सिमडेगा में एनएच-320 चौड़ीकरण के दौरान सरना स्थल के पेड़ काटे जाने पर ग्रामीणों का आक्रोश, दो घंटे तक सड़क जाम

सिमडेगा में एनएच-320 चौड़ीकरण के दौरान सरना स्थल के पेड़ काटे जाने पर ग्रामीणों का आक्रोश, दो घंटे तक सड़क जाम

author Shivnandan Baraik
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#सिमडेगा #सड़कजाम #एनएच320_विवाद : कोलेबिरा–मनोहरपुर मार्ग पर सरना स्थल के पेड़ कटने से ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।

सिमडेगा में कोलेबिरा–मनोहरपुर एनएच-320 सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान साउबेडा पंचायत के ग्राम के सडीबा के पास सरना स्थल के पेड़ काटे जाने पर ग्रामीणों ने शनिवार को सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों ने पेड़ों के टुकड़े सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान राउरकेला, मनोहरपुर, रांची और सिमडेगा की ओर जाने वाले वाहन करीब दो घंटे फंसे रहे। प्रशासन और स्थानीय प्रतिनिधियों के हस्तक्षेप के बाद जाम हटाया गया।

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  • कोलेबिरा–मनोहरपुर एनएच-320 चौड़ीकरण कार्य के दौरान सरना स्थल के पेड़ काटे जाने का विरोध।
  • ग्रामीणों ने पेड़ों के टुकड़े सड़क पर रखकर बानो–मनोहरपुर मार्ग जाम कर दिया।
  • जाम के कारण रांची, राउरकेला, मनोहरपुर और सिमडेगा रूट की बसें दो घंटे फंसी रहीं।
  • साउबेडा मुखिया सुसाना जोजो, जेएमएम प्रखंड उपाध्यक्ष तुरतन गुड़िया, कामिल डांग और गिरदा थाना प्रशासन ने समझाकर जाम हटवाया।
  • सरना धर्मावलंबियों ने सरना स्थल की सुरक्षा और सम्मान की मांग दोहराई।

सिमडेगा जिले में कोलेबिरा–मनोहरपुर राष्ट्रीय राजमार्ग 320 के चौड़ीकरण कार्य को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। साउबेडा पंचायत के ग्राम के सडीबा के पास सरना स्थल के समीप पेड़ों की कटाई को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। शनिवार को गुस्साए ग्रामीणों ने सड़क पर पेड़ों के कटे हुए टुकड़े रखकर बानो–मनोहरपुर मार्ग को पूरी तरह जाम कर दिया।

इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और रांची, राउरकेला, मनोहरपुर तथा सिमडेगा की ओर आने-जाने वाली बसें और अन्य वाहन करीब दो घंटे तक फंसे रहे। यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पेड़ कटाई को लेकर भड़का विवाद

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान संवेदक द्वारा सरना स्थल के पास स्थित पेड़ों को काट दिया गया, जिससे धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाएं आहत हुई हैं। इसी के विरोध में ग्रामीण एकजुट होकर सड़क पर उतर आए और जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने साफ कहा कि सरना स्थल उनकी आस्था का केंद्र है और इसके आसपास किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं की जाएगी।

सड़क जाम और यातायात पर असर

सड़क जाम के कारण एनएच-320 पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। बसें और निजी वाहन दोनों ओर फंसे रहे। यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

स्थिति गंभीर होती देख स्थानीय प्रशासन को मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा।

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की पहल

जाम की सूचना मिलने के बाद साउबेडा मुखिया सुसाना जोजो, जेएमएम प्रखंड उपाध्यक्ष तुरतन गुड़िया, कामिल डांग और गिरदा थाना प्रशासन मौके पर पहुंचे। सभी ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया।

काफी समझाने-बुझाने के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम समाप्त किया और यातायात बहाल हुआ।

सरना धर्मावलंबियों की चेतावनी

ग्रामीणों और सरना धर्मावलंबियों ने संवेदक और संबंधित निर्माण एजेंसी को सख्त चेतावनी दी कि भविष्य में सरना स्थल से जुड़े किसी भी पेड़ या संरचना को नुकसान न पहुंचाया जाए।

उन्होंने कहा कि सरना स्थल उनकी धार्मिक आस्था का केंद्र है और इसकी रक्षा करना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ग्रामीण प्रतिनिधि कामिल डांग ने कहा: “हमारे गांव में सरना स्थल ही सबसे बड़ा तीर्थ स्थान है। हम सिंगबोंगा, सूर्य देवता और सरना की पूजा कर गांव की रक्षा, अच्छी बारिश और महामारी से सुरक्षा की कामना करते हैं।”

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

ग्रामीणों ने यह भी स्पष्ट किया कि सरना स्थल केवल पूजा का स्थान नहीं बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यहां परंपरागत रूप से पहान और पुजारी द्वारा विधिवत पूजा-अर्चना की जाती है।

उन्होंने बताया कि हाल ही में सरना स्थल के सुधार कार्य के लिए संवेदक से सहयोग राशि ली गई थी ताकि धार्मिक विधि के अनुसार पूजन कर गांव की सुरक्षा की कामना की जा सके।

विकास कार्य और संवेदनशीलता का सवाल

एनएच-320 का चौड़ीकरण क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन इसके साथ-साथ स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।

यह घटना दर्शाती है कि विकास कार्यों में स्थानीय भावनाओं और परंपराओं का सम्मान करना कितना जरूरी है, ताकि विवाद की स्थिति न बने।

न्यूज़ देखो: विकास बनाम आस्था के बीच संतुलन की चुनौती

सिमडेगा की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के दौरान स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण कितना सुनिश्चित है। सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्य जरूरी हैं, लेकिन सरना जैसे आस्था स्थलों को लेकर संवेदनशीलता भी उतनी ही आवश्यक है।

प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के लिए यह जरूरी है कि भविष्य में ऐसे विवादों से बचने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ पहले से समन्वय स्थापित किया जाए। क्या विकास कार्य और सांस्कृतिक आस्था के बीच संतुलन बन पाएगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

विकास और आस्था के बीच संवाद ही समाधान

यह घटना दिखाती है कि किसी भी विकास परियोजना की सफलता केवल निर्माण कार्य से नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता से जुड़ी होती है। जब स्थानीय लोगों की भावनाओं को समझा जाता है, तभी स्थायी समाधान संभव होता है।

अब आवश्यकता है कि सभी पक्ष मिलकर ऐसे ढांचे तैयार करें जिससे विकास भी हो और आस्था का सम्मान भी बना रहे।

सजग रहें, एकजुट रहें और अपने अधिकारों के साथ-साथ संस्कृति की रक्षा के लिए भी जागरूक बनें। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और समाज में संवाद की इस प्रक्रिया को मजबूत करें।

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Written by

बानो, सिमडेगा

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