#गुमला #वन्यजीवआतंक : हाथी के हमले से घर क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने रतजगा शुरू किया।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड अंतर्गत ओलमुंडा बाकुटोली पतराघर के पास जंगली हाथी ने देर रात जमकर उत्पात मचाया। हाथी ने ग्रामीण अनिल उरांव के घर को तोड़ दिया और घर में रखे धान को खा गया। अचानक हुए इस हमले से गांव में दहशत फैल गई है और लोग रातभर जागकर सुरक्षा करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मुआवजे और तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
- सिसई के ओलमुंडा बाकुटोली पतराघर क्षेत्र में जंगली हाथी का हमला।
- हाथी ने ग्रामीण अनिल उरांव का मकान तोड़ा और धान खाया।
- हमले के बाद गांव में भय और दहशत का माहौल बन गया।
- ग्रामीणों ने वन विभाग से मुआवजे की मांग की है।
- घटना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची।
गुमला जिले के सिसई प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत ओलमुंडा बाकुटोली पतराघर के पास देर रात जंगली हाथी ने जमकर उत्पात मचाया। इस घटना से पूरे इलाके में दहशत का माहौल फैल गया है और ग्रामीण अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
आधी रात घर पर हुआ हाथी का हमला
स्थानीय ग्रामीण अनिल उरांव, पिता स्व. सीताराम उरांव ने बताया कि रात करीब 12 बजे जंगली हाथी अचानक उनके घर के पास पहुंचा और दीवार तोड़कर घर में घुस गया। हाथी के हमले से मकान को काफी नुकसान पहुंचा।
धान और सामान का भारी नुकसान
हाथी ने घर के अंदर रखे धान को भी खा लिया और अन्य घरेलू सामान को बर्बाद कर दिया। अचानक हुए इस हमले से परिवार को आर्थिक नुकसान भी हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना बेहद डरावनी थी और लोग जान बचाकर घरों से बाहर निकलने को मजबूर हो गए।
गांव में दहशत, लोग कर रहे रतजगा
घटना के बाद पूरे गांव में भय का माहौल है। ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं ताकि हाथी दोबारा गांव में प्रवेश न कर सके। महिलाओं और बच्चों में भी डर का माहौल देखा जा रहा है।
वन विभाग से मुआवजे की मांग
पीड़ित ग्रामीण अनिल उरांव ने वन विभाग से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथियों के हमलों से लगातार नुकसान हो रहा है, लेकिन समय पर राहत नहीं मिल रही है।
वन विभाग की टीम नहीं पहुंची
घटना के बाद समाचार लिखे जाने तक वन विभाग की कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची थी, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ गई है।
न्यूज़ देखो: मानव-वन्यजीव संघर्ष बनता गंभीर समस्या
सिसई क्षेत्र में हाथियों का उत्पात यह दर्शाता है कि मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में फसल और घरों को नुकसान आम बात बनती जा रही है। ऐसे मामलों में त्वरित वन विभागीय कार्रवाई और मुआवजा व्यवस्था बेहद जरूरी है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और स्थिति नियंत्रित रहे। हर खबर पर रहेगी हमारी नजर।
जंगल और गांव के बीच संतुलन जरूरी
वन्यजीवों का संरक्षण महत्वपूर्ण है, लेकिन ग्रामीणों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
समय पर रोकथाम और उचित प्रबंधन से ऐसे हादसों को कम किया जा सकता है।
जागरूक बनें, प्रशासन को सूचना दें और सुरक्षित रहने के उपाय अपनाएं। अपनी राय कमेंट करें और खबर को साझा करें।

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