेता जा रहा है। शुक्रवार को अभियान के 12वें दिन भी नदी की सफाई और डी-सिल्टिंग का कार्य पूरी सक्रियता के साथ जारी रहा।
नदी के अस्तित्व को बचाने और उसके प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से चल रहे इस अभियान में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी देखने को मिल रही है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लेकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित की।
नवादा क्षेत्र में चला व्यापक सफाई अभियान
अभियान के तहत शुक्रवार को नवादा क्षेत्र में सरस्वतिया नदी की सफाई की गई। नदी के विभिन्न हिस्सों में जमा गाद, प्लास्टिक कचरा और अन्य अपशिष्ट पदार्थों को हटाने का कार्य किया गया।
सफाई अभियान के दौरान स्वयंसेवकों और स्थानीय नागरिकों ने श्रमदान कर नदी क्षेत्र को स्वच्छ बनाने में योगदान दिया। लोगों ने यह भी संकल्प लिया कि नदी में पुनः गंदगी न फैले, इसके लिए जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
नदी की सफाई के साथ-साथ डी-सिल्टिंग कार्य भी किया जा रहा है, जिससे नदी की जलधारण क्षमता बढ़ सके और उसका प्राकृतिक प्रवाह पुनः स्थापित हो सके।
जनभागीदारी से मजबूत हो रहा अभियान
“आपन सरस्वतिया” अभियान की सबसे बड़ी विशेषता इसमें मिल रहा जनसमर्थन है। स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन, व्यवसायी और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर इस अभियान को सफल बनाने में जुटे हुए हैं।
आज के कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता एवं व्यवसायी रविकांत दुबे ने प्रायोजक के रूप में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया। उनके योगदान से अभियान को नई ऊर्जा मिली।
अनुमंडल पदाधिकारी ने उनके सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि समाज के प्रति उत्तरदायित्व और पर्यावरण संरक्षण के लिए इस प्रकार की भागीदारी अनुकरणीय है।
अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा, “आपन सरस्वतिया अभियान अब एक व्यापक जनअभियान बन चुका है। इसकी सफलता का आधार जनभागीदारी है। जब समाज किसी अभियान को अपना मानकर उससे जुड़ता है, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।”
मेराल क्षेत्र में भी जारी है नदी पुनर्जीवन का कार्य
नवादा के साथ-साथ मेराल क्षेत्र में भी सरस्वतिया नदी की सफाई एवं डी-सिल्टिंग का कार्य लगातार जारी है। प्रशासन और स्थानीय नागरिकों के संयुक्त प्रयास से नदी के प्राकृतिक स्वरूप को वापस लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं।
अधिकारियों का मानना है कि यदि यह अभियान निरंतर इसी गति से चलता रहा, तो सरस्वतिया नदी को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य निश्चित रूप से हासिल किया जा सकेगा।
पर्यावरण दिवस पर मिला विशेष संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर अभियान को विशेष महत्व मिला। अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने कहा कि नदी सफाई में योगदान देने वाले सभी लोग वास्तव में पर्यावरण संरक्षक की भूमिका निभा रहे हैं।
संजय कुमार ने कहा, “आज जिन लोगों ने नदी सफाई में भाग लिया है, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का व्यावहारिक उदाहरण प्रस्तुत किया है। केवल भाषणों से नहीं, बल्कि ऐसे कार्यों से पर्यावरण की रक्षा संभव है।”
उन्होंने लोगों से नदी क्षेत्र को स्वच्छ बनाए रखने तथा गंदगी फैलाने वालों के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की भी अपील की।
सभी सहयोगियों के प्रति जताया आभार
अनुमंडल पदाधिकारी ने अभियान में सहयोग देने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यवसायियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सरस्वतिया नदी के पूर्ण पुनर्जीवन तक यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
प्रशासन का मानना है कि यदि लोगों का सहयोग इसी प्रकार मिलता रहा तो यह अभियान गढ़वा जिले में पर्यावरण संरक्षण का एक सफल मॉडल बन सकता है।
न्यूज़ देखो: जनशक्ति से संभव है नदी पुनर्जीवन
सरस्वतिया नदी को बचाने की यह पहल बताती है कि जब प्रशासन और समाज एक साथ आते हैं तो असंभव दिखने वाले कार्य भी संभव हो जाते हैं। वर्षों से उपेक्षित जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए केवल सरकारी योजनाएं ही नहीं, बल्कि जनभागीदारी भी आवश्यक है। “आपन सरस्वतिया” अभियान गढ़वा में पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बन रहा है। अब यह सुनिश्चित करना होगा कि सफाई के बाद नदी पुनः प्रदूषित न हो और इसके संरक्षण की व्यवस्था स्थायी रूप से विकसित की जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
नदी बचेगी तो भविष्य बचेगा
नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि सभ्यता, संस्कृति और जीवन की आधारशिला हैं।
यदि हम अपने जलस्रोतों को बचाने में सफल होते हैं, तो आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य दे सकेंगे।
पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है।
आइए, अपने आसपास की नदियों, तालाबों और जलस्रोतों को स्वच्छ रखने का संकल्प लें।
आप भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी ऐसी पहलों में भाग लें, अपनी राय कमेंट में साझा करें और इस प्रेरक खबर को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाकर जनजागरण का हिस्सा बनें।

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