मधुबन में मजदूर दिवस पर गूंजा हल्ला बोल, रैली और सभा में सरकार की नीतियों पर उठे सवाल

मधुबन में मजदूर दिवस पर गूंजा हल्ला बोल, रैली और सभा में सरकार की नीतियों पर उठे सवाल

author Surendra Verma
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#मधुबनगिरिडीह #मजदूरदिवस_सभा : हटिया मैदान में झंडोत्तोलन के बाद रैली—सैकड़ों लोगों की भागीदारी।

मधुबन के हटिया मैदान में मजदूर दिवस के अवसर पर असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के बैनर तले आम सभा और रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीदों को श्रद्धांजलि और झंडोत्तोलन से हुई, जिसके बाद मधुबन बाजार में रैली निकाली गई। सभा में नेताओं ने मजदूरों, किसानों और बेरोजगारों के मुद्दों को उठाते हुए एकजुट होकर संघर्ष का आह्वान किया। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और कार्यकर्ता इसमें शामिल हुए।

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  • हटिया मैदान, मधुबन में आम सभा और झंडोत्तोलन।
  • शहीद बेदी पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी गई।
  • मधुबन बाजार में सैकड़ों लोगों की रैली निकाली गई।
  • कार्यक्रम में पूरण महतो, कन्हाई पाण्डेय, अजीत राय, अशोक पासवान, राजेश सिन्हा समेत कई नेता शामिल।
  • मजदूरों के अधिकार और लेबर कोड पर उठे सवाल।
  • मजदूर, किसान, छात्र और महिलाओं को एकजुट होने का आह्वान

मजदूर दिवस के सप्ताह भर चल रहे कार्यक्रमों के तहत मंगलवार को मधुबन में असंगठित मजदूर मोर्चा और भाकपा माले के नेतृत्व में एक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया गया। हटिया मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में सबसे पहले शहीद बेदी पर माल्यार्पण कर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद झंडोत्तोलन कर सभा की शुरुआत की गई और मधुबन बाजार में रैली निकाली गई, जिसमें सैकड़ों मजदूर, किसान और स्थानीय लोग शामिल हुए।

रैली और सभा का आयोजन

कार्यक्रम की शुरुआत हटिया मैदान से हुई, जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं ने शहीदों को याद किया। इसके बाद लाल झंडों और नारों के साथ मधुबन बाजार में रैली निकाली गई। रैली के दौरान मजदूरों के अधिकारों से जुड़े नारे लगाए गए और एकजुटता का संदेश दिया गया।

इस आयोजन को सफल बनाने में द्वारिका राय, बसंत कर्मकार, हराधन तुरी, सूरज तुरी, मंसू हांसदा, योगेश्वर महतो, परशुराम महतो, रेशमी देवी, धर्मी देवी, सोहन महतो, चिरंजीवी महतो, लक्ष्मण महतो, चरण महतो, मंगर बास्के, मनोहर महतो, जागेश्वर महतो सहित कई कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका रही।

अशोक पासवान का बयान

भाकपा माले के जिला सचिव अशोक पासवान ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट होना जरूरी है।

अशोक पासवान ने कहा: “मजदूरों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा, तभी उनकी लड़ाई मजबूत होगी।”

उन्होंने मजदूर दिवस के इतिहास और शिकागो आंदोलन का उल्लेख करते हुए शहीदों के बलिदान को याद किया।

अजीत राय और कन्हाई पांडेय का आह्वान

असंगठित मजदूर मोर्चा के नेता अजीत राय ने मजदूरों, किसानों, छात्रों, महिलाओं और बेरोजगारों को एकजुट होने का आह्वान किया।

अजीत राय ने कहा: “मजदूर, किसान, असंगठित मजदूर, छात्र, बेरोजगार और महिलाएं एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज बुलंद करें।”

मोर्चा के नेता कन्हाई पांडेय ने भी संगठन के विस्तार और मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास की आवश्यकता बताई।

अन्य नेताओं के विचार

माले के वरिष्ठ नेता पूरन महतो ने कहा कि मजदूरों और किसानों को लाल झंडे के साथ जुड़कर अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना चाहिए।
माले नेता राजेश सिन्हा ने कहा कि क्षेत्र के विकास और मजदूरों के हितों की अनदेखी करने वालों को पहचानने की जरूरत है।

राजेश सिन्हा ने कहा: “मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करने वाली नीतियों के खिलाफ एकजुट संघर्ष जरूरी है।”

कार्यक्रम में मौजूद लोग

इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। इनमें प्रमुख रूप से नागेश्वर महतो, चुन्नू तबारक, मसूदन कोल, लखन कोल, भीम कोल, दिलचंद कोल, धनेश्वर कोल, राजन तुरी, प्रसादी राय, चंदन टुडू, सकलदेव कोल, धूम्मा टुडू, गुलाब कोल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

मजदूर आंदोलन का संदेश

इस कार्यक्रम के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों, संगठन की मजबूती और सामाजिक न्याय के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं ने कहा कि जब तक मजदूर, किसान और अन्य वर्ग एकजुट नहीं होंगे, तब तक उनके अधिकारों की रक्षा संभव नहीं है।

न्यूज़ देखो: एकजुटता से ही मजबूत होगा संघर्ष

मधुबन में आयोजित यह कार्यक्रम यह दर्शाता है कि मजदूर वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर जागरूक हो रहा है और संगठित प्रयास कर रहा है। नेताओं द्वारा उठाए गए मुद्दे स्थानीय स्तर की वास्तविकताओं को सामने लाते हैं, लेकिन इनका समाधान तभी संभव है जब संघर्ष लगातार जारी रहे। प्रशासन और सरकार को इन आवाजों को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाने होंगे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

अधिकारों की लड़ाई में बनें सहभागी

मजदूर दिवस केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का संकल्प है। जब समाज के सभी वर्ग एकजुट होते हैं, तभी बदलाव की दिशा बनती है।

आप भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें और समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए आगे आएं।
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Written by

डुमरी, गिरिडीह

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