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करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक जर्जर सड़क से ग्रामीण परेशान, वादे के बाद भी निर्माण नहीं शुरू

#गुमला #सड़क_समस्या : करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक सड़क निर्माण की मांग दोहराई गई।

गुमला जिले के करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक की सड़क लंबे समय से जर्जर हालत में है, जिससे हजारों ग्रामीण प्रभावित हैं। 28 सितंबर 2025 को धरना प्रदर्शन के बाद निर्माण का आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कार्य शुरू नहीं हुआ। ग्रामीणों ने उपायुक्त को पत्र लिखकर कालीकरण की मांग दोहराई है। समस्या से शिक्षा, कृषि और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है।

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  • करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक लगभग 10 किमी सड़क जर्जर।
  • 28 सितंबर 2025 को धरना, बरसात बाद निर्माण का मिला आश्वासन।
  • 10 से 15 हजार ग्रामीण सीधे प्रभावित।
  • किसानों और मुर्गी व्यवसायियों को आर्थिक नुकसान।
  • उपायुक्त गुमला को पत्र देकर कालीकरण की मांग।

गुमला जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में विकास के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की कमी एक बार फिर सामने आई है। करंजटोली से खटंगा नवा टोली और आसपास के विभिन्न टोलों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें लंबे समय से खराब स्थिति में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन सड़कों की मरम्मत और कालीकरण को लेकर कई बार मांग उठाई गई, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

किन मार्गों की स्थिति सबसे अधिक खराब

ग्रामीणों के अनुसार, कई महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग वर्तमान में चलने लायक नहीं बचे हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • करंजटोली से गुटवा पुल तक का मार्ग
  • करंजटोली मुख्य पथ से केराटोली, महुआ टोली होते हुए बरटोली तक का मार्ग
  • करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक लगभग 10 किलोमीटर लंबा रास्ता
  • पिच रोड से खटंगा होते हुए अड़ियाँ नदी तक करीब 4 किलोमीटर का मार्ग

इन सड़कों की बदहाली के कारण स्थानीय लोगों को रोजमर्रा के आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जब पूरा इलाका कीचड़ से भर जाता है।

धरना के बाद भी नहीं शुरू हुआ काम

ग्रामीणों ने बताया कि 28 सितंबर 2025 को इन सड़कों के निर्माण की मांग को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया गया था। उस समय वरीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि बरसात समाप्त होते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

हालांकि अब बरसात बीत चुकी है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, जबकि समस्या जस की तस बनी हुई है।

जनजीवन और अर्थव्यवस्था पर असर

सड़क की खराब स्थिति का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव स्थानीय अर्थव्यवस्था और शिक्षा पर भी पड़ रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार:

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  • लगभग 10 से 15 हजार लोग इस समस्या से प्रभावित हैं।
  • किसान अपनी उपज समय पर बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहे।
  • मुर्गी पालन से जुड़े व्यवसायियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
  • छात्रों को बदरी हाई स्कूल पहुंचने में कठिनाई हो रही है।

यह मार्ग घाघरा और सिसई प्रखंड के बीच दूरी कम करने वाला महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग माना जाता है, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह मार्ग खुद ही बाधा बन गया है।

उपायुक्त से लगाई गुहार

ग्रामीणों ने एक बार फिर उपायुक्त (DC), गुमला को पत्र लिखकर सड़कों के शीघ्र कालीकरण की मांग की है। आवेदन में स्पष्ट किया गया है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हुआ, तो ग्रामीण उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

आवेदन देने वालों में नवडीहा उप मुखिया बिनीता कुमारी, पंकज भगत, बुद्धू उरांव, गणेश बड़ाइक, जयराम उरांव सहित अन्य ग्रामीण शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इस बार वे केवल आश्वासन से संतुष्ट नहीं होंगे।

विकास के दावों पर सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में विकास के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव ग्रामीण जीवन को सीधे प्रभावित कर रहा है।

सड़क निर्माण न होने से आपातकालीन स्थितियों में मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी होती है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो समस्या और गंभीर हो सकती है।

न्यूज़ देखो: बुनियादी सुविधाओं पर प्रशासन की परीक्षा

करंजटोली से खटंगा नवा टोली तक की सड़क की स्थिति ग्रामीण विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। धरना के बाद आश्वासन मिलना और फिर काम का शुरू न होना प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा बनता है। अब निगाहें उपायुक्त और संबंधित विभाग पर टिकी हैं कि वे कब तक ठोस कदम उठाते हैं। सड़क जैसी मूलभूत सुविधा में देरी से जनता का भरोसा कमजोर होता है। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।

हक की आवाज उठाएं, विकास की मांग करें

सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं हर नागरिक का अधिकार हैं।
यदि समस्या है तो संगठित होकर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाना जरूरी है।
स्थानीय प्रशासन से संवाद बनाए रखें और विकास कार्यों की निगरानी करें।
जागरूक नागरिक ही क्षेत्र को आगे बढ़ाते हैं।

आपके क्षेत्र में भी ऐसी कोई समस्या है? अपनी बात कमेंट में साझा करें, खबर को आगे बढ़ाएं और जनहित के मुद्दों को मजबूत आवाज दें।

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