अनुकंपा नियुक्ति के लिए 10 वर्षों से संघर्षरत दिवंगत जनसेवक की बेटी, मामले को मुख्तार आलम ने गुमला डीसी से उठाने का लिया निर्णय

अनुकंपा नियुक्ति के लिए 10 वर्षों से संघर्षरत दिवंगत जनसेवक की बेटी, मामले को मुख्तार आलम ने गुमला डीसी से उठाने का लिया निर्णय

author News देखो Team
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#गुमला #अनुकंपा_नियुक्ति : दिवंगत जनसेवक मंगरु उरांव की बेटी को न्याय दिलाने हेतु परिवार की व्यथा सुनकर जिलाध्यक्ष ने हर संभव सहायता का भरोसा दिया
  • दिवंगत जनसेवक मंगरु उरांव की पुत्री सरिता तिग्गा को 10 वर्षों से अनुकंपा पर नौकरी नहीं।
  • पीड़ित परिवार ने असंगठित कामगार कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुख्तार आलम से लगाई गुहार।
  • जिलाध्यक्ष ने कहा—डीसी से मिलकर अनुकंपा नियुक्ति का मामला मजबूती से उठाया जाएगा।
  • परिवार के बेबस और आर्थिक रूप से कमजोर होने की जानकारी अधिकारियों तक पहुँचाने की तैयारी।
  • मिलने वालों में रतिया उरांव, चामो देवी, विशेश्वर मांझी समेत कई ग्रामीण शामिल।

गुमला: दस साल पहले दिवंगत हुए सरकारी जनसेवक मंगरु उरांव की 24 वर्षीय पुत्री सरिता तिग्गा आज भी अनुकंपा नियुक्ति की प्रतीक्षा में परेशानियों का सामना कर रही हैं। गुमला प्रखंड के कूल्ही बरटोली की रहने वाली सरिता तिग्गा अपने परिवार के साथ कई बार आवेदन, दौड़-भाग और अधिकारियों के चक्कर लगा चुकी हैं, लेकिन अभी तक किसी प्रकार की नियुक्ति नहीं मिल पाई है। परिवार अब पूरी तरह निराश और हताश हो चुका है।

परिवार ने सुनाई पीड़ा, उठाया मदद का मुद्दा

मंगलवार को सरिता तिग्गा के परिवार ने असंगठित कामगार कांग्रेस के जिलाध्यक्ष सह 20 सूत्री सदस्य मुख्तार आलम से मुलाकात कर अपनी स्थिति बताई। परिवार के सदस्यों ने कहा कि वर्षों से प्रयास के बावजूद उन्हें कोई सहयोग नहीं मिला है। परिजनों ने निवेदन किया कि — “सरिता तिग्गा को उनका हक मिलना चाहिए, अन्यथा परिवार के सामने जीवन-यापन की समस्या खड़ी हो जाएगी।”

परिवार की परेशानियाँ सुनने के बाद मुख्तार आलम ने उन्हें भरोसा देते हुए कहा कि वे इस मामले को प्राथमिकता से उठाएँगे और गुमला उपायुक्त महोदया से सीधे मुलाकात कर स्थिति से अवगत कराएँगे। उन्होंने कहा कि सरिता को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने के लिए वे “हर संभव पहल करेंगे और मामले को पार्टी के उच्च पदाधिकारियों तक भी पहुँचाएँगे।”

दस वर्षों की प्रतीक्षा—अब तक क्यों नहीं मिली नियुक्ति?

जानकारी के अनुसार, जनसेवक रहे मंगरु उरांव का निधन लगभग 10 वर्ष पूर्व हुआ था। इसके बावजूद उनके परिवार को अभी तक अनुकंपा में नौकरी नहीं मिली। इसमें देरी के कारण परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। सरकारी व्यवस्था की धीमी प्रक्रियाओं एवं विभागीय चूक को लेकर परिवार ने कई बार चिंता जताई है, लेकिन निष्कर्ष निकलता नहीं दिखा।

जिला स्तर पर हस्तक्षेप की उम्मीद

मुख्तार आलम ने कहा कि प्रशासन से औपचारिक वार्ता कर पूरा मामला स्पष्ट कराया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि जिला प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए सरिता तिग्गा को शीघ्र राहत देगा। उन्होंने कहा—

“सरिता को उसका हक दिलाने हेतु हम हर स्तर पर प्रयास करेंगे, ताकि परिवार को राहत मिल सके।”

कौन-कौन थे मौजूद

परिवार की ओर से रतिया उरांव, चामो देवी, विशेश्वर मांझी, बुद्धिमान भगत, सत्येंद्र तिग्गा, पार्वती तिग्गा मौजूद रहे और सभी ने मिलकर इस मुद्दे पर कार्रवाई की माँग की।

न्यूज़ देखो: न्याय की उम्मीद में एक परिवार

अनुकंपा नियुक्ति जैसे मामलों में वर्षों की देरी यह दर्शाती है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अभी भी कई सुधारों की आवश्यकता है। सरिता तिग्गा के मामले में जिला स्तर पर पहल होने से उम्मीद जागी है कि परिवार को राहत मिलेगी। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

मिलकर करें न्याय की आवाज बुलंद

अनुकंपा नियुक्ति में देरी पर सजग रहें।
जरूरतमंद परिवारों को जानकारी और सहयोग दिलाएँ।
समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाएँ ताकि समाधान हो सके।
यदि आप न्याय की इस पहल का समर्थन करते हैं, तो खबर साझा करें और अपनी राय कमेंट में दर्ज करें।

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