#गुमला #वटसावित्रीपूजा_सिसई : सिसई प्रखंड में सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा के साथ व्रत एवं पूजा की।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड क्षेत्र में वट सावित्री पूजा धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखा और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। वट वृक्ष की परिक्रमा कर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण और आस्था का माहौल देखने को मिला।
- सिसई प्रखंड, गुमला में वट सावित्री पूजा श्रद्धा के साथ मनाई गई।
- सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु के लिए व्रत रखा।
- वट वृक्ष की पूजा कर परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन किया गया।
- पूरे क्षेत्र में धार्मिक और आस्था का माहौल देखने को मिला।
- महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड में वट सावित्री पूजा के अवसर पर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही सुहागिन महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में वट वृक्ष के पास एकत्रित हुईं और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने निर्जला व्रत रखते हुए अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
पूजा के दौरान वट वृक्ष की परिक्रमा कर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन किया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वट सावित्री पूजा सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखती है, जिसमें वे अपने वैवाहिक जीवन की खुशहाली और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं।
पारंपरिक आस्था के साथ मनाया गया पर्व
सिसई प्रखंड क्षेत्र में वट सावित्री पूजा को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सुबह से ही महिलाएं पूजा की तैयारी में जुट गई थीं। वट वृक्ष के नीचे पूजा स्थल को सजाया गया और पारंपरिक विधि से पूजा सम्पन्न की गई।
महिलाओं ने कथा श्रवण कर सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा को याद किया और उसी आस्था के साथ व्रत का पालन किया।
सुहागिन महिलाओं की आस्था और व्रत
इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने निर्जला व्रत रखा और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा की। उन्होंने वट वृक्ष की परिक्रमा करते हुए धागा बांधकर अपने वैवाहिक जीवन की सुरक्षा और पति की दीर्घायु की कामना की।
स्थानीय महिलाओं का कहना था कि यह पर्व उनके जीवन में आस्था और विश्वास का प्रतीक है, जिसे वे हर वर्ष पूरी श्रद्धा से मनाती हैं।

धार्मिक वातावरण में गूंजे मंत्र और भजन
पूरे सिसई प्रखंड में पूजा के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा। महिलाओं द्वारा किए गए मंत्रोच्चारण और भजनों से वातावरण भक्तिमय हो गया। वट वृक्ष के नीचे एकत्रित होकर महिलाओं ने सामूहिक रूप से पूजा संपन्न की।
सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व
वट सावित्री पूजा केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। इस अवसर पर महिलाएं एक साथ मिलकर परंपराओं को आगे बढ़ाती हैं और अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखती हैं।
यह पर्व परिवार और समाज में रिश्तों की मजबूती और आस्था को दर्शाता है।

न्यूज़ देखो: आस्था और परंपरा से जुड़ा जीवंत लोक पर्व
सिसई में मनाई गई वट सावित्री पूजा यह दर्शाती है कि ग्रामीण और प्रखंड क्षेत्रों में आज भी परंपरागत आस्था गहराई से जुड़ी हुई है। यह पर्व महिलाओं की श्रद्धा, समर्पण और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है।
ऐसे आयोजन न केवल धार्मिक भावना को मजबूत करते हैं बल्कि सामाजिक एकता को भी बढ़ावा देते हैं। आने वाली पीढ़ियों के लिए इन परंपराओं का संरक्षण आवश्यक है।
हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
आस्था, परंपरा और एकता का संदेश
वट सावित्री पूजा भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति और आस्था का प्रतीक है। सिसई में मनाया गया यह पर्व समाज को एकजुटता और पारंपरिक मूल्यों की याद दिलाता है।
ऐसे अवसर हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहने और संस्कृति को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देते हैं।
सजग रहें, अपनी परंपराओं को संजोए रखें और समाज में सकारात्मक संदेश फैलाएं। अपनी राय कमेंट करें, इस खबर को साझा करें और संस्कृति की इस विरासत को आगे बढ़ाएं।

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