#खलारी #पेसा_कानून : विद्यार्थियों की बहस से विद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक वातावरण बना।
डीएवी पब्लिक स्कूल खलारी में मंगलवार को पेसा कानून 1996 पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने कानून के पक्ष और विपक्ष में तार्किक बहस प्रस्तुत कर संसदीय माहौल बना दिया। कार्यक्रम में विभिन्न पंचायतों के मुखिया और अभिभावकों ने भी भाग लेकर विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की।
- डीएवी पब्लिक स्कूल खलारी में पेसा कानून पर वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित।
- विद्यार्थियों ने पक्ष और विपक्ष में प्रभावशाली तर्क रखे।
- कार्यक्रम में विभिन्न पंचायतों के मुखिया विशेष रूप से रहे उपस्थित।
- विद्यालय परिसर में संसदीय वातावरण जैसा माहौल देखने को मिला।
- डॉ. कमलेश कुमार ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर दिया जोर।
- विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास की हुई सराहना।
खलारी स्थित डीएवी पब्लिक स्कूल में मंगलवार को आयोजित पेसा कानून 1996 विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता चर्चा का केंद्र बन गई। वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत तार्किक बहस और लोकतांत्रिक शैली ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। विद्यालय परिसर में ऐसा वातावरण बना मानो किसी संसद सत्र का संचालन हो रहा हो।
अतिथियों का पारंपरिक स्वागत
कार्यक्रम में खलारी प्रखंड की विभिन्न पंचायतों के मुखिया विशेष रूप से उपस्थित रहे। इनमें पुतुल देवी, पुष्पा खालको, तेजी केस्टोपा, मलका मुंडा, दीपमाला कुमारी, ललिता कुमारी, शीला कुमारी और पारस नाथ उरांव शामिल थे।
विद्यालय पहुंचने पर सभी अतिथियों का चंदन तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इसके बाद विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने गुलाब का फूल और शॉल भेंट कर उनका सम्मान किया।
विद्यार्थियों ने रखे प्रभावशाली तर्क
वाद-विवाद प्रतियोगिता में कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने पेसा कानून 1996 के पक्ष और विपक्ष में अपने विचार प्रस्तुत किए।
एक समूह ने पेसा कानून को आदिवासी स्वशासन, ग्राम सभा की मजबूती और जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा के लिए आवश्यक बताया। वहीं दूसरे समूह ने इसके क्रियान्वयन में आने वाली प्रशासनिक चुनौतियों और व्यवहारिक समस्याओं पर अपने तर्क रखे।
विद्यार्थियों की तार्किक क्षमता और आत्मविश्वास ने उपस्थित लोगों को प्रभावित कर दिया। हर तर्क और प्रतितर्क के बाद सभागार तालियों की गूंज से भर उठता था।
मुखियाओं ने विद्यार्थियों की सराहना की
कार्यक्रम में उपस्थित मुखियाओं ने विद्यार्थियों की प्रतिभा और विषय की समझ की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों में नेतृत्व क्षमता और सामाजिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
एक मुखिया ने कहा:
“बच्चों ने जिस गंभीरता और आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखी, वह बेहद प्रेरणादायक है।”
प्राचार्य ने बताया पेसा कानून का महत्व
विद्यालय के प्राचार्य डॉ. कमलेश कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के अंदर लोकतांत्रिक और संसदीय मूल्यों को विकसित करते हैं।
डॉ. कमलेश कुमार ने कहा: “विद्यार्थियों की बहस सुनकर ऐसा लग रहा था मानो देश की संसद विद्यालय परिसर में ही आ गई हो।”
उन्होंने बताया कि पेसा कानून 1996 अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समुदायों को ग्राम सभा के माध्यम से स्वशासन का अधिकार प्रदान करता है। यह कानून जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों की प्रस्तुति इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी सामाजिक और संवैधानिक विषयों के प्रति जागरूक हो रही है।
प्रभावशाली रहा मंच संचालन
कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों और श्रोताओं ने भी विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। मंच संचालन विद्यालय की शिक्षिका सोनाली मेहता ने प्रभावशाली ढंग से किया।
पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह और विषय के प्रति गंभीरता देखने लायक रही।

न्यूज़ देखो: शिक्षा के साथ लोकतांत्रिक जागरूकता की मिसाल
डीएवी खलारी में आयोजित यह वाद-विवाद प्रतियोगिता केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जागरूकता और संवैधानिक समझ विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुई। विद्यार्थियों ने जिस परिपक्वता के साथ पेसा कानून जैसे गंभीर विषय पर अपने विचार रखे, वह नई पीढ़ी की सामाजिक जागरूकता को दर्शाता है। ऐसे आयोजन शिक्षा को किताबों से बाहर समाज और संविधान से जोड़ने का कार्य करते हैं। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जागरूक युवा ही मजबूत लोकतंत्र की पहचान
जब विद्यार्थी संविधान, अधिकार और समाज के मुद्दों को समझने लगते हैं, तब लोकतंत्र और मजबूत होता है।
विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि नेतृत्व और विचार निर्माण की पाठशाला भी है।
बच्चों को संवाद, बहस और जागरूकता के ऐसे अवसर मिलते रहना जरूरी है।
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