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उसरी बचाव अभियान से बदली तस्वीर, 2026 में छिलका डैम निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद

#गिरिडीह #उसरी_नदी : सर्वे शुरू, 4000 पौधरोपण योजना तय, शास्त्री नगर–सिहोडीह पुल को लेकर पहल।

गिरिडीह में उसरी नदी को संरक्षित करने के लिए चल रहे उसरी बचाव अभियान का असर अब ज़मीनी स्तर पर दिखने लगा है। भाकपा माले नेता राजेश सिन्हा ने बताया कि छिलका डैम निर्माण को लेकर विभागीय स्तर पर इंटरनल सर्वे शुरू हो चुका है और वर्ष 2026 में निर्माण प्रक्रिया प्रारंभ होने की उम्मीद है। राज्य सरकार ने इस परियोजना पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान जताया है। नदी के किनारे वृक्षारोपण और पुल निर्माण जैसी योजनाएं भी इस अभियान की उपलब्धियों के रूप में सामने आ रही हैं।

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  • छिलका डैम निर्माण को लेकर विभागीय इंटरनल सर्वे शुरू।
  • वर्ष 2026 में डैम निर्माण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद।
  • परियोजना पर राज्य सरकार द्वारा लगभग 4 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान।
  • उसरी नदी किनारे 4000 पेड़ लगाने की योजना तय।
  • पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष तिवारी की सक्रिय भूमिका।
  • शास्त्री नगर–सिहोडीह पुल निर्माण को लेकर प्रशासनिक पहल।

गिरिडीह जिले की जीवनरेखा मानी जाने वाली उसरी नदी को बचाने के लिए वर्षों से चल रहा जन आंदोलन अब ठोस नतीजों की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। उसरी बचाव अभियान के तहत उठाई गई आवाजें, किए गए प्रयास और निरंतर दबाव का असर अब प्रशासनिक और सरकारी स्तर पर स्पष्ट दिखने लगा है। भाकपा माले के गिरिडीह नेता राजेश सिन्हा ने प्रेस को संबोधित करते हुए इस पूरे अभियान की प्रगति और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की।

उसरी बचाव अभियान की पृष्ठभूमि

राजेश सिन्हा ने बताया कि उसरी नदी के संरक्षण के लिए अभियान के तहत अब तक आवाज उठाने, जन प्रयास, महोत्सव, प्रेस कॉन्फ्रेंस, जन सहयोग, धरना और सांकेतिक पदयात्रा जैसे कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन सभी गतिविधियों का उद्देश्य प्रशासन और सरकार का ध्यान उसरी नदी की बदहाल स्थिति और उसके संरक्षण की आवश्यकता की ओर आकर्षित करना था। उन्होंने कहा कि लगातार जन दबाव और लोकतांत्रिक तरीकों से किए गए आंदोलन का ही परिणाम है कि आज योजनाएं कागज से निकलकर जमीन पर आती दिख रही हैं।

छिलका डैम निर्माण को लेकर बड़ा अपडेट

राजेश सिन्हा ने जानकारी दी कि छिलका डैम निर्माण को लेकर संबंधित विभागों द्वारा इंटरनल सर्वे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह सर्वे परियोजना के तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं का आकलन करने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि सब कुछ योजना के अनुसार चला, तो वर्ष 2026 में डैम निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पहले ही इस परियोजना पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च का अनुमान सार्वजनिक कर चुकी है। यह डैम न सिर्फ उसरी नदी के जल संरक्षण में मदद करेगा, बल्कि आसपास के इलाकों में जलस्तर सुधार, सिंचाई और पर्यावरण संतुलन में भी अहम भूमिका निभाएगा।

सीसीएल की पूर्व पहल और आगे की उम्मीद

राजेश सिन्हा ने यह भी बताया कि सीसीएल गिरिडीह द्वारा शुरुआती दौर में, तत्कालीन जीएम बासब चौधरी के कार्यकाल में, लगभग दो करोड़ रुपये के प्रयास किए गए थे। यह राशि प्रशासन और सरकार के खाते में भेजी गई होगी। उन्होंने कहा कि अब उम्मीद है कि आने वाले समय में टेंडर प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी, ताकि कार्य धरातल पर उतर सके।

गुणवत्ता से समझौता नहीं, संघर्ष रहेगा जारी

राजेश सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अनुरूप नहीं होता है, तो उसे बेहतर कराने के लिए संघर्ष किया जाएगा।
उन्होंने कहा:

राजेश सिन्हा ने कहा: “उसरी बचाव अभियान पहले भी जनहित के मुद्दों पर मजबूती से खड़ा रहा है और आगे भी रहेगा।”

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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन की भूमिका जन मुद्दों पर आवाज उठाने की होती है, जबकि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रशासन और सरकार द्वारा किया जाता है। इस क्रम में उन्होंने नगर विकास मंत्री की पहल को सराहनीय बताया।

उसरी नदी किनारे वृक्षारोपण की व्यापक योजना

उसरि नदी के संरक्षण को लेकर एक और महत्वपूर्ण कदम के रूप में लगभग 4000 पेड़ लगाने की योजना तय की गई है। इस वृक्षारोपण अभियान में वन विभाग सक्रिय रूप से जुटा हुआ है।
पूर्वी वन प्रमंडल के डीएफओ मनीष तिवारी द्वारा इस दिशा में विशेष प्रयास किए गए हैं। मंत्री और डीएफओ के सामूहिक प्रयास से यह वृक्षारोपण पचंबा क्षेत्र से शुरू होकर दुखिया महादेव से पहले तक किया जाएगा। इससे न केवल नदी के किनारे हरियाली बढ़ेगी, बल्कि कटाव रोकने और जैव विविधता को भी बल मिलेगा।

शास्त्री नगर–सिहोडीह पुल निर्माण की पहल

राजेश सिन्हा ने बताया कि शास्त्री नगर से सिहोडीह के बीच पुल निर्माण को लेकर भी पहल की गई है। यह पुल स्थानीय लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांग है। पुल के निर्माण से आवागमन सुगम होगा और दोनों क्षेत्रों के बीच सामाजिक व आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस दिशा में शीघ्र ठोस कार्रवाई देखने को मिलेगी।

जन आंदोलन को और मजबूत करने की अपील

अपने बयान के अंत में राजेश सिन्हा ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों से अपील की कि उसरी नदी जीवनदायिनी है और इससे जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि नदी का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

न्यूज़ देखो: उसरी बचाव अभियान से जन दबाव की ताकत उजागर

यह खबर दिखाती है कि संगठित और निरंतर जन आंदोलन किस तरह प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय करने में भूमिका निभाता है। उसरी बचाव अभियान ने यह साबित किया है कि पर्यावरण और जनहित के मुद्दों पर आवाज उठाने से ठोस नीतिगत निर्णय संभव हैं। अब देखना होगा कि घोषित योजनाएं तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरी होती हैं या नहीं। प्रशासन और सरकार की हर कार्रवाई पर निगरानी जरूरी है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

नदी बचेगी तो भविष्य सुरक्षित रहेगा

उसरी नदी केवल जलधारा नहीं, बल्कि हजारों लोगों के जीवन और आजीविका से जुड़ी हुई है।
आज जरूरत है कि हम विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन को समझें।
एक जागरूक नागरिक के रूप में नदी संरक्षण के प्रयासों में अपनी भागीदारी निभाएं।
आपकी एक आवाज भी बदलाव की बड़ी वजह बन सकती है।
इस खबर पर अपनी राय कमेंट करें, इसे साझा करें और उसरी नदी बचाने के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।

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Saroj Verma

दुमका/देवघर

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