
#सिमडेगा #शिक्षक_प्रशिक्षण : दो दिवसीय प्रशिक्षण में शिक्षकों को आधुनिक शिक्षा तकनीकों की जानकारी दी गई।
सिमडेगा के डायट परिसर में नव नियुक्त सहायक आचार्यों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 से 20 मार्च 2026 तक आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण में जिले के 145 शिक्षकों ने भाग लेकर आधुनिक शिक्षण पद्धति और विद्यालय प्रबंधन से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम जिला शिक्षा अधीक्षक सह प्राचार्य दीपक राम के निर्देशन में संपन्न हुआ। इसका उद्देश्य शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सक्षम बनाना था।
- डायट सिमडेगा में 19–20 मार्च को प्रशिक्षण आयोजित।
- 145 नव नियुक्त सहायक आचार्य हुए शामिल।
- दीपक राम के निर्देशन में कार्यक्रम संपन्न।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, FLN, MDM पर प्रशिक्षण।
- रचनात्मक शिक्षण विधियों पर विशेष जोर।
सिमडेगा स्थित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में नव नियुक्त सहायक आचार्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस प्रशिक्षण में जिले भर से आए 145 शिक्षकों ने भाग लिया और विभिन्न शैक्षणिक विषयों पर गहन जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों और विद्यालय प्रबंधन के प्रति जागरूक करना था।
प्रशिक्षण का उद्देश्य और स्वरूप
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 19 मार्च 2026 से प्रारंभ होकर 20 मार्च 2026 को संपन्न हुआ। इसमें शिक्षकों को शिक्षा के विभिन्न आयामों से अवगत कराया गया, ताकि वे अपने विद्यालयों में बेहतर शिक्षण वातावरण तैयार कर सकें।
प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय संचालन, दस्तावेजीकरण, मध्याह्न भोजन (MDM) के प्रभावी संचालन, विभिन्न शैक्षणिक एप्स के उपयोग, फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरसी (FLN), राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, स्कूल मैनेजमेंट, विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) और लर्निंग आउटकम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
मॉर्निंग असेंबली से हुई शुरुआत
प्रशिक्षण के पहले दिन की शुरुआत मॉर्निंग असेंबली के साथ हुई, जिसके बाद परिचय सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र में शिक्षकों को एक-दूसरे से परिचित कराया गया और प्रशिक्षण के उद्देश्य को स्पष्ट किया गया।
दीपक राम का प्रेरक संबोधन
परिचय सत्र में जिला शिक्षा अधीक्षक सह प्राचार्य दीपक राम ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए उनकी भूमिका और जिम्मेदारियों को रेखांकित किया।
दीपक राम ने कहा: “शिक्षक राष्ट्र के निर्माता होते हैं और उनकी जिम्मेदारी केवल पढ़ाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास से भी जुड़ी होती है।”
उन्होंने शिक्षकों से पठन-पाठन को प्रभावी ढंग से संचालित करने, विद्यालय में सकारात्मक और आकर्षक वातावरण बनाने तथा बच्चों को सीखने के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने एसएमसी समिति एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विद्यालय को बच्चों के अनुकूल बनाने की आवश्यकता बताई।
रचनात्मक शिक्षण पद्धति पर विशेष जोर
प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि शिक्षा को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रखना चाहिए। खेल, कहानी, कविता और चित्रांकन जैसे रचनात्मक तरीकों के माध्यम से बच्चों को सरल और रोचक ढंग से पढ़ाया जा सकता है।
शिक्षकों को यह भी समझाया गया कि वे बच्चों की रुचि और समझ के अनुसार शिक्षण विधि अपनाएं, जिससे उनका समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई अनुभवी शिक्षकों और विशेषज्ञों ने सुगमकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाई। इनमें राष्ट्रपति सम्मान प्राप्त शिक्षक स्मिथ कुमार सोनी, अभिषेक रंजन, सुमित कुमार सिन्हा, ब्राह्मदत्त नायक शामिल रहे।
इसके अलावा डायट के संकाय सदस्य सुनील कुमार गुप्ता, अनिल कुमार एवं कंचन मंगला किंडो ने भी प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। सभी विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षकों को व्यावहारिक और प्रभावी शिक्षण के तरीके बताए।
शिक्षकों में दिखा उत्साह
प्रशिक्षण में भाग लेने वाले शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ सत्रों में भाग लिया। उन्होंने विभिन्न विषयों पर अपने अनुभव साझा किए और नई-नई शिक्षण तकनीकों को सीखने में रुचि दिखाई।
इस प्रकार का प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल शिक्षकों के ज्ञान को बढ़ाता है, बल्कि उन्हें अपने कार्य के प्रति और अधिक प्रेरित भी करता है।
न्यूज़ देखो: बेहतर शिक्षा के लिए मजबूत पहल
सिमडेगा में आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। जब शिक्षक प्रशिक्षित और जागरूक होंगे, तभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सकेगी। हालांकि, यह भी जरूरी है कि इस प्रशिक्षण का प्रभाव जमीनी स्तर पर देखने को मिले और इसे नियमित रूप से जारी रखा जाए। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
शिक्षा से ही बनेगा मजबूत भविष्य
एक अच्छा शिक्षक ही एक मजबूत समाज की नींव रखता है। ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को नई ऊर्जा और दिशा प्रदान करते हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्जवल बनता है।
आइए, हम भी शिक्षा के महत्व को समझें और अपने आसपास के स्कूलों में सकारात्मक बदलाव के लिए सहयोग करें।
अपनी राय कमेंट में जरूर साझा करें, इस खबर को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाएं और शिक्षा के इस प्रयास को मजबूत बनाने में अपनी भागीदारी निभाएं।






