#सिमडेगा #समितिपुनर्गठन #बोलबा : सर्वसम्मति से वनदुर्गा पूजा समिति के नए पदाधिकारियों का चयन किया गया।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड में प्रसिद्ध वनदुर्गा पूजा समिति का सर्वसम्मति से पुनर्गठन किया गया। इस दौरान ललन रौतिया को अध्यक्ष और जगरनाथ रौतिया को सचिव चुना गया। निवर्तमान अध्यक्ष जहुरण रौतिया ने व्यक्तिगत असमर्थता के कारण इस्तीफा दिया। चुनाव पर्यवेक्षक प्रणव कुमार की देखरेख में पूरी प्रक्रिया संपन्न हुई।
- बोलबा प्रखंड में वनदुर्गा पूजा समिति का सर्वसम्मति से पुनर्गठन किया गया।
- ललन रौतिया को अध्यक्ष और जगरनाथ रौतिया को सचिव चुना गया।
- निवर्तमान अध्यक्ष जहुरण रौतिया ने व्यक्तिगत असमर्थता के कारण इस्तीफा दिया।
- चुनाव प्रक्रिया का संचालन पर्यवेक्षक प्रणव कुमार की देखरेख में हुआ।
- कोषाध्यक्ष सहित अन्य पदों पर भी सर्वसम्मति से चयन किया गया।
सिमडेगा जिले के बोलबा प्रखंड अंतर्गत प्रसिद्ध धार्मिक एवं दर्शनीय स्थल वनदुर्गा पूजा समिति का पुनर्गठन सर्वसम्मति से संपन्न हुआ। समिति के पुराने पदाधिकारियों के कार्यकाल पूरा होने और निवर्तमान अध्यक्ष जहुरण रौतिया द्वारा व्यक्तिगत असमर्थता के कारण पद से इस्तीफा देने के बाद नए सिरे से समिति के गठन का निर्णय लिया गया।
इस प्रक्रिया को पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए चुनाव पर्यवेक्षक प्रणव कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई, जिनकी देखरेख में सभी पदों का चयन सर्वसम्मति से किया गया।
समिति पुनर्गठन की प्रक्रिया
समिति के पुनर्गठन के लिए आयोजित बैठक में सभी सदस्यों ने आपसी विचार-विमर्श के बाद नए पदाधिकारियों का चयन किया। बैठक में आय-व्यय का लेखा-जोखा भी प्रस्तुत किया गया और पूर्व कार्यों की समीक्षा की गई।
इसके बाद सर्वसम्मति से नए पदाधिकारियों की घोषणा की गई और समिति की जिम्मेदारियों का औपचारिक हस्तांतरण किया गया।
नए पदाधिकारियों का चयन
बैठक में निम्नलिखित पदों पर सर्वसम्मति से चयन किया गया:
- अध्यक्ष: ललन रौतिया
- उपाध्यक्ष: कैलाश रौतिया, नितेश बड़ाईक, राजेश तेली
- सचिव: जगरनाथ रौतिया
- उप सचिव: गोवेर्धन रौतिया
- कोषाध्यक्ष: अरुण रौतिया
नए पदाधिकारियों को समिति से संबंधित पंजी, दस्तावेज और चाबियां भी औपचारिक रूप से सौंप दी गईं।
निवर्तमान अध्यक्ष का इस्तीफा
पूर्व अध्यक्ष जहुरण रौतिया ने व्यक्तिगत असमर्थता के कारण अपने पद से इस्तीफा दिया। उनके कार्यकाल में समिति के कई कार्यों को आगे बढ़ाया गया, जिसे बैठक में सराहा भी गया।
बैठक में उनके योगदान को लेकर सदस्यों ने आभार व्यक्त किया।
पारदर्शिता और वित्तीय व्यवस्था पर जोर
नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सभी प्रकार के आय-व्यय का लेखा-जोखा नियमित रूप से कैश बुक में दर्ज किया जाए। साथ ही सभी भुगतान केवल चेक के माध्यम से किए जाने पर जोर दिया गया ताकि वित्तीय पारदर्शिता बनी रहे।
समिति सदस्यों ने कहा कि धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों में पारदर्शिता अत्यंत आवश्यक है।
सम्मान समारोह और सामाजिक सहभागिता
इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष टकबर सिंह ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को फूलमाला और अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।
समारोह में उपस्थित ग्रामीणों और सदस्यों ने नई समिति के गठन का स्वागत किया और इसे धार्मिक गतिविधियों के बेहतर संचालन की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
ग्रामीणों और सदस्यों की भागीदारी
बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और समिति सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से केशरी रौतिया, कालो खलखो, शशि प्रसाद, कलिंदर सिंह, धीरनाथ रौतिया, महेंद्र रौतिया, गजेंद्र रौतिया, भोंदा रौतिया, हरिराम रौतिया सहित अन्य लोग शामिल थे।
सभी ने मिलकर समिति के भविष्य के कार्यों पर चर्चा की और विकासात्मक दिशा में सुझाव दिए।
धार्मिक और सामाजिक महत्व
वनदुर्गा पूजा समिति क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। इसके पुनर्गठन से आने वाले समय में पूजा-पाठ और सामाजिक कार्यक्रमों के बेहतर संचालन की उम्मीद जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि नई समिति पारदर्शिता और सक्रियता के साथ कार्य करेगी।
न्यूज़ देखो: सामूहिक नेतृत्व और पारदर्शिता की मिसाल
बोलबा में हुआ यह समिति पुनर्गठन सामूहिक निर्णय और सर्वसम्मति की एक सकारात्मक मिसाल है। यह दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक कार्य पारदर्शिता और आपसी सहयोग से सफलतापूर्वक संचालित किए जा सकते हैं।
हालांकि, अब महत्वपूर्ण यह होगा कि नई समिति अपनी जिम्मेदारियों को कितनी प्रभावशीलता और निरंतरता के साथ निभाती है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
सामूहिक निर्णय से मजबूत होती सामाजिक संरचना
ऐसे पुनर्गठन सामाजिक एकता और संगठनात्मक मजबूती को दर्शाते हैं। जब समुदाय मिलकर निर्णय लेता है, तो व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनती है।
यह जरूरी है कि नई समिति इस विश्वास को बनाए रखते हुए धार्मिक और सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाए।
सजग रहें, एकजुट रहें और अपने समाज के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाएं। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और सामुदायिक सहयोग को मजबूत बनाएं।

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