#खूंटी #महिला_सुरक्षा : दो अलग-अलग मामलों में त्वरित कार्रवाई कर आरोपियों को भेजा गया जेल।
खूंटी जिले में दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में नाबालिग आदिवासी लड़कियों के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। पुलिस ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए छह घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एसपी ऋषभ गर्ग के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने कार्रवाई करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
- तोरपा और कर्रा थाना क्षेत्र में नाबालिग लड़कियों से दुष्कर्म के मामले सामने आए।
- शादी का झांसा देकर एक 14 वर्षीय लड़की का किया गया यौन शोषण।
- पीड़िता गर्भवती हुई, प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत।
- दोनों मामलों में पुलिस ने महज 6 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार किया।
- आरोपियों पर BNS और POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज।
- एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस वार्ता कर कार्रवाई की जानकारी दी।
खूंटी जिले से इंसानियत को शर्मसार करने वाली दो घटनाएं सामने आई हैं, जहां दो नाबालिग आदिवासी बेटियों को हवस का शिकार बनाया गया। दोनों घटनाओं के बाद जिले में आक्रोश और चिंता का माहौल है। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पुलिस अधीक्षक ऋषभ गर्ग के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने दोनों मामलों में तेजी से कार्रवाई की। पुलिस का कहना है कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों पर जिले में सख्त निगरानी रखी जा रही है।
शादी का झांसा देकर नाबालिग का यौन शोषण
पहला मामला तोरपा थाना क्षेत्र के उयुर गांव का है। यहां एक 14 वर्षीय नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर उसका यौन शोषण किया गया। लंबे समय तक चले इस शोषण के कारण पीड़िता गर्भवती हो गई।
बताया गया कि प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई, जिसके बाद मामला और गंभीर हो गया। पीड़िता की लिखित शिकायत पर पुलिस ने 22 मई 2026 को तोरपा थाना कांड संख्या-29/26 दर्ज किया।
इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-69 और पॉक्सो एक्ट की धारा-4 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
कर्रा थाना क्षेत्र में भी नाबालिग से दुष्कर्म
दूसरा मामला कर्रा थाना क्षेत्र के तस्की कठरटोली गांव का है। यहां भी एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म की घटना सामने आई।
पीड़िता के परिजनों की शिकायत के आधार पर पुलिस ने कर्रा थाना कांड संख्या-38/26 दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ BNS की धारा-64(i)/96/351(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा-4/6 के तहत मामला दर्ज किया गया।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने 6 घंटे में दोनों आरोपियों को पकड़ा
खूंटी एसपी ऋषभ गर्ग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि दोनों मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया गया। उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही संबंधित डीएसपी और थाना प्रभारियों को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया गया था।
कर्रा थाना क्षेत्र के मामले में आरोपी संतोष महली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। वहीं तोरपा थाना क्षेत्र के मामले में आरोपी नित्यानंद कुमार को कोरला क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
एसपी ऋषभ गर्ग ने कहा: “दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।”
आदिवासी क्षेत्रों में सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता
इन घटनाओं ने आदिवासी इलाकों में महिलाओं और नाबालिग बच्चियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सामाजिक दबाव के कारण कई मामले सामने नहीं आ पाते, जिससे पीड़ितों को लंबे समय तक न्याय नहीं मिल पाता।
सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पीड़ित परिवारों को सामाजिक, मानसिक और कानूनी सहायता भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
पॉक्सो एक्ट के तहत होगी सख्त कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि दोनों मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। यह कानून नाबालिग बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को रोकने के लिए बनाया गया है और इसके तहत दोषियों को कड़ी सजा का प्रावधान है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिश
दोनों मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को राहत मिली है। हालांकि समाज में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए सामूहिक जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों, पंचायतों और गांव स्तर पर बाल सुरक्षा और महिला सम्मान को लेकर लगातार अभियान चलाए जाने चाहिए ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
न्यूज़ देखो: बेटियों की सुरक्षा केवल कानून नहीं, समाज की जिम्मेदारी भी
खूंटी की ये घटनाएं केवल अपराध नहीं बल्कि सामाजिक चेतावनी हैं। नाबालिग आदिवासी बेटियों के साथ हो रहे अपराध यह दिखाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और जागरूकता को और मजबूत करने की जरूरत है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज, परिवार और प्रशासन सभी को मिलकर काम करना होगा। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक समाज ही बेटियों को सुरक्षित भविष्य दे सकता है
हर बच्ची को सुरक्षित बचपन और सम्मानजनक जीवन मिलना चाहिए। अगर समाज चुप रहेगा तो अपराधियों का मनोबल बढ़ेगा। इसलिए अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी खबरों को गंभीरता से लें, जागरूकता फैलाएं और जरूरत पड़ने पर तुरंत प्रशासन को सूचना दें। खबर को शेयर करें, अपनी राय कमेंट करें और बेटियों की सुरक्षा के लिए समाज को जागरूक बनाने में भागीदार बनें।

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